गणित प्रकाश अध्याय 9 आइए, पता लगाएँ

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
नीचे दिए गए वृत्त के त्रिज्याखंडों में इस प्रकार रंग भरिए कि आकृति में (i) 3 सममिति के कोण हों। (ii) 4 सममिति के कोण हों। (iii) सममिति के संभव कोणों की संख्या क्या होगी? यदि इन त्रिज्याखंडों को अलग-अलग रंगों से अलग-अलग विधियों द्वारा भरा जाए तो,
उत्तर

वृत्त 12 बराबर त्रिज्याखंडों में बँटा है, अत: प्रत्येक त्रिज्याखंड—

360° ÷ 12 = 30°
(i) 3 कोण (ii) 4 कोण
3 सममिति कोणों के लिए हर चौथा त्रिज्याखंड रंगिए; 4 सममिति कोणों के लिए हर तीसरा त्रिज्याखंड रंगिए।

(i) 3 सममिति कोणों के लिएहर चौथा त्रिज्याखंड रंगिए (3 रंगे हुए त्रिज्याखंड, 120° के अंतर पर)।

न्यूनतम कोण = 4 × 30° = 120° → सममिति कोण 120°, 240°, 360°

(ii) 4 सममिति कोणों के लिएहर तीसरा त्रिज्याखंड रंगिए (4 रंगे हुए त्रिज्याखंड, 90° के अंतर पर)।

न्यूनतम कोण = 3 × 30° = 90° → सममिति कोण 90°, 180°, 270°, 360°

(iii) कौन-कौन सी संख्याएँ संभव हैं? रंगाई का पैटर्न पूरे त्रिज्याखंडों के बाद ही दोहराना चाहिए, इसलिए क्रम को 12 का भाजक होना पड़ेगा।

सममिति कोणों की संभव संख्याएँ = 1, 2, 3, 4, 6 तथा 12 — अर्थात् 12 के गुणनखंड
हर कौन-सा त्रिज्याखंड रंगेंरंगे हुए त्रिज्याखंडन्यूनतम कोणसममिति कोणों की संख्या
हर एक (सभी 12)1230°12
हर दूसरा660°6
हर तीसरा490°4
हर चौथा3120°3
हर छठा2180°2
कोई असंतुलित रंगाई360°1
केवल 12 के गुणनखंड ही क्यों: जो घूर्णन रंगाई से मेल खाएगा वह हर रंगे त्रिज्याखंड को किसी रंगे त्रिज्याखंड पर ले जाएगा, अत: वह पूरे त्रिज्याखंडों जितना ही होगा — 30°, 60°, 90° … और उसे बार-बार करने पर ठीक 360° पर पहुँचना चाहिए। इसलिए क्रम को 12 का भाजक होना पड़ेगा। 5, 7, 8, 9, 10 और 11 संभव नहीं हैं।
प्र2.
वृत्त और वर्ग को छोड़कर, ऐसी अन्य दो आकृतियाँ बनाइए, जिनमें परावर्तीय सममिति और घूर्णन सममिति दोनों हों।
उत्तर

कोई भी सम बहुभुज या सम तारा काम करेगा। दो आसान उदाहरण:

3 रेखाएँ, क्रम 3 6 रेखाएँ, क्रम 6
समबाहु त्रिभुज और सम षट्भुज: दोनों को मोड़ा भी जा सकता है और घुमाया भी।
  • समबाहु त्रिभुज3 सममिति की रेखाएँ तथा 3 सममिति के कोण (120°, 240°, 360°)।
  • सम षट्भुज6 सममिति की रेखाएँ तथा 6 सममिति के कोण (60°, 120°, 180°, 240°, 300°, 360°)।
और उदाहरण: आयत (2 रेखाएँ, क्रम 2), समचतुर्भुज (2 रेखाएँ, क्रम 2), सम पंचभुज (5 रेखाएँ, क्रम 5), पाँच नोकों वाला तारा (5 रेखाएँ, क्रम 5) तथा अधिकांश रंगोली डिज़ाइन।
प्र3.
जहाँ भी संभव हो, निम्नलिखित का एक कच्चा स्केच खींचिए— a. एक त्रिभुज, जिसमें न्यूनतम दो सममिति की रेखाएँ हों तथा न्यूनतम दो सममिति के कोण हों। b. एक त्रिभुज, जिसमें केवल एक सममिति की रेखा हो लेकिन कोई घूर्णन सममिति न हो। c. घूर्णन सममिति वाला ऐसा चतुर्भुज, जिसमें कोई परावर्तीय सममिति न हो। d. एक परावर्तीय सममिति वाला चतुर्भुज, जिसमें कोई घूर्णन सममिति न हो।
उत्तर
(a) 3 रेखाएँ, क्रम 3 (b) 1 रेखा, क्रम 1 (c) 0 रेखा, क्रम 2 (d) 1 रेखा, क्रम 1
बिंदुकित रेखाएँ सममिति की रेखाएँ हैं; लाल बिंदु घूर्णन का केंद्र दर्शाता है।
  • a. समबाहु त्रिभुज। इसमें 3 सममिति की रेखाएँ (दो से अधिक) तथा 3 सममिति के कोण — 120°, 240°, 360° हैं। वास्तव में किसी त्रिभुज में ठीक दो रेखाएँ या ठीक दो कोण कभी नहीं हो सकते, इसलिए समबाहु त्रिभुज ही एकमात्र उत्तर है।
  • b. समद्विबाहु त्रिभुज (दो भुजाएँ बराबर, तीसरी अलग)। इसमें ठीक 1 सममिति की रेखा है और सममिति का एकमात्र कोण 360° है, अत: घूर्णन सममिति नहीं है।
  • c. समांतर चतुर्भुज, जो न आयत हो न समचतुर्भुज। इसमें कोई सममिति रेखा नहीं, फिर भी विकर्णों के कटान-बिंदु के परित आधा चक्कर (180°) इसे स्वयं पर ले आता है — क्रम 2। (“S” या “Z” आकार तथा कागज की पवन-चक्की भी ऐसे ही उदाहरण हैं।)
  • d. पतंग (kite) — या समद्विबाहु समलंब। इसमें ठीक 1 सममिति की रेखा (लंबा विकर्ण) है, परंतु घूर्णन सममिति नहीं: आधा चक्कर उसके नुकीले कोने को चौड़े कोने से बदल देगा।
इस प्रश्न की सीख: सममिति की रेखाएँ और सममिति के कोण दो अलग बातें हैं। किसी आकृति में दोनों हो सकते हैं (a), केवल रेखाएँ (b, d), केवल कोण (c) — या दोनों में से कोई नहीं।
प्र4.
एक आकृति में सममिति का न्यूनतम कोण 60° है। इस आकृति के अन्य सममिति के कोण क्या हैं?
उत्तर

हर सममिति कोण न्यूनतम कोण का गुणज होता है और 360° सदैव सममिति कोण होता है। अत: 60° जोड़ते जाइए जब तक 360° न आ जाए।

60°,   60° + 60° = 120°,   180°,   240°,   300°,   360°

अन्य सममिति कोण हैं — 120°, 180°, 240°, 300° तथा 360°।

घूर्णन सममिति का क्रम = 360° ÷ 60° = 6
ऐसी आकृतियाँ: सम षट्भुज, छह पंखुड़ियों वाला फूल, हिमकण या छह पंखों वाला पंखा।
प्र5.
एक आकृति में एक सममिति का कोण 60° है। इस आकृति के दो सममिति के कोण 60° से कम हैं। सममिति का न्यूनतम कोण क्या होगा?
उत्तर

मान लीजिए न्यूनतम सममिति कोण s है। सभी सममिति कोण s, 2s, 3s, … होंगे।

आकृति के ठीक दो सममिति कोण 60° से छोटे हैं; ये s और 2s ही होंगे। और चूँकि 60° भी सममिति कोण है, 2s के बाद वाला गुणज 60° होना चाहिए:

3s = 60°
s = 60° ÷ 3 = 20°

न्यूनतम सममिति कोण 20° है।

जाँच: 60° से छोटे कोण 20° और 40° — ठीक दो ✔   तथा 60° तीसरा गुणज ✔
क्रम = 360° ÷ 20° = 18
प्र6.
क्या हम घूर्णन सममिति के साथ एक ऐसी आकृति प्राप्त कर सकते हैं, जिसमें सममिति का न्यूनतम कोण (a) 45° है? (b) 17° है?
उत्तर

जाँच सरल है: न्यूनतम सममिति कोण को 360° में पूरा-पूरा विभाजित करना चाहिए।

(a) 45°? हाँ।

360° ÷ 45° = 8 (पूर्ण संख्या)

ऐसी आकृति के 8 सममिति कोण होंगे: 45°, 90°, 135°, 180°, 225°, 270°, 315°, 360°। सम अष्टभुज, आठ नोकों वाला तारा या आठ पंखों वाला पंखा इसके उदाहरण हैं।

(b) 17°? नहीं।

360° ÷ 17° = 21 शेष 3  →  पूर्ण संख्या नहीं

यदि 17° सममिति कोण होता, तो 17° × 21 = 357° भी होता, और एक और 17° घुमाने पर 374° — अर्थात् पूरे चक्कर से 14° आगे। तब 14° भी सममिति कोण हो जाता, जो 17° से छोटा है। इससे “17° न्यूनतम है” का खंडन होता है। अत: 17° असंभव है

याद रखने योग्य नियम: न्यूनतम सममिति कोण (जब वह पूर्ण संख्या हो) सदैव 360 का गुणनखंड होता है।
प्र7.
यह दिल्ली में स्थित नए संसद भवन का चित्र है— a. क्या इस चित्र की बाहरी परिसीमा (boundary) में परावर्तन सममिति है? यदि ऐसा है, तो सममिति की रेखाएँ खींचिए। वे कितनी हैं? b. क्या इसकी अपने केंद्र के परित घूर्णन सममिति है? यदि ऐसा है, तो घूर्णन सममिति के कोण ज्ञात कीजिए।
उत्तर

नए संसद भवन की बाहरी परिसीमा ऐसा त्रिभुज है जिसके तीनों कोने कटे हुए हैं — तीनों लंबी भुजाएँ बराबर और तीनों कटे कोने भी बराबर।

नए संसद भवन की रूपरेखा: केंद्र पर मिलती 3 सममिति की रेखाएँ।

a. हाँ, इसमें परावर्तन सममिति है — 3 सममिति की रेखाएँ हैं। हर रेखा एक भुजा के मध्य से और सामने वाले कटे कोने से होकर जाती है, और तीनों भवन के केंद्र पर मिलती हैं।

b. हाँ, उसी केंद्र के परित इसमें क्रम 3 की घूर्णन सममिति है।

न्यूनतम घूर्णन कोण = 360° ÷ 3 = 120°
घूर्णन सममिति के कोण = 120°, 240°, 360°
3 ही क्यों: परिसीमा तीन एक जैसे टुकड़ों (एक लंबी भुजा + एक कटा कोना) से बनी है, जो केंद्र के चारों ओर रखे हैं। एक-तिहाई चक्कर हर टुकड़े को ठीक अगले टुकड़े पर ले जाता है।
प्र8.
अध्याय 1, सारणी 3 में पहले आकृति अनुक्रम नियमित बहुभुज के आकार अनुक्रम की आकृतियों में सममिति की कितनी रेखाएँ हैं? आपको कौन-सा संख्या अनुक्रम मिलता है?
उत्तर
3 भुजाएँ → 3 4 भुजाएँ → 4 5 भुजाएँ → 5 6 भुजाएँ → 6
n भुजाओं वाले सम बहुभुज में ठीक n सममिति की रेखाएँ होती हैं।
सम बहुभुजत्रिभुजचतुर्भुजपंचभुजषट्भुजसप्तभुजअष्टभुजनवभुजदशभुज
भुजाएँ345678910
सममिति की रेखाएँ345678910

प्राप्त संख्या अनुक्रम है 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, … — अर्थात् 3 से आरंभ होने वाली गिनती की संख्याएँ। यह ठीक वही अनुक्रम है जो भुजाओं की संख्या का है।

रेखाएँ = भुजाएँ क्यों: भुजाओं की संख्या विषम होने पर हर सममिति रेखा एक शीर्ष को सम्मुख भुजा के मध्य-बिंदु से जोड़ती है — हर शीर्ष के लिए एक, अत: n रेखाएँ। भुजाओं की संख्या सम होने पर n/2 रेखाएँ सम्मुख शीर्षों को और n/2 रेखाएँ सम्मुख भुजाओं के मध्य-बिंदुओं को जोड़ती हैं — कुल फिर n।
प्र9.
अध्याय 1 की सारणी 3 में पहले आकृति अनुक्रम नियमित बहुभुज के आकार अनुक्रम की आकृतियों में सममिति के कितने कोण हैं? आपको कौन-सा संख्या अनुक्रम प्राप्त होता है?
उत्तर

n भुजाओं वाले सम बहुभुज के ठीक n सममिति कोण होते हैं, क्योंकि उसे एक “भुजा” जितना घुमाने पर हर शीर्ष अगले शीर्ष पर आ जाता है।

सम बहुभुजभुजाएँसममिति के कोणन्यूनतम कोण = 360° ÷ n
त्रिभुज33120°, 240°, 360°
चतुर्भुज (वर्ग)4490°, 180°, 270°, 360°
पंचभुज5572°, 144°, …, 360°
षट्भुज6660°, 120°, …, 360°
सप्तभुज775137°, …, 360°
अष्टभुज8845°, 90°, …, 360°
नवभुज9940°, 80°, …, 360°
दशभुज101036°, 72°, …, 360°

प्राप्त संख्या अनुक्रम फिर वही है — 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, …, अर्थात् प्रश्न 8 वाला ही अनुक्रम।

सुंदर निष्कर्ष: सम बहुभुज के लिए भुजाओं की संख्या = सममिति रेखाओं की संख्या = घूर्णन सममिति का क्रम, और उसका न्यूनतम घूर्णन कोण 360° ÷ n होता है।
प्र10.
अध्याय 1 की सारणी 3 में अंतिम आकृति अनुक्रम कोच स्नोफ्लेक के आकार अनुक्रम में आकृतियों में सममिति की कितनी रेखाएँ हैं? सममिति के कितने कोण हैं?
उत्तर

कोच स्नोफ्लेक अनुक्रम समबाहु त्रिभुज से आरंभ होता है; हर चरण में प्रत्येक सीधी भुजा के स्थान पर चार छोटी भुजाओं वाला “स्पीड ब्रेकर” रख दिया जाता है।

पहली आकृति: 3 रेखाएँ दूसरी आकृति: 6 रेखाएँ
पहली कोच आकृति त्रिभुज है (3 सममिति रेखाएँ); दूसरी आकृति से आगे वह छह नोकों वाली हो जाती है, जिसमें 6 रेखाएँ हैं।
अनुक्रम की आकृतिपहलीदूसरीतीसरीचौथीपाँचवीं
सममिति की रेखाएँ36666
सममिति के कोण36666

अत: दोनों अनुक्रम हैं — 3, 6, 6, 6, 6, …

6 पर स्थिर क्यों: पहली आकृति समबाहु त्रिभुज है — 3 रेखाएँ, कोण 120°, 240°, 360°। उसकी तीनों भुजाओं पर उभार जोड़ने से जानी-पहचानी छह नोकों वाली आकृति बनती है, जिसमें तीनों पुराने शीर्ष और तीनों नए उभार-शीर्ष केंद्र से समान दूरी पर और 60° के अंतर पर होते हैं। इसके बाद हर चरण में सभी भुजाओं पर एक जैसे उभार जुड़ते हैं, इसलिए छह-गुनी सममिति कभी नहीं टूटती: 6 सममिति रेखाएँ तथा सममिति कोण 60°, 120°, 180°, 240°, 300°, 360°।
प्र11.
अशोक चक्र में कितनी सममिति की रेखाएँ और सममिति के कोण होते हैं?
उत्तर

हमारे राष्ट्रीय ध्वज के मध्य में स्थित अशोक चक्र में 24 आरे (तीलियाँ) होते हैं, जो केंद्र के चारों ओर बराबर दूरी पर हैं।

अशोक चक्र — बराबर दूरी पर 24 आरे, अत: 24 सममिति रेखाएँ और 24 सममिति कोण।
आरों की संख्या = 24
सममिति की रेखाएँ = 24
सममिति के कोण = 24
न्यूनतम घूर्णन कोण = 360° ÷ 24 = 15°

सममिति के कोण हैं — 15°, 30°, 45°, 60°, …, 345°, 360°।

24 रेखाएँ क्यों: 24 एक सम संख्या है, इसलिए 12 रेखाएँ सम्मुख आरों के जोड़ों के अनुदिश जाती हैं और शेष 12 रेखाएँ दो पड़ोसी आरों के ठीक बीच से।
क्या आप जानते हैं? अशोक चक्र सारनाथ के अशोक स्तंभ के सिंह-शीर्ष से लिया गया है। कहा जाता है कि इसके 24 आरे दिन के 24 घंटों के प्रतीक हैं — और बराबर दूरी पर होने के कारण हर 15° के घूर्णन पर चक्र वैसा ही दिखता है।
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