गणित प्रकाश अध्याय 9 पाठ्य प्रश्न

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
प्रत्येक स्थिति में कोण, न्यूनतम कोण के गुणज हैं। आप उत्साहपूर्वक पूछ सकते हैं कि क्या ऐसा सदैव होता है? आप क्या सोचते हैं?
उत्तर

हाँ, ऐसा सदैव होता है। किसी भी आकृति का प्रत्येक सममिति कोण उसके न्यूनतम सममिति कोण का गुणज होता है।

ठीक 2 कोण: 180°, 360°  → 180 के गुणज
ठीक 3 कोण: 120°, 240°, 360°  → 120 के गुणज
ठीक 4 कोण: 90°, 180°, 270°, 360°  → 90 के गुणज
ऐसा होना ही क्यों चाहिए: मान लीजिए न्यूनतम सममिति कोण s है। s से घुमाने पर आकृति वैसी ही रहती है, तो दुबारा s घुमाने (अर्थात् 2s) पर भी वैसी ही रहेगी, और 3s, 4s … पर भी। अब मान लीजिए कोई सममिति कोण a ऐसा है जो s का गुणज नहीं है। तब a दो गुणजों के बीच होगा, मान लीजिए ks और (k+1)s के बीच। पहले a घुमाकर फिर ks पीछे घुमाने पर भी आकृति वैसी ही रहेगी — पर वह घूर्णन s से छोटा है, जबकि s को न्यूनतम माना गया था। अत: ऐसा a हो ही नहीं सकता।

चूँकि 360° सदैव सममिति कोण होता है, न्यूनतम कोण s को 360 में पूरा-पूरा विभाजित करना ही पड़ेगा। इसीलिए s के पूर्ण संख्या होने पर वह सदैव 360 का गुणनखंड होता है।

प्र2.
सत्य या असत्य: प्रत्येक आकृति का 360° एक सममिति का कोण होगा।
उत्तर

सत्य।

क्यों: 360° का घूर्णन एक पूरा चक्कर है। यह आकृति के हर बिंदु को ठीक उसी स्थान पर लौटा देता है जहाँ वह था, अत: आकृति निश्चित रूप से वैसी ही दिखती है। यह हर आकृति के लिए सत्य है, चाहे वह कितनी भी अनियमित हो — बादल या किसी टेढ़ी-मेढ़ी लकीर के लिए भी।
इसीलिए कहा जाता है: किसी आकृति में घूर्णन सममिति तभी मानी जाती है जब उसका कोई सममिति कोण 0° और 360° के बीच हो। केवल 360° होने का अर्थ है क्रम 1 — घूर्णन सममिति नहीं।
प्र3.
सत्य या असत्य: यदि एक आकृति की सममिति का न्यूनतम कोण एक प्राकृत संख्या है, तो वह 360° का एक गुणनखंड होगी।
उत्तर

सत्य।

यदि न्यूनतम सममिति कोण s है, तो 360° इनमें से कोई होगा—
s, 2s, 3s, …  →  360 = n × s (किसी पूर्ण संख्या n के लिए)
अत: s, 360 का गुणनखंड है और n घूर्णन सममिति का क्रम।
क्यों: 360° सदैव सममिति कोण होता है (पिछला प्रश्न देखिए) और हर सममिति कोण न्यूनतम कोण का गुणज होता है। अत: 360, s का गुणज है — “s, 360 का गुणनखंड है” का यही अर्थ है।

इसलिए संभव न्यूनतम कोण केवल 360 के गुणनखंड हैं: 1°, 2°, 3°, 4°, 5°, 6°, 8°, 9°, 10°, 12°, 15°, 18°, 20°, 24°, 30°, 36°, 40°, 45°, 60°, 72°, 90°, 120°, 180° तथा 360°। 7°, 17° या 50° जैसा कोण कभी न्यूनतम सममिति कोण नहीं हो सकता।

प्र4.
वृत्त एक मनमोहक आकृति है। तब क्या होता है, जब आप एक वृत्त को उसके केंद्र के परित घड़ी की दिशा में घुमाते हैं? अब, एक वृत्त की परिसीमा पर एक बिंदु लीजिए और इसे केंद्र से मिलाइए। इसे बढ़ाकर वृत्त का एक व्यास बनाइए। क्या यह व्यास इस वृत्त की परावर्तन सममिति की एक रेखा है?
उत्तर

घुमाने पर: वृत्त किसी भी कोण पर स्वयं के साथ संपाती हो जाता है — 1°, 37°, 90° या 156.5°, कोई फर्क नहीं पड़ता।

वृत्त के लिए प्रत्येक कोण सममिति का कोण है।

अत: वृत्त का कोई न्यूनतम सममिति कोण नहीं होता — आप हमेशा उससे भी छोटा कोण ढूँढ़ सकते हैं। यही सबसे अधिक सममित आकृति है।

मोड़ने पर: हाँ, प्रत्येक व्यास सममिति की रेखा है। कागज के वृत्त को किसी भी व्यास के अनुदिश मोड़िए, दोनों अर्धवृत्त पूरी तरह मेल खाते हैं, क्योंकि परिसीमा का हर बिंदु केंद्र से समान दूरी पर है।

वृत्त की कुछ सममिति रेखाएँ। उसके अनगिनत व्यासों में से हर एक सममिति की रेखा है।
आस-पास देखिए: पहिए, पंखे, फूल, थाली, चूड़ी और तवे का ऊपरी भाग — सभी घुमाने पर स्वयं पर आ जाते हैं। 3 पंखों वाले पंखे का क्रम 3 (120°) है और 36 तीलियों वाले साइकिल के पहिए का क्रम 36 (10°)।
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