प्र1.
आज हम आपके लिए एक अनोखी पहेली लाए हैं। यहाँ एक वाक्य दिया गया है। आपको पता करना है कि इसका क्या अर्थ है— “येला मालथ येला घौलश।” मेरा _______________ (संकेत — क ← ख)
उत्तर
पहेली का उत्तर है —
मेरा भारत मेरा गौरव।
संकेत को कैसे पढ़ें: डिब्बे में लिखा है क ← ख। वर्णमाला में ‘ख’ के ठीक पहले ‘क’ आता है, और तीर ‘ख’ से ‘क’ की ओर है। इसका अर्थ हुआ — हर व्यंजन को वर्णमाला में एक कदम पीछे ले जाइए। मात्राएँ (ए, आ, औ आदि) जैसी हैं, वैसी ही रहने दीजिए।
अब मिलान कीजिए। हिंदी वर्णमाला का यह भाग याद रखिए — … प फ ब भ म · य र ल व श ष स ह
| पहेली का अक्षर | व्यंजन | एक कदम पीछे | बना |
|---|---|---|---|
| ये | य | म | मे |
| ला | ल | र | रा |
| मा | म | भ | भा |
| ल | ल | र | र |
| थ | थ | त | त |
| ये | य | म | मे |
| ला | ल | र | रा |
| घौ | घ | ग | गौ |
| ल | ल | र | र |
| श | श | व | व |
अक्षर जोड़ते ही वाक्य बन जाता है —
येला → मेरा
मालथ → भारत
येला → मेरा
घौलश → गौरव
मेरा भारत मेरा गौरव।
मालथ → भारत
येला → मेरा
घौलश → गौरव
मेरा भारत मेरा गौरव।
इसीलिए पुस्तक में नीचे पहले से ही “मेरा ______” लिखा है — वहाँ लिखिए भारत मेरा गौरव।
पहेली बनाने का तरीका: जिसने यह पहेली बनाई, उसने असली वाक्य के हर व्यंजन को वर्णमाला में एक कदम आगे बढ़ा दिया — म→य, भ→म, र→ल, त→थ, ग→घ, व→श। सुलझाने वाले को उलटा करना है, यानी एक कदम पीछे। इसी तरह की गुप्त लिपि को ‘कूट भाषा’ या ‘सांकेतिक लिपि’ (कोड) कहते हैं।
स्वयं बनाइए: अपने मित्र का नाम इसी नियम से एक कदम आगे बढ़ाकर लिखिए और उसे संकेत ‘क ← ख’ देकर सुलझाने को कहिए। ध्यान रखिए — मात्रा और अनुस्वार नहीं बदलते, केवल व्यंजन बदलते हैं।
पाठ से जोड़िए: इस पहेली का उत्तर पूरे पाठ का सार भी है। मॉरिशस में बसे भारतीय वंश के लोग आज भी यही कहते हैं — ‘मेरा भारत मेरा गौरव’। इसीलिए दिनकर ने लिखा — “यह ऐसी सफलता की बात है, जिस पर सभी भारतीयों को गर्व होना चाहिए।”