प्र1.
(क) “जहाज़ नैरोबी से चार बजे शाम को उड़ा और पाँच घंटों की निरंतर उड़ान के बाद जब वह मॉरिशस पहुँचा, तब वहाँ रात के लगभग दस बज रहे थे।” जहाज़ नैरोबी से शाम 4 बजे उड़ा तो उसे 5 घंटों की उड़ान के बाद रात 9 बजे मॉरिशस पहुँचना चाहिए था। लेकिन वह पहुँचा लगभग दस बजे। क्यों? आप इसका कारण पता करने के लिए अपने शिक्षकों या इंटरनेट की सहायता ले सकते हैं।
उत्तर
जहाज़ ने देर नहीं की — घड़ी बदल गई। नैरोबी (केन्या) और मॉरिशस दो अलग-अलग समय-क्षेत्रों (टाइम ज़ोन) में हैं। मॉरिशस की घड़ी नैरोबी की घड़ी से एक घंटा आगे रहती है। इसलिए जो समय नैरोबी में रात 9 बजे था, वही मॉरिशस में रात 10 बजे था।
नैरोबी में उड़ान भरी — शाम 4:00 (नैरोबी का समय)
उड़ान की अवधि — + 5 घंटे
पहुँचने का समय — रात 9:00 (नैरोबी के समय के हिसाब से)
मॉरिशस की घड़ी नैरोबी से — + 1 घंटा
इसलिए मॉरिशस की घड़ी में समय — रात 10:00
उड़ान की अवधि — + 5 घंटे
पहुँचने का समय — रात 9:00 (नैरोबी के समय के हिसाब से)
मॉरिशस की घड़ी नैरोबी से — + 1 घंटा
इसलिए मॉरिशस की घड़ी में समय — रात 10:00
ऐसा क्यों होता है —
- पृथ्वी अपनी धुरी पर पश्चिम से पूर्व की ओर घूमती है, इसलिए सूरज पहले पूर्व वाली जगह पर निकलता है। जो जगह जितनी पूर्व में होगी, उसकी घड़ी उतनी आगे रहेगी।
- मॉरिशस, नैरोबी से काफ़ी पूर्व में है। पाठ भी बताता है कि मॉरिशस “देशांतर रेखा 60 के बिल्कुल पास” है, जबकि नैरोबी लगभग 37° पूर्व देशांतर पर है।
- देशांतर के हर 15 डिग्री पर समय में एक घंटे का अंतर आ जाता है। दोनों जगहों के बीच लगभग इतना ही अंतर है — इसीलिए एक घंटा आगे।
असली सीख: यात्रा में ‘उड़ान का समय’ और ‘घड़ी का समय’ दो अलग चीज़ें हैं। उड़ान पाँच घंटे की ही थी; बढ़ा हुआ एक घंटा जहाज़ ने नहीं लिया, वह स्थानीय घड़ी का अंतर था। इसी कारण लंबी यात्रा में लोग उतरते ही अपनी घड़ी वहाँ के समय पर मिला लेते हैं।
करके देखिए: भारत का समय (IST) ग्रीनविच से 5 घंटे 30 मिनट आगे है। अपने शिक्षक से पूछिए कि आपके शहर और लंदन के समय में कितना अंतर है — और फिर हिसाब लगाइए कि दिल्ली से लंदन की 9 घंटे की उड़ान सुबह 2 बजे चलकर लंदन की घड़ी में कब पहुँचेगी।