यह आपके अपने अनुभव का प्रश्न है, इसलिए उत्तर हर बच्चे का अलग होगा। पर अच्छे उत्तर में ये चार बातें ज़रूर होनी चाहिए—
- कब और कहाँ — घटना का समय और जगह बताइए, ताकि सुनने वाले के मन में दृश्य बने।
- क्या हुआ — घटना को क्रम से कहिए; बीच में कूदिए मत।
- आपने क्या देखा-सुना — रंग, आवाज़, गंध जैसी छोटी बातें बताइए। दिनकर ने भी यही किया — “एक सिंह ने उठकर जम्हाई ली, दूसरे ने देह को ताना।”
- आपको कैसा लगा और क्यों नहीं भूलेंगे — यही सबसे ज़रूरी हिस्सा है। लेखक ने भी अपनी घबराहट छिपाई नहीं — “मुझे ऐसा महसूस हो रहा था कि मेरा रक्तचाप बढ़ रहा है।”
नमूना उत्तर:
पिछले साल जुलाई में हमारी कक्षा शैक्षिक भ्रमण पर पास के पक्षी अभयारण्य गई थी। सुबह की धुंध में तालाब के किनारे सैकड़ों सारस खड़े थे। हमारे शिक्षक ने धीरे से कहा — “कोई शोर मत करना।” हम सब साँस रोककर खड़े हो गए। तभी एक सारस ने पंख फैलाए और देखते-ही-देखते पूरा झुंड एक साथ उड़ चला। उनके पंखों की आवाज़ ऐसी थी मानो दूर कहीं ज़ोर की बारिश हो रही हो। पानी पर उनकी परछाइयाँ काँपती रहीं। उस दिन मुझे पहली बार लगा कि पक्षी केवल आकाश में उड़ते बिंदु नहीं हैं — उनका अपना संसार है। वह दृश्य मैं जीवन-भर नहीं भूलूँगा/भूलूँगी, क्योंकि उसी दिन से मैंने घर की छत पर पक्षियों के लिए पानी रखना शुरू कर दिया।