तीन स्तर, एक व्यवस्था — पृष्ठ 164 के चित्र 11.1 में पिरामिड के रूप में। पुस्तक इसे “निम्न से उच्च स्तर तक — ग्राम, खंड और जिला” के क्रम में पढ़ती है और ‘त्रिस्तरीय’ प्रणाली कहती है।
| स्तर | संस्था | मुख्य कार्य |
|---|---|---|
| ग्राम | ग्राम पंचायत / ग्राम परिषद, और उसके पीछे ग्राम सभा | गाँव के भीतर का सब कुछ — पानी, गलियाँ, नालियाँ, प्रकाश, विद्यालय भवन, स्वच्छता |
| खंड | पंचायत समिति / खंड पंचायत / मंडल परिषद | समन्वय — “ग्राम पंचायत और जिला परिषद के बीच की कड़ी”; गाँवों की योजनाएँ एकत्रित करना |
| जिला | जिला परिषद / जिला पंचायत | जिला स्तर की योजना और निरीक्षण; योजनाओं को जिला या राज्य स्तर पर प्रस्तुत करना, जिससे धन का आवंटन होता है |
ये तीनों मिलकर “कृषि, आवास, सड़कों का रख-रखाव, जल संसाधनों का प्रबंधन, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण से लेकर सांस्कृतिक गतिविधियों तक” का दायित्व सँभालती हैं। और पृष्ठ 170 का अंतिम अनुच्छेद याद रखिए — गठन में “विविधताएँ हो सकती हैं”, क्योंकि इन संस्थाओं पर राज्यों का अधिकार है।