अच्छे पत्र में पाँच बातें इसी क्रम में होनी चाहिए — समस्या ठीक कहाँ है, उससे क्या हानि हो रही है, आप क्या चाहते हैं, आप और विद्यार्थी क्या सहयोग देंगे, और विनम्र समापन। एक पृष्ठ पर्याप्त है, भाषा औपचारिक रखिए और तिथि अवश्य लिखिए।
नमूना उत्तर:
सेवा में,
श्रीमान/श्रीमती सरपंच महोदय/महोदया,
ग्राम पंचायत लक्ष्मणपुर,
जिला ——————
दिनांक: 12 अगस्त 20——
विषय: गाँव की सड़क के किनारे पड़ी प्लास्टिक थैलियाँ हटवाने तथा आगे कचरा फैलने से रोकने हेतु निवेदन।
माननीय महोदय/महोदया,
मैं गाँव के प्राथमिक विद्यालय की कक्षा 6 का विद्यार्थी हूँ। मैं आपका ध्यान मुख्य सड़क के दोनों ओर पड़ी प्लास्टिक थैलियों और अन्य प्लास्टिक कचरे की ओर दिलाना चाहता हूँ, विशेषकर बस अड्डे, साप्ताहिक हाट और विद्यालय के पास वाली पुलिया के निकट।
इससे गाँव में अनेक समस्याएँ हो रही हैं। थैलियाँ पुलिया के पास की नाली बंद कर देती हैं, जिससे वर्षा के बाद सड़क पर गंदा पानी भर जाता है और मच्छर पनपते हैं। चरते समय गाय-बकरियाँ प्लास्टिक निगल लेती हैं और बीमार पड़ जाती हैं। कुछ लोग ढेर में आग लगा देते हैं, जिसका धुआँ बच्चों के लिए कष्टकारी है। बाहर से आने वालों को गाँव का प्रवेश-मार्ग भी बहुत गंदा दिखता है।
अत: मेरा निवेदन है कि ग्राम पंचायत कृपया निम्नलिखित पर विचार करे —
1. वहाँ पड़े प्लास्टिक को एकत्र कराकर सुरक्षित ढंग से निपटाया जाए।
2. बस अड्डे, हाट और विद्यालय के पास ढक्कनदार कूड़ेदान रखवाए जाएँ और उन्हें नियमित रूप से खाली कराया जाए।
3. हाट के दुकानदारों से कपड़े या काग़ज़ के थैले प्रयोग करने का अनुरोध किया जाए।
4. सड़क किनारे कचरा न फेंकने का सूचना-पट्ट लगवाया जाए।
हमारे विद्यालय के विद्यार्थी सहयोग देने को तैयार हैं। हम किसी शनिवार को स्वच्छता अभियान चला सकते हैं, हाट के लिए पोस्टर बना सकते हैं, और अपने परिवारों को समझा सकते हैं कि प्लास्टिक न फेंकें और न जलाएँ। कृपया इस विषय को अगली ग्राम सभा की बैठक में भी रखा जाए, ऐसा अनुरोध है।
धन्यवाद।
भवदीय,
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कक्षा 6, राजकीय प्राथमिक विद्यालय, लक्ष्मणपुर
पत्र सरपंच को ही क्यों: गाँव के भीतर स्वच्छता और कचरा ग्राम पंचायत का कार्य है, और सरपंच उसका प्रमुख है। पत्र माँग नहीं करता — वह हानि बताता है, व्यावहारिक कदम सुझाता है और सहयोग का प्रस्ताव देता है। इसी से पंचायत कार्रवाई करती है।
संकेत: परीक्षा में प्रारूप अवश्य रखिए — सेवा में, विषय, संबोधन, तीन छोटे अनुच्छेद (समस्या, प्रभाव, निवेदन), सहयोग का प्रस्ताव और औपचारिक समापन। अंक विषय-वस्तु के साथ प्रारूप के भी मिलते हैं।