कक्षा ६ सामाजिक विज्ञान अध्याय 12 आधारभूत लोकतंत्र — भाग 3: नगरीय क्षेत्रों में स्थानीय सरकार के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन 2026-09-19
इस अध्याय के बारे में
अध्याय का मूल विचार — जैसे गाँव को गाँव के लोग चलाएँ, वैसे ही नगर को नगर के लोग चलाएँ। अध्याय 11 में हमने स्थानीय सरकार का ग्रामीण पक्ष देखा था; यह अध्याय नगरीय पक्ष दिखाता है। पुस्तक कहती है कि “ग्रामीण परिवेश की तुलना में नगरीय परिदृश्य सामान्यतः अधिक जटिल और विविध होता है, इसलिए यह समझा जा सकता है कि नगरीय शासन भी अधिक जटिल होगा” — किंतु सिद्धांत वही रहता है। यही सहभागी लोकतंत्र है, जिसमें सुशासन का उद्देश्य “नागरिकों को सशक्त बनाना है, ताकि वे देश के कार्यों में सक्रिय रूप से भाग ले सकें”। पूरी भारतीय शासन-प्रणाली एक पिरामिड में — पृष्ठ 175 का चित्र 12.2। ऊपर से — राष्ट्रीय स्तर पर संघ सरकार → राज्य सरकार → स्वशासन के लिए स्थानीय सरकार । इसके बाद पिरामिड दो शाखाओं में बँट जाता है — बाईं ओर ग्रामीण — पंचायती राज संस्थाएँ (जिला पंचायत, पंचायत समिति, ग्राम पंचायत, ग्राम सभा) और दाईं ओर नग
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| शब्द | अर्थ | अध्याय में कहाँ | याद रखने योग्य |
|---|---|---|---|
| नगरीय स्थानीय निकाय | “नगरीय क्षेत्रों में स्थानीय सरकार की संरचनाएँ” | पृष्ठ 175 | पंचायत का नगरीय जुड़वाँ — चित्र 12.2 की दाईं शाखा |
| विकेंद्रित | “ये शीर्ष प्राधिकरण के अंतर्गत कार्य नहीं करते… स्थानीय समुदायों को स्वायत्तता रहती है” | पृष्ठ 175 | निर्णय ऊपर नहीं, नीचे जनता के पास आते हैं |
| सहभागी लोकतंत्र | वह शासन जिसका उद्देश्य नागरिकों को सशक्त बनाना है “ताकि वे देश के कार्यों में सक्रिय रूप से भाग ले सकें” | पृष्ठ 174 | इसमें नागरिकों के केवल अधिकार नहीं, कर्तव्य भी हैं |
| वार्ड | वे “छोटी-छोटी इकाइयाँ” जिनमें “नगरों एवं कस्बों को विभाजित किया जाता है” | पृष्ठ 176 | नगर सरकार की सबसे छोटी इकाई — आप अपने ही वार्ड के पार्षद को चुनते हैं |
| वार्ड समिति | चित्र 12.2 में वार्ड स्तर का निकाय, जो स्वास्थ्य शिविर, अभियान और समस्याओं की सूचना देने में सहायता करता है | पृष्ठ 175–176 | “वार्डों की निश्चित कार्यप्रणाली अलग-अलग राज्यों में भिन्न-भिन्न है” |
| नगर निगम | 10 लाख से अधिक जनसंख्या वाले नगरों का सर्वोच्च निकाय, “जिन्हें ‘महानगर निगम’ भी कहा जाता है” | पृष्ठ 179; चित्र 12.1, 12.3, 12.4 | मुंबई, चेन्नई और इंदौर — तीनों में नगर निगम |
| नगरपालिका | “1 से 10 लाख के बीच जनसंख्या वाले नगरों” का सर्वोच्च निकाय, “जिन्हें म्यूनिसिपल कांउसिल भी कहा जाता है” | पृष्ठ 179; चित्र 12.2 में ‘नगर परिषद’ | इसका प्रमुख महापौर नहीं, अध्यक्ष होता है |
| नगर पंचायत | “1 लाख से कम जनसंख्या वाले नगरों और कस्बों” का निकाय | पृष्ठ 179; चित्र 12.2 | इसे ग्राम पंचायत न समझें — नगर पंचायत एक नगरीय निकाय है |
| महापौर (मेयर) | नगर निगम का निर्वाचित प्रमुख, जिसे निर्वाचित पार्षद अपने में से चुनते हैं | अध्याय में नाम नहीं — सामान्य ज्ञान | निर्वाचित। कार्यालय चलाने वाला नगर आयुक्त नियुक्त होता है |
| नगर आयुक्त | नगर निगम का मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिसे राज्य सरकार नियुक्त करती है | अध्याय में नाम नहीं — सामान्य ज्ञान | नियुक्त, निर्वाचित नहीं — अध्याय 11 के पंचायत सचिव की तरह |
| संपत्ति कर एवं जल शुल्क | वह धन जो निकाय स्वयं जुटाता है — चित्र 12.4 में “संपत्ति कर” और “जल शुल्क” देखिए | पृष्ठ 178 | निकाय “स्थानीय कर एवं अर्थदंड प्राप्त करना” करते हैं (पृष्ठ 176) |
| स्वच्छ सर्वेक्षण | वह सरकारी योजना जिसके अंतर्गत इंदौर को “पिछले सात वर्षों से लगातार” भारत के सर्वाधिक स्वच्छ नगर का पुरस्कार मिला | पृष्ठ 179 | पुरस्कार नगर को मिला, पर काम नागरिकों ने किया |
| मद्रास कॉरपोरेशन | 29 सितंबर 1688 में स्थापित, “भारत में सबसे प्राचीन नगर निगम संस्था” | पृष्ठ 177, चित्र 12.3 | अब ग्रेटर चेन्नई कॉरपोरेशन |
अभ्यास
- महत्वपूर्ण प्रश्न
- आइए पता लगाएँ
- आइए पता लगाएँ
- आइए पता लगाएँ
- आइए विचार करें
- आइए पता लगाएँ
- पाठ्य प्रश्न
- आगे बढ़ने से पहले...
- प्रश्न, क्रियाकलाप और परियोजनाएँ