प्र1.
एक गाँव या कस्बे की तुलना में कोलकाता, चेन्नई या मुंबई जैसे नगर क्यों अधिक जटिल और विविध हैं?
उत्तर
क्योंकि एक बड़े नगर में उसी स्थान पर कहीं अधिक लोग, कहीं अधिक प्रकार के लोग और कहीं अधिक प्रकार के काम एक साथ रहते हैं — और इनमें से हर भिन्नता स्थानीय सरकार के लिए एक नया काम जोड़ देती है।
| किस बात में अंतर | गाँव या छोटा कस्बा | कोलकाता, चेन्नई या मुंबई |
|---|---|---|
| आकार | कुछ सौ से कुछ हज़ार लोग; प्रायः एक ही बस्ती | कई लाख, यहाँ तक कि करोड़ों लोग, सैकड़ों वार्डों में फैले हुए |
| लोग कहाँ से आए | अधिकांश परिवार पीढ़ियों से वहीं रहते हैं | काम, पढ़ाई और इलाज के लिए हर जिले और राज्य से लोग आते हैं — भाषा, भोजन, त्योहार और पहनावा सब मिल जाते हैं |
| काम-धंधे | मुख्यतः खेती तथा कुछ शिल्प, व्यापार और सेवाएँ | बंदरगाह, कारखाने, कार्यालय, अस्पताल, महाविद्यालय, मंडियाँ, परिवहन, फ़िल्म और सॉफ़्टवेयर — सैकड़ों व्यवसाय साथ-साथ |
| आवश्यक सेवाएँ | पेयजल, एक सड़क, एक विद्यालय, एक स्वास्थ्य केंद्र | पाइप जलापूर्ति और मल-निकास, बसें और रेल, यातायात संकेत, प्रतिदिन हज़ारों टन कूड़ा, अग्निशमन सेवा, अस्पताल, बाढ़ से बचाव के लिए जल-निकासी |
| एक-दूसरे को जानना | “प्रत्येक व्यक्ति एक-दूसरे को जानता है और सहायता के लिए तत्पर रहता है” (समीर, पृष्ठ 180) | “लोग अधिक आत्मनिर्भर होते हैं। वे प्रायः अपने पड़ोसियों के बारे में भी नहीं जानते।” (अनीता, पृष्ठ 180) |
| निर्णय कैसे होते हैं | सभी वयस्क मतदाताओं की ग्राम सभा एक स्थान पर बैठ सकती है | सबका एकत्र होना असंभव — इसलिए वार्ड, वार्ड समितियाँ और निर्वाचित पार्षद आवश्यक हैं |
इसीलिए पृष्ठ 174 कहता है कि “चूँकि ग्रामीण परिवेश की तुलना में नगरीय परिदृश्य सामान्यतः अधिक जटिल और विविध होता है, इसलिए यह समझा जा सकता है कि नगरीय शासन भी अधिक जटिल होगा।”
यह कीजिए: अपने निकटतम नगर के किसी व्यस्त चौराहे पर दस मिनट खड़े होकर गिनिए कि कितने प्रकार की दुकानें, वाहन, वर्दियाँ और भाषाएँ आपको दिखीं। फिर किसी शांत, छोटे स्थान पर यही कीजिए। दोनों सूचियों का अंतर ही इस प्रश्न का उत्तर है।