ऊपर दिए गए चित्र 12.2 में आप पंचायती राज व्यवस्था और शहरी स्थानीय सरकार के बीच क्या समानताएँ एवं विभिन्नताएँ पाते हैं?
उत्तर
पहले चित्र को ध्यान से पढ़िए। पृष्ठ 175 का चित्र 12.2 एक पिरामिड है। ऊपर के तीन खंड पूरे देश के लिए साझे हैं — राष्ट्रीय स्तर पर संघ सरकार, फिर राज्य सरकार, फिर स्वशासन के लिए स्थानीय सरकार। इसके नीचे पिरामिड दो शाखाओं में बँटता है — बाईं ओर ग्रामीण — पंचायती राज संस्थाएँ और दाईं ओर नगरीय — नगरीय स्थानीय निकाय। नीचे लिखा है — “मानचित्र पैमाने पर आधारित नहीं है।”
चित्र 12.2 को दो सीढ़ियों के रूप में पुनः बनाया गया। ऊपर के तीन खंड साझे हैं; उनके नीचे ग्रामीण शाखा में नगरीय शाखा से एक स्तर अधिक है।
समानताएँ
दोनों ‘स्थानीय सरकार’ हैं। दोनों पिरामिड के एक ही खंड से निकलते हैं और दोनों राज्य सरकार के नीचे हैं — अर्थात दोनों राज्य के बनाए कानूनों के अंतर्गत कार्य करते हैं।
दोनों जनता पर टिके हैं। ग्रामीण सीढ़ी ग्राम सभा पर समाप्त होती है, नगरीय सीढ़ी वार्ड के लोगों पर। दोनों में पिरामिड का आधार स्थानीय स्तर है, “जो जनता के निकट है”।
दोनों निर्वाचित प्रतिनिधियों के माध्यम से चलते हैं। गाँव वाले ग्राम पंचायत चुनते हैं, नगरवासी वार्ड पार्षद।
दोनों विकेंद्रित हैं और दोनों स्वशासन के लिए हैं। दोनों स्थानीय सेवाएँ सँभालते हैं, दोनों कुछ स्थानीय कर लेते हैं, और दोनों में नागरिकों के अधिकार भी हैं और कर्तव्य भी।
दोनों में जनता के ठीक ऊपर एक छोटी समिति है — एक ओर ग्राम पंचायत, दूसरी ओर वार्ड समिति।
विभिन्नताएँ
ग्रामीण — पंचायती राज संस्थाएँ
नगरीय — नगरीय स्थानीय निकाय
चित्र 12.2 में स्तर
चार — जिला पंचायत, पंचायत समिति, ग्राम पंचायत, ग्राम सभा
तीन — नगर निगम या नगर परिषद (नगर पंचायत), वार्ड समिति, वार्ड के लोग
शीर्ष निकाय
सदैव जिला पंचायत, पूरे जिले के लिए
जनसंख्या पर निर्भर — नगर निगम, नगरपालिका या नगर पंचायत, एक ही नगर या कस्बे के लिए
सबसे छोटी इकाई
गाँव, जिसकी ग्राम सभा में सभी वयस्क मतदाता
वार्ड, अर्थात नगर का एक भाग, जिसकी वार्ड समिति
प्रत्यक्ष भागीदारी
अधिक — ग्राम सभा स्वयं सभी मतदाताओं की बैठक है
कम — नगर अपने सब लोगों को एकत्र नहीं कर सकता, इसलिए लगभग सब कुछ निर्वाचित पार्षदों के माध्यम से
बीच का स्तर
है — पंचायत समिति गाँव और जिले को जोड़ती है
चित्र में नहीं है; वार्ड सीधे नगर निकाय से जुड़ता है
कार्य का स्वरूप
कृषि, गाँव की सड़कें, पेयजल, गाँव का विद्यालय और स्वास्थ्य केंद्र
पाइप जलापूर्ति एवं मल-निकास, नगर का ठोस अपशिष्ट, प्रकाश व्यवस्था, लाइसेंस, अग्निशमन, विज्ञापन-पट्ट, भवन निर्माण की अनुमति
नगरीय पक्ष में एक स्तर कम क्यों है: ग्रामीण पक्ष को कुछ सौ लोगों के गाँव से पूरे जिले तक चढ़ना पड़ता है, इसलिए बीच में एक सीढ़ी चाहिए। नगर तो पहले से ही एक ही निकाय के अधीन एक जुड़ी हुई बस्ती है — वार्ड से नगर सरकार तक एक ही कदम में पहुँचा जा सकता है। ‘पंचायत’ शब्द दोनों ओर आता है, किंतु नगर पंचायत नगरीय है और ग्राम पंचायत ग्रामीण।
चित्र को ठीक-ठीक पढ़िए: पृष्ठ 175 का नगरीय खाना कहता है — “नगर निगम या नगर परिषद (नगर पंचायत)”। यह एक खाना है जिसमें तीन विकल्प हैं, तीन अलग-अलग स्तर नहीं। किसी एक नगर में इनमें से केवल एक ही होता है।
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