अन्वेषण अध्याय 12 महत्वपूर्ण प्रश्न

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
नगरीय स्थानीय निकाय क्या है और इनके कार्य क्या हैं?
उत्तर

नगरीय स्थानीय निकाय हमारे नगरों और कस्बों की निर्वाचित सरकारें हैं — वही जो गाँवों में पंचायतें हैं। पुस्तक की अपनी परिभाषा पृष्ठ 175 पर है —

“नगरीय क्षेत्रों में स्थानीय सरकार की संरचनाओं को ‘नगरीय स्थानीय निकाय’ कहा जाता है।
इसका अर्थ है कि ये शीर्ष प्राधिकरण के अंतर्गत कार्य नहीं करते हैं। इन स्थानीय समुदायों को
अपने क्षेत्रों के प्रबंधन या अपने सामने उपस्थित मुद्दों या समस्याओं का हल
ढूँढ़ने की स्वायत्तता रहती है।”

अगला वाक्य बताता है कि ये किसलिए हैं — “यह एक क्षेत्र में रह रहे नागरिकों के साथ आने और उनके लिए सर्वोत्तम क्या है, इस पर निर्णय लेने का एक तंत्र है।”

ये तीन प्रकार के होते हैं, और कौन-सा निकाय मिलेगा यह जनसंख्या तय करती है (पृष्ठ 179)।

नगरीय स्थानीय निकायअन्य नामजनसंख्याकिस प्रकार का स्थाननिर्वाचित निकाय का प्रमुख
नगर निगम‘महानगर निगम’10 लाख से अधिकबड़ा नगर — मुंबई, चेन्नई, इंदौरमहापौर (मेयर) और उप-महापौर
नगरपालिकाम्यूनिसिपल कांउसिल; चित्र 12.2 में ‘नगर परिषद’1 से 10 लाख के बीचछोटा नगर या बड़ा कस्बाअध्यक्ष
नगर पंचायतकुछ राज्यों में नगर पालिका परिषद1 लाख से कमकस्बा, या ग्रामीण से नगरीय बनता हुआ क्षेत्रअध्यक्ष
सावधान: नगर पंचायत एक नगरीय निकाय है, ग्रामीण नहीं। नाम में ‘पंचायत’ अवश्य है, किंतु चित्र 12.2 में यह दाईं शाखा में नगर निगम और नगरपालिका के साथ है — बाईं ओर ग्राम पंचायत के साथ नहीं।

नगरीय निकाय की बनावट। सबसे पहले नगर को वार्डों में बाँटा जाता है — “नगरों एवं कस्बों को छोटी-छोटी इकाइयों में विभाजित किया जाता है, जिन्हें ‘वार्ड’ कहते हैं” (पृष्ठ 176)। प्रत्येक वार्ड के मतदाता अपना एक प्रतिनिधि, अर्थात वार्ड पार्षद चुनते हैं। सभी पार्षद मिलकर परिषद बनाते हैं और अपने में से महापौर या अध्यक्ष चुनते हैं। इस निर्वाचित पक्ष के साथ-साथ एक नियुक्त पक्ष भी होता है, जिसका प्रमुख नगर आयुक्त होता है — उसे राज्य सरकार नियुक्त करती है और वही कार्यालय, कर्मचारी तथा मशीनें चलाता है।

नगरीय स्थानीय निकाय की बनावट निर्वाचित पक्ष — जनता चुनती है नियुक्त पक्ष — राज्य सरकार नियुक्त करती है वार्ड के लोग वार्ड में रहने वाला हर वयस्क मतदाता चुनते हैं वार्ड पार्षद हर वार्ड से एक; वार्ड समिति सहायता करती है मिलकर बनाते हैं निकाय की परिषद सभी निर्वाचित पार्षद एक साथ अपने में से चुनते हैं महापौर / अध्यक्ष राज्य सरकार निकाय का कानून बनाती है नियुक्त करती है नगर आयुक्त नगरपालिका में मुख्य नगरपालिका अधिकारी निकाय के कर्मचारी अभियंता, स्वास्थ्य अधिकारी, सफाई कर्मी, अग्निशमन कर्मी, कर एवं अभिलेख लिपिक निर्णय क्रियान्वयन
नगर सरकार के दो पक्ष। जनता पार्षदों को चुनती है और पार्षद निर्णय लेते हैं; राज्य आयुक्त को नियुक्त करता है और आयुक्त के कर्मचारी उन निर्णयों को पूरा करते हैं।

इनके कार्य क्या हैं? पृष्ठ 176 पर सूची दी गई है — “नगरीय एवं स्थानीय निकायों पर कार्यों की एक लंबी सूची की जिम्मेदारी है, जैसे – आधारभूत ढाँचे की देखभाल पर ध्यान रखना, कब्रगाहों का रख-रखाव, अपशिष्ट संग्रहण एवं निपटान, सरकारी योजनाओं के कार्यान्वयन पर ध्यान रखना, स्थानीय कर एवं अर्थदंड प्राप्त करना आदि। क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास के नियोजन में भी इनकी कुछ भूमिका होती है।”

पृष्ठ 178 का चित्र 12.4 इसी सूची को चित्रों में बदल देता है। इंदौर नगर निगम वास्तव में क्या-क्या करता है, ठीक वैसे ही जैसे चित्र में दिखाया गया है —

चित्र 12.4 का समूहदिखाई गई सेवाएँयह किस प्रकार का कार्य है
धन जो निगम लेता हैसंपत्ति कर · जल शुल्क · व्यवसाय, विज्ञापन, व्यापार लाइसेंस“स्थानीय कर एवं अर्थदंड प्राप्त करना” — इसी धन से शेष सब कुछ होता है
स्वच्छतासूखा कूड़ा प्रबंधन · पेड़ की कटाई और ढुलाई“अपशिष्ट संग्रहण एवं निपटान”, तथा नगर की हरियाली की देखभाल
अभिलेख और अनुमतियाँसी.आर.एम. — विवाह प्रमाणपत्र · सी.आर.एम. — विभिन्न लाइसेंसपंजीकरण और अनुमति — निकाय नगर का अभिलेख-रक्षक है
सुरक्षा और आपात स्थितिसी.आर.एम. — अग्निशमन सेवाएँ · सी.आर.एम. — जल टैंकर, मलबा हटानादुर्घटना के समय जीवन और संपत्ति की रक्षा
नागरिकों की सुनवाईसी.आर.एम. — शिकायतेंशिकायत की खिड़की, जहाँ नागरिक समस्या दर्ज कर उसकी प्रगति देख सके
अनुरोध पर सेवाएँजल टैंकर · सेप्टिक टैंकर · सभागार · अंत्येष्टि क्रिया संबंधी वाहन · चल शौचालय · एंबुलेंसवे सेवाएँ जो परिवार या मोहल्ला आवश्यकता पड़ने पर माँग सकता है
सी.आर.एम. का अर्थ: चित्र की अपनी टिप्पणी कहती है — सी.आर.एम. — सिटिजन रिलेशनशिप मैनेजमेंट या नागरिक संबंध प्रबंधन, अर्थात वह व्यवस्था जिसके द्वारा नागरिक सेवा माँगता है या शिकायत दर्ज करता है और फिर उसकी प्रगति देख सकता है। चित्र यह भी कहता है कि “इंदौर नगर निगम द्वारा दी जाने वाली सेवाओं की सूची यहाँ संक्षेप में दी गई है।”
वार्ड इतना महत्वपूर्ण क्यों है: 20 लाख की आबादी वाला नगर ग्राम सभा की तरह एक स्थान पर एकत्र नहीं हो सकता। इसलिए नगर को इतने छोटे वार्डों में बाँटा जाता है कि पार्षद उन्हें जान सके, और वार्ड समिति छोटी-छोटी तात्कालिक बातें सँभाले — “स्वास्थ्य शिविरों के आयोजन, एकल उपयोग वाले प्लास्टिक के विरुद्ध अभियान” तथा “जल रिसाव, नाली का जाम होना, किसी सड़क का टूट जाना”। वार्ड ही वह स्थान है जहाँ एक साधारण नगरवासी अपनी सरकार को छू पाता है।
क्या आप जानते हैं? नगरीय स्थानीय निकायों को उनका वर्तमान संवैधानिक आधार 74वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 से मिला, जो 1 जून 1993 से लागू हुआ — यह अध्याय 11 में पढ़े गए 73वें संशोधन का जुड़वाँ है। इसने संविधान में भाग 9-क ‘नगरपालिकाएँ’ जोड़ा, और इसीलिए अध्याय ठीक तीन प्रकार के निकाय गिनाता है — संक्रमणशील क्षेत्र के लिए नगर पंचायत, छोटे नगरीय क्षेत्र के लिए नगरपालिका और बड़े नगरीय क्षेत्र के लिए नगर निगम। इसी संशोधन ने प्रत्येक नगरपालिका का पाँच वर्ष का कार्यकाल निश्चित किया, चुनाव कराने का दायित्व राज्य निर्वाचन आयोग को दिया, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के लिए तथा महिलाओं के लिए कम से कम एक-तिहाई स्थान आरक्षित किए, बड़ी नगरपालिकाओं में वार्ड समितियों की व्यवस्था की, और बारहवीं अनुसूची में 18 विषय गिनाए जो राज्य अपने नगरीय निकायों को सौंप सकते हैं। जनसंख्या के ठीक-ठीक आँकड़े प्रत्येक राज्य स्वयं तय करता है, इसलिए अध्याय में दिए 1 लाख और 10 लाख के आँकड़े सामान्य नियम हैं।
प्र2.
ये सरकार और लोकतंत्र में क्यों महत्वपूर्ण हैं?
उत्तर

क्योंकि नगर की रोज़ की समस्याएँ स्थानीय होती हैं, और समय पर केवल स्थानीय सरकार तक ही पहुँचा जा सकता है। जाम नाली, भरा हुआ कूड़ेदान, बुझी हुई स्ट्रीट लाइट, रिसता जल-पाइप — इनके लिए कोई राज्य की राजधानी को पत्र लिखकर प्रतीक्षा नहीं कर सकता। पृष्ठ 175 का उत्तर यही है कि नगरीय स्थानीय निकाय “एक क्षेत्र में रह रहे नागरिकों के साथ आने और उनके लिए सर्वोत्तम क्या है, इस पर निर्णय लेने का एक तंत्र है”।

पाँच कारण, और हर एक का आधार स्वयं अध्याय में है —

  • ये निर्णयों को जनता तक नीचे लाते हैं। ‘विकेंद्रित’ होने का अर्थ है कि “ये शीर्ष प्राधिकरण के अंतर्गत कार्य नहीं करते हैं” और स्थानीय समुदायों को अपने क्षेत्र के प्रबंधन की स्वायत्तता रहती है। यही स्वशासन है, दूर से चलाया गया प्रशासन नहीं।
  • ये निर्वाचित हैं, इसलिए हमारे प्रति उत्तरदायी हैं। पृष्ठ 181 — “जैसे कि ग्रामीण संदर्भ में होता है, नगरीय स्थानीय निकायों में भी स्थानीय नागरिकों का प्रतिनिधित्व करने वाले सदस्य निर्वाचित होते हैं।” पृष्ठ 180 पर अनीता यही अपने शब्दों में कहती है — “हमारे यहाँ स्थानीय निकाय और निर्वाचित प्रतिनिधि हैं, जो हमारा और हमारे हितों का प्रतिनिधित्व करते हैं।”
  • ये वे सेवाएँ देते हैं जिनके बिना नगर चल ही नहीं सकता। जल, कूड़ा, सड़क, प्रकाश, लाइसेंस, अग्निशमन, अभिलेख — अर्थात पूरा चित्र 12.4।
  • ये उस स्थान पर भागीदारी संभव बनाते हैं जहाँ सब अजनबी हैं। अनीता स्वीकार करती है कि नगर में “लोग अधिक आत्मनिर्भर होते हैं। वे प्रायः अपने पड़ोसियों के बारे में भी नहीं जानते।” वार्ड और वार्ड समिति इतनी छोटी इकाई बनाते हैं कि नागरिक उसमें भाग ले सके।
  • ये नागरिकों को लोकतंत्र सिखाते हैं। पृष्ठ 181 पर समीर की कहानी — बच्चों ने नीचे लटका बिजली का तार देखा, सूचना दी और खंभा हटवा दिया — ठीक वही अध्याय नगर में भी कराना चाहता है। अनीता का निष्कर्ष ही अध्याय का निष्कर्ष है — “लोकतंत्र को इसी तरह कार्य करना चाहिए। यह शहर में अधिक जटिल प्रतीत होता है, लेकिन मूल विचार वही है कि प्रत्येक व्यक्ति का मत महत्व रखता है।”
यहाँ लोकतंत्र के दो पहलू क्यों हैं: अध्याय सावधानी से कहता है कि नागरिकों के पास मत ही नहीं, कर्तव्य भी हैं — “इन निकायों को अपने कार्यों को कुशलतापूर्वक करने में सक्षम होने के लिए, नागरिकों को भी अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए… याद रहे कि यह एक सहभागी लोकतंत्र है।” यदि कोई कूड़ा नहीं छाँटेगा तो कोई निगम नगर स्वच्छ नहीं रख सकता; यदि कोई रिसाव की सूचना नहीं देगा तो बहुमूल्य जल बहता ही रहेगा। नगरीय निकाय और नागरिक एक ही काम के दो हाथ हैं।
परीक्षा के लिए सुझाव: यदि प्रश्न पूछे कि नगरीय स्थानीय निकाय क्यों महत्वपूर्ण हैं, तो केवल सेवाएँ मत गिनाइए। पहले लोकतांत्रिक कारण दीजिए — ये निर्वाचित हैं, जनता के निकट हैं और उसके प्रति उत्तरदायी हैं — उसके बाद व्यावहारिक कारण, कि ये रोज़ काम आने वाली सेवाएँ देते हैं।
क्या यह उपयोगी रहा? त्रुटि बताएँ