अन्वेषण अध्याय 12 आइए पता लगाएँ

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
अपने और पड़ोसी राज्यों के कुछ नगरों का चयन कीजिए। इनमें वह नगर लिए जा सकते हैं जिसमें आप रहते हैं या जो आपके कस्बे या गाँव के निकट हैं। आप कैसे पता करेंगे कि इनमें कहाँ-कहाँ नगर पंचायत, नगरपालिका अथवा नगर निगम हैं? उन नगरों के नाम और उनके नगरीय निकाय के प्रकार की एक सूची तैयार कीजिए।
उत्तर

पहले नियम याद कीजिए, फिर जाकर जाँचिए। नियम पृष्ठ 179 पर दिया है और वह केवल जनसंख्या पर आधारित है।

नगर या कस्बे की जनसंख्यासर्वोच्च नगरीय निकायअन्य नाम
10 लाख से अधिकनगर निगम‘महानगर निगम’
1 से 10 लाख के बीचनगरपालिकाम्यूनिसिपल कांउसिल / नगर परिषद
1 लाख से कमनगर पंचायतकुछ राज्यों में टाउन पंचायत

आप कैसे पता करेंगे? पाँच सच्चे तरीके, सबसे अच्छा पहले —

  1. कार्यालय के नाम-पट्ट को देखिए। हर निकाय के भवन पर बोर्ड होता है — “___ नगर निगम”, “___ नगर पालिका परिषद”, “___ नगर पंचायत”। यही नाम जल के बिल, संपत्ति कर की रसीद तथा वहाँ जारी जन्म या विवाह प्रमाणपत्र पर भी छपा होता है।
  2. कूड़ेदान, जल टैंकर और बिजली के खंभों को देखिए। उन पर प्रायः निकाय का नाम और चिह्न लिखा रहता है।
  3. वार्ड कार्यालय में पूछिए, या अपने वार्ड पार्षद से, या किसी ऐसे बड़े से जो वहाँ संपत्ति कर चुकाता है।
  4. आधिकारिक वेबसाइट देखिए — नगर की, तथा अपने राज्य के नगरीय विकास / स्थानीय स्वशासन विभाग की। अधिकांश राज्य अपने सभी निगमों, नगरपालिकाओं और नगर पंचायतों की पूरी सूची प्रकाशित करते हैं।
  5. जनसंख्या से मिलान कीजिए, उसे उत्तर मत मानिए। नगर की जनसंख्या देखिए और जाँचिए कि जो निकाय आपको मिला वह ऊपर के नियम से मेल खाता है या नहीं।

नमूना सारणी — ऐसी सारणी बनाकर अपने नगरों के नाम भरिए। अंतिम स्तंभ ही सोचने पर विवश करता है।

नगर या कस्बाराज्यनगरीय निकाय का प्रकारकैसे पता चला
जिस नगर में मैं रहता/रहती हूँ या जो सबसे निकट हैमेरा राज्यनिकाय कार्यालय का नाम-पट्ट
मेरे राज्य की राजधानीमेरा राज्यनगर निगम (लगभग हर राज्य में)घर पर देखी गई संपत्ति कर की रसीद
मेरे जिले का बड़ा कस्बामेरा राज्यराज्य विभाग की वेबसाइट
जिले की सीमा के पास का छोटा कस्बामेरा राज्यवार्ड कार्यालय में पूछकर
पड़ोसी राज्य का एक नगरपड़ोसी राज्यउस नगर की आधिकारिक वेबसाइट
पड़ोसी राज्य का कोई पर्वतीय या नया कस्बापड़ोसी राज्यउसके जल टैंकर पर लिखा नाम
दो बातें आपको संभवतः मिलेंगी, और दोनों ठीक हैं:
1. कुछ कस्बों की जनसंख्या सीमा पार कर चुकी है, फिर भी वहाँ पुराना, छोटा निकाय ही है — क्योंकि परिवर्तन की अधिसूचना राज्य सरकार को जारी करनी पड़ती है और उसमें समय लगता है।
2. ठीक-ठीक जनसंख्या के आँकड़े राज्य-दर-राज्य भिन्न हैं। संविधान प्रत्येक राज्य को यह तय करने देता है, जिसमें जनसंख्या, घनत्व, राजस्व और गैर-कृषि रोज़गार देखे जाते हैं। इसलिए 1 लाख और 10 लाख को अध्याय का दिया सामान्य नियम मानिए और अपवाद के लिए तैयार रहिए।
प्रकार जानना क्यों आवश्यक है: नगर निगम में अधिक वार्ड, बड़ा बजट, अधिक शक्तियाँ और अपना नगर आयुक्त होता है। नगर पंचायत बहुत छोटे कर्मचारी-दल के साथ एक छोटा कस्बा चलाती है। इसलिए किसी स्थान का निकाय जानने से यह भी पता चल जाता है कि वह अपने बल पर कितना कर सकता है — और शिकायत लेकर किसके पास जाना है।
प्र2.
नगरीय स्थानीय निकाय अपनी गतिविधियों के लिए संसाधन कैसे जुटाते हैं? (संकेत — पृष्ठ 178 के चित्र 12.4 में इंदौर नगर निगम द्वारा किए जाने वाले कार्यों के चित्रों को ध्यानपूर्वक देखिए।) क्या इनमें कुछ सेवाएँ भुगतान आधारित हैं?
उत्तर

वहीं से आरंभ कीजिए जहाँ संकेत ले जाता है। पृष्ठ 178 के चित्र 12.4 की पहली ही पंक्ति देखिए — संपत्ति कर, जल शुल्क और व्यवसाय, विज्ञापन, व्यापार लाइसेंस। ये तीनों खाने निगम द्वारा दी जाने वाली सेवाएँ नहीं, बल्कि निगम को प्राप्त होने वाला धन हैं। पृष्ठ 176 यही शब्दों में कहता है — नगरीय निकायों की जिम्मेदारी है “स्थानीय कर एवं अर्थदंड प्राप्त करना”।

धन कहाँ से आता है — चार धाराएँ:

धाराउदाहरणचित्र 12.4 में दिखता है?
1. अपने करघरों, दुकानों और भूमि पर संपत्ति कर — प्रायः सबसे बड़ा स्रोत; विज्ञापन एवं होर्डिंग पर कर; कुछ राज्यों में वाहन या मनोरंजन करहाँ — “संपत्ति कर” तथा “व्यवसाय, विज्ञापन, व्यापार लाइसेंस”
2. उपयोग-शुल्क एवं फीसजल शुल्क; मल-निकास एवं कूड़ा उपयोग-शुल्क; व्यापार एवं दुकान लाइसेंस शुल्क; भवन अनुमति शुल्क; मंडी एवं पार्किंग शुल्क; विवाह या जन्म प्रमाणपत्र का शुल्क; निकाय की दुकानों, सभागारों और भूमि का किराया; तथा गंदगी फैलाने या अवैध निर्माण पर अर्थदंडहाँ — “जल शुल्क”, लाइसेंस वाले खाने तथा “सी.आर.एम. — सेवा के लिए अनुरोध” की पंक्ति
3. राज्य सरकार से धनअनुदान तथा राज्य के करों में हिस्सा, जो प्रत्येक राज्य द्वारा हर पाँच वर्ष में गठित राज्य वित्त आयोग की सिफ़ारिश पर तय होता हैनहीं — यह सेवाओं के चित्र में नहीं दिखता
4. केंद्र सरकार और योजनाओं से धनकेंद्रीय वित्त आयोग की सिफ़ारिश पर अनुदान; तथा योजनाओं का धन — स्वच्छ भारत मिशन (शहरी), जल एवं मल-निकास के लिए अमृत, आवास के लिए पी.एम.ए.वाई. (शहरी) और स्मार्ट सिटी मिशन। बड़े निगम ऋण भी ले सकते हैं, कभी-कभी नगरपालिका बॉन्ड जारी करकेअप्रत्यक्ष रूप से — पृष्ठ 179 का स्वच्छ सर्वेक्षण इसी धारा का है

क्या इनमें कुछ सेवाएँ भुगतान आधारित हैं? हाँ, बहुत-सी हैं। चित्र 12.4 को इसी दृष्टि से फिर देखिए —

चित्र 12.4 की सेवासामान्यतः शुल्क या निःशुल्क?
जलापूर्तिशुल्क — खाने का नाम ही “जल शुल्क” है
व्यवसाय, विज्ञापन, व्यापार लाइसेंस; विभिन्न लाइसेंसशुल्क — जारी करने और नवीनीकरण, दोनों पर फीस
विवाह प्रमाणपत्र और अन्य अभिलेखशुल्क — प्रायः एक छोटा निश्चित शुल्क
जल टैंकर, सेप्टिक टैंकर, मलबा हटानाशुल्क — निश्चित दर पर अनुरोध करके बुलाए जाते हैं
सभागारशुल्क — आयोजनों के लिए किराए पर
पेड़ की कटाई और ढुलाईशुल्क, और पहले अनुमति भी आवश्यक
कूड़ा संग्रहणप्रायः संपत्ति कर के अतिरिक्त एक छोटा मासिक उपयोग-शुल्क
अग्निशमन सेवाएँ, एंबुलेंस, अंत्येष्टि वाहन, चल शौचालय, शिकायत निवारणसामान्यतः निःशुल्क या बहुत रियायती, क्योंकि ये आपात स्थिति या मूलभूत गरिमा से जुड़े हैं — यद्यपि कुछ नगर इनमें से कुछ पर नाममात्र शुल्क लेते हैं
कुछ पर शुल्क और कुछ पर नहीं — ऐसा क्यों: शुल्क दो काम एक साथ करता है — धन जुटाता है और अपव्यय रोकता है। यदि जल पूर्णतः निःशुल्क हो, तो टपकते नल का घर पर कोई भार नहीं पड़ेगा और मूल्य पूरा नगर चुकाएगा। किंतु अग्निशमन वाहन या एंबुलेंस बुलाने से पहले किसी को हिचकना नहीं चाहिए, इसलिए वे निःशुल्क रखी जाती हैं। अधिकांश निकाय यही रेखा खींचते हैं — आपात सेवाएँ निःशुल्क, सुविधाएँ शुल्क सहित
स्वयं जाँचिए: घर पर संपत्ति कर की रसीद या जल का बिल देखने को माँगिए। उस पर नगरीय निकाय का नाम, अवधि और यह देखिए कि राशि किस आधार पर बनी है। यह आपके अपने परिवार का, अपने नगर को चलाने में योगदान है।
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