प्र1.
आधुनिक भाषा में हम उक्त चार प्रवर्गों को क्या नाम देंगे?
उत्तर
ये लगभग वही प्रशासनिक इकाइयाँ हैं जो भारत में आज भी हैं। पृष्ठ 170 पर उद्धृत कौटिल्य का नियम है —
प्रत्येक 10 गाँवों पर एक संग्रहण · प्रत्येक 100 गाँवों पर करवाटिका
प्रत्येक 400 गाँवों पर द्रोणमुख · प्रत्येक 800 गाँवों पर स्थानीय
प्रत्येक 400 गाँवों पर द्रोणमुख · प्रत्येक 800 गाँवों पर स्थानीय
| कौटिल्य का शब्द | कितने गाँव | ग्रंथ स्वयं क्या कहता है | आज का नाम |
|---|---|---|---|
| संग्रहण | 10 | उप-जिला मुख्यालय | खंड या तहसील मुख्यालय — हमारी पंचायत समिति का स्तर |
| करवाटिका | 100 | जिला मुख्यालय | उपमंडल या छोटे जिले का मुख्यालय — हमारी जिला परिषद का स्तर |
| द्रोणमुख | 400 | (ग्रंथ में अर्थ नहीं दिया) | बड़ा जिला या संभाग मुख्यालय — जिले से ऊपर और राज्य से नीचे |
| स्थानीय | 800 | प्रांतीय मुख्यालय | राज्य या प्रांत की राजधानी |
दोनों सीढ़ियाँ आमने-सामने रखिए, समानता स्पष्ट दिखेगी —
कौटिल्य: गाँव → संग्रहण → करवाटिका → द्रोणमुख → स्थानीय
आज: गाँव → खंड → जिला → संभाग → राज्य
आज: गाँव → खंड → जिला → संभाग → राज्य
ध्यान रखिए: समानता निकट की है, पूर्ण नहीं। कौटिल्य राजा के प्रशासन का वर्णन कर रहे थे, जिसमें अधिकारी ऊपर से नियुक्त होते थे; हमारी पंचायती राज संस्थाएँ जनता द्वारा निर्वाचित हैं। सीढ़ी का ढाँचा पुराना है; उसमें लोकतंत्र नया है।