आप केंद्र स्तर और पंचायत स्तर पर शासन प्रणाली के बीच क्या विभिन्नताएँ और समानताएँ पाते हैं? (संकेत – यदि आवश्यक हो, तो अध्याय 10 देखें)
उत्तर
रचना एक जैसी है; आकार और निकटता पूरी तरह भिन्न।
समानताएँ — वही लोकतांत्रिक व्यवस्था, गाँव के आकार में —
दोनों स्तरों पर प्रतिनिधि जनता द्वारा चुने जाते हैं — लोकसभा के लिए सांसद, ग्राम पंचायत के लिए सदस्य।
निर्णय चर्चा और बहुमत से होते हैं, प्रतिनिधियों की सभा में।
दोनों का एक प्रमुख होता है। मंत्रिपरिषद के प्रधानमंत्री; ग्राम पंचायत के सरपंच या प्रधान।
निर्वाचित सदस्यों की सहायता स्थायी अधिकारी करते हैं। केंद्र के सचिव और विभाग; ग्राम पंचायत के पंचायत सचिव और पटवारी।
दोनों कर लगाते हैं, धन प्राप्त करते हैं, बजट बनाते हैं और सार्वजनिक कार्यों पर व्यय करते हैं।
दोनों को पाँच वर्ष बाद फिर मतदाताओं के सामने जाना पड़ता है, और दोनों में आरक्षित सीटें हैं ताकि सबका प्रतिनिधित्व हो।
विभिन्नताएँ:
बिंदु
केंद्र स्तर
पंचायत स्तर
क्षेत्र
पूरा देश — 1.4 अरब लोग
एक गाँव, खंड या जिला
विषय
रक्षा, विदेश नीति, मुद्रा, रेल, राष्ट्रीय नीतियाँ
पानी, गाँव की सड़कें, स्वच्छता, प्राथमिक विद्यालय, स्थानीय विकास
लोकतंत्र का रूप
पूर्णत: प्रतिनिधि — 1.4 अरब लोग एक साथ नहीं बैठ सकते
दोनों — ग्राम सभा प्रत्यक्ष लोकतंत्र है, पंचायत प्रतिनिधि लोकतंत्र
तीन अंग
विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका, पृथक रखे गए
मुख्यत: कार्यपालिका का काम। पंचायत कानून नहीं बनाती और न्यायालय नहीं चलाती
अधिकार किसका
शक्तियाँ सीधे संविधान से
“उन संस्थाओं पर राज्यों का अधिकार है”, इसलिए गठन और कार्यों में “विविधताएँ हो सकती हैं”
नागरिक से दूरी
अपने सांसद से शायद कभी भेंट न हो
सरपंच से उसी शाम मिल सकते हैं, और ग्राम सभा में स्वयं बोल सकते हैं
धन
अपनी बहुत बड़ी आय स्वयं जुटाता और व्यय करता है
अपनी आय कम; बहुत कुछ राज्य और केंद्र के अनुदानों पर निर्भर
प्रत्येक स्तर पर सदस्य जनता स्वयं चुनती है; कुछ स्थान उन लोगों से भरे जाते हैं जो पहले से कोई अन्य पद रखते हैं, जैसे सरपंच और विधायक।
एक वाक्य में सार: केंद्र और पंचायत एक ही लोकतंत्र के दो अलग-अलग अंतर हैं। केंद्र पर आप किसी को अपनी ओर से बोलने के लिए चुनते हैं; ग्राम सभा में आप स्वयं बोल सकते हैं। इसीलिए इन अध्यायों का नाम आधारभूत लोकतंत्र है।
प्र2.
यदि आपको पंचायत के कुछ सदस्यों से मिलने का अवसर मिलता है, तो आप उनसे क्या प्रश्न पूछेंगे? छोटे समूहों में चर्चा कीजिए और एक प्रश्नावली तैयार कीजिए। कुछ ग्राम पंचायत सदस्यों से भेंट कीजिए या उन्हें अपने विद्यालय में आमंत्रित कीजिए। अपनी प्रश्नावली में से उनसे प्रश्न पूछिए और एक संक्षिप्त रिपोर्ट तैयार कीजिए।
उत्तर
पहले विधि। चार-चार के समूह बनाइए। हर समूह एक विषय ले, ताकि प्रश्न दोहराए न जाएँ — (क) व्यक्ति और चुनाव, (ख) पंचायत का काम, (ग) धन, (घ) समस्याएँ और योजनाएँ। हर विषय पर 5–6 प्रश्न लिखिए, छोटे और खुले प्रश्न रखिए (‘हाँ/नहीं’ वाले कभी नहीं), और तय कीजिए कि कौन पूछेगा, कौन लिखेगा और कौन धन्यवाद देगा। शिक्षक से अनुमति लीजिए, विनम्र आमंत्रण-पत्र लिखिए, और केवल मोबाइल नहीं, एक कॉपी भी साथ रखिए।
तैयार प्रश्नावली, जिसे आप अपने अनुसार बदल सकते हैं:
विषय
पूछे जाने वाले प्रश्न
व्यक्ति और चुनाव
आपने चुनाव लड़ने का निश्चय कैसे किया? हमारी ग्राम पंचायत में कितने सदस्य और कितने वार्ड हैं? क्या आपकी सीट आरक्षित है? आपका कार्यकाल कितने वर्ष का है? आपने मतदाताओं से क्या कहा था?
पंचायत का काम
ग्राम पंचायत की बैठक कितनी बार होती है और ग्राम सभा की कितनी बार? सामान्यत: कितने लोग आते हैं? सदस्यों में मतभेद हो तो निर्णय कैसे होता है? पंचायत सचिव क्या करता है? पिछले पाँच वर्षों के किस काम से आप सबसे अधिक संतुष्ट हैं?
धन
पंचायत का धन कहाँ से आता है? पिछले वर्ष लगभग कितना मिला और सबसे बड़ी राशि किस पर व्यय हुई? हम पंचायत को कौन-से कर या शुल्क देते हैं? ग्रामवासी लेखा-जोखा कहाँ देख सकते हैं?
समस्याएँ और योजनाएँ
आज हमारे गाँव की सबसे बड़ी समस्या क्या है? उसका समाधान किस कारण रुका है? कोई विषय पंचायत समिति या जिला परिषद तक कैसे पहुँचाया जाता है? आगामी वर्ष के लिए क्या योजना है? विद्यार्थी इसमें कैसे सहयोग कर सकते हैं?
रिपोर्ट कैसे लिखें — एक पृष्ठ पर्याप्त है, पाँच भागों में —
शीर्षक और तथ्य: ग्राम पंचायत का नाम, भेंट की तिथि, किससे बात हुई और उनका पद।
हमने यह क्यों किया — दो पंक्तियाँ।
हमने क्या पूछा और क्या जाना — मुख्य उत्तर, विषय के अनुसार, प्रश्न-दर-प्रश्न नहीं।
किस बात पर आश्चर्य हुआ — एक-दो बातें जिनकी अपेक्षा नहीं थी।
हमारे विचार से आगे क्या होना चाहिए, और धन्यवाद की एक पंक्ति।
रिपोर्ट के आरंभ का नमूना: “12 अगस्त को कक्षा 6 के पाँच विद्यार्थियों ने विद्यालय के पुस्तकालय में अपनी ग्राम पंचायत के वार्ड 3 की सदस्य श्रीमती कमला देवी से भेंट की। उन्होंने बताया कि पंचायत में नौ सदस्य हैं और बैठक हर माह होती है, तथा पिछले वर्ष ग्राम सभा दो बार बैठी। पिछले वर्ष सबसे बड़ी राशि पूर्वी टोले की पेयजल पाइपलाइन पर व्यय हुई…” ध्यान दीजिए कि इसमें नाम, संख्याएँ और तिथियाँ हैं। इनके बिना रिपोर्ट केवल राय बनकर रह जाती है।
भेंट के दो नियम: पहला — सुनिए, अतिथि से बहस मत कीजिए, और महत्वपूर्ण बात उन्हीं के शब्दों में लिख लीजिए। दूसरा — बात संस्थाओं और प्रक्रियाओं तक सीमित रखिए: निर्णय कैसे होते हैं, धन कैसे आता-जाता है, कठिनाइयाँ क्या हैं। इसे दलों या व्यक्तियों की चर्चा मत बनने दीजिए।
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