क्या आप अपने माता एवं पिता के परिवार की तीन पीढ़ियों की जानकारी एकत्र कर सकते हैं? अपने माता-पिता, दादा-दादी, नाना-नानी, परदादा-परदादी, परनाना-परनानी की एक वंशावली बनाइए। उनके नामों का पता लगाइए और यह भी कि वह जीवन-यापन के लिए क्या करते थे एवं उनका जन्म कहाँ हुआ था? साथ ही आप उन स्रोतों का भी उल्लेख कीजिए जहाँ से आपने ये सूचनाएँ प्राप्त की हैं।
उत्तर
यह एक शोध-परियोजना है, किसी एक निश्चित उत्तर वाला प्रश्न नहीं। पुस्तक की तालिका में पाँच स्तंभ हैं — संबंध, नाम, व्यवसाय, जन्म-स्थान, सूचना के स्रोत — और अंतिम स्तंभ ही इसे 'पारिवारिक गपशप' से 'इतिहास' बनाता है।
चरण 1 — वंशावली बनाइए। स्वयं को सबसे नीचे रखकर ऊपर की ओर बढ़िए, दोनों पक्ष अलग-अलग रखते हुए —
तीन पीढ़ियों की वंशावली। प्रत्येक बक्सा पृष्ठ 66 की तालिका की एक पंक्ति बन जाता है।
चरण 2 — जानकारी खोजिए, और प्रत्येक तथ्य का स्रोत लिखिए। ये आपके इतिहास के स्रोत हैं —
स्रोत
इससे क्या मिलता है
कितना विश्वसनीय
बड़ों की स्मृतियाँ — माता-पिता, दादा-दादी, बुज़ुर्ग रिश्तेदार
नाम, व्यवसाय, गाँवों के नाम, परिवार के स्थान बदलने की कहानियाँ
समृद्ध, परंतु सटीक नहीं। तिथियाँ खिसक जाती हैं; दो लोग अलग-अलग याद कर सकते हैं।
दस्तावेज़ — आधार, राशन कार्ड, विद्यालय के प्रमाण-पत्र, जन्म एवं विवाह प्रमाण-पत्र, भूमि के काग़ज़, पेंशन बही
सटीक नाम, तिथियाँ एवं स्थान
अत्यंत विश्वसनीय, और तालिका में उद्धृत करने योग्य।
छायाचित्र — जिनके पीछे तिथि या अवसर लिखा हो
चेहरे, वस्त्र, घर, कौन-कौन उपस्थित था
व्यक्ति व स्थान के लिए विश्वसनीय; तिथि प्राय: नहीं होती।
पत्र, डायरियाँ, पुराने बही-खाते, निमंत्रण-पत्र
विवाह, जन्म, यात्राओं की तिथियाँ, भाव, हस्तलेख
बहुत अच्छे, विशेषकर किसी घटना की तिथि तय करने के लिए।
वस्तुएँ — बर्तन, आभूषण, पारिवारिक व्यवसाय के औज़ार, पुराने सिक्के
परिवार का व्यवसाय, उसकी आर्थिक स्थिति
संकेत देती हैं, सटीक नहीं — बड़ों के विवरण के साथ ही उपयोगी।
गाँव/समुदाय के अभिलेख — पंचायत रजिस्टर, मंदिर या गुरुद्वारे के रिकॉर्ड, पंडों द्वारा रखी वंशावलियाँ
कई पीढ़ियों पीछे तक के नाम
जीवित स्मृति से कहीं अधिक पीछे तक पहुँच सकते हैं।
नमूना पंक्ति:संबंध — दादा-दादी। नाम — श्री राम प्रसाद वर्मा एवं श्रीमती कमला देवी। व्यवसाय — वे विद्यालय में शिक्षक थे; वे परिवार के दो बीघा खेत सँभालती थीं। जन्म-स्थान — बख़्तियारपुर, बिहार। सूचना के स्रोत — पिताजी का कथन, दादाजी की सेवा-पुस्तिका, तथा 1968 का एक छायाचित्र जिसके पीछे तिथि लिखी है।
अंतिम स्तंभ सबसे महत्वपूर्ण क्यों है: उसके बिना वंशावली केवल एक दावा है। उसके साथ कोई भी आपके काम की जाँच कर सकता है — और यही कहानी और इतिहास का अंतर है। यह भी देखिए कि पीछे जाते-जाते क्या होता है: माता-पिता के लिए दस्तावेज़ हैं, परदादा-परदादी के लिए शायद केवल एक नाम और एक गाँव। जितना पीछे जाइए, स्रोत उतने ही कम — प्राचीन भारत के साथ इतिहासकारों की भी यही समस्या है।
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