प्र1.
आपने अपने परिवार के अतीत के संबंध में जानकारियाँ कैसे प्राप्त कीं? इन जानकारियों को प्राप्त करने के लिए क्या आपने छायाचित्रों, डायरियों, पहचान-पत्रों आदि का उपयोग किया या आप केवल अपने माता-पिता और संबंधियों की स्मृतियों पर निर्भर थे?
उत्तर
लगभग निश्चित रूप से आपने दोनों प्रकार का मिश्रण उपयोग किया होगा — एक ओर लिखित एवं भौतिक वस्तुएँ, दूसरी ओर बोली गई स्मृति। यही मिश्रण इस प्रश्न का पूरा उद्देश्य है।
| आपने क्या उपयोग किया | यह इतिहास के किस वर्ग से मेल खाता है (पृष्ठ 67) |
|---|---|
| आधार कार्ड, राशन कार्ड, प्रमाण-पत्र, भूमि के काग़ज़, पत्र, डायरियाँ | साहित्यिक/लिखित स्रोत — जैसे शिलालेख, ताम्रपत्र एवं पांडुलिपि |
| पुराने छायाचित्र, किसी पूर्वज का चित्र | कलात्मक स्रोत — जैसे चित्रकला एवं मूर्तिकला |
| बर्तन, आभूषण, औज़ार, पुराने सिक्के, पुराना घर | पुरातात्विक स्रोत — जैसे सिक्के, आभूषण, उपकरण एवं संरचनाएँ |
| माता-पिता, दादा-दादी एवं पड़ोसियों ने जो बताया | मौखिक स्रोत — जैसे लोक साहित्य एवं वंशावली |
नमूना उत्तर: “अधिकांश जानकारी दादी के बताने से मिली। उन्होंने चारों परदादा-परनाना के नाम और उनका गाँव बताया। परंतु उन्हें वर्ष ठीक-ठीक याद नहीं थे, इसलिए मैंने दादाजी की पेंशन बही से उनकी जन्मतिथि देखी और एक पुराने छायाचित्र के पीछे '1971' लिखा मिला। जहाँ दोनों में अंतर था, मैंने तालिका में दोनों लिख दिए और साथ में यह भी कि कौन-सी सूचना किस स्रोत से आई है।”
यह असहमति असफलता नहीं है: अध्याय कहता है कि कभी स्रोत एक-दूसरे की पुष्टि करते हैं और कभी एक-दूसरे के विपरीत सूचनाएँ देते हैं, और तब इतिहासकार को तय करना पड़ता है कि किस स्रोत पर अधिक विश्वास किया जाए। दस्तावेज़ पर लिखी तिथि प्राय: याद की गई तिथि से बेहतर होती है — परंतु छायाचित्र पर भी ग़लत लेबल लग सकता है। विरोध को छिपाने के बजाय दर्ज करना ही अच्छे इतिहासकार का काम है।