अन्वेषण अध्याय 4 आइए पता लगाएँ

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
अगले पृष्ठ पर इतिहास के स्रोतों से संबंधित कुछ चित्र दिए गए हैं। ये वस्तुएँ कौन-कौन सी हैं एवं आपके अनुसार क्या दर्शाती हैं? चित्र के सम्मुख दिए गए स्थान में वस्तु से संबंधित प्राप्त जानकारी को लिखिए।
उत्तर

पृष्ठ 69 पर तीन वस्तुएँ दी गई हैं, तीनों स्रोतों के अलग-अलग वर्गों से। पहले उन्हें ध्यान से देखिए, फिर नीचे के विवरण से मिलान कीजिए।

पृष्ठ 69 की वस्तुक्या दिखाई देता हैइतिहासकार इससे क्या पढ़ता है
ऊपर बाएँ — एक स्वर्ण सिक्का
पुरातात्विक स्रोत (सिक्के/शिलालेख)
सिर के पीछे प्रभामंडल लिए एक राजा, जो पालथी मारकर आसन पर बैठा वीणा बजा रहा है। किनारे-किनारे किसी प्राचीन लिपि (ब्राह्मी) में लेख।स्वर्ण उपलब्ध था और सिक्के ढाले जा सकते थे — अर्थात् राज्य संपन्न था। शासक ने स्वयं को योद्धा नहीं, संगीतकार के रूप में दिखाया — अर्थात् दरबार में कलाओं का सम्मान था। लेख से शासक का नाम एवं उपाधियाँ मिलती हैं — यह गुप्त शासक समुद्रगुप्त का प्रसिद्ध 'वीणावादक' प्रकार का स्वर्ण सिक्का है (चौथी शताब्दी सा.सं.)। सिक्कों से लिपि, भाषा एवं व्यापार का भी पता चलता है।
दाईं ओर — पत्थर की उत्कीर्ण पट्टिका
कलात्मक स्रोत (मूर्तिकला एवं पट्टिका)
ऊपर मेहराबदार एक ऊँची पाषाण-पट्टिका, दोनों ओर उत्कीर्ण स्तंभ, और दो मंज़िलों में बँटी। ऊपर: छत्र के नीचे सिंहासन पर बैठी एक मुकुटधारी आकृति, चारों ओर परिचारक। नीचे: अनेक आकृतियों वाला व्यस्त दृश्य जिसमें एक नौका जैसी रचना दिखती है।छत्र एवं सिंहासन राजसत्ता या देवत्व के चिह्न हैं; ऐसी पट्टिकाएँ प्राय: किसी महाकाव्य या धार्मिक कथा का दृश्य दिखाती हैं। यह मंदिर-स्थापत्य, शिल्पी के औज़ार एवं कौशल, तथा उस समय के वस्त्र, आभूषण, केश-विन्यास, वाद्ययंत्र और नौकाओं का साक्ष्य है — ऐसे विवरण जिन्हें कोई लिखित ग्रंथ दर्ज नहीं करता।
नीचे बाएँ — सिंह-शीर्ष (लायन कैपिटल)
पुरातात्विक स्रोत (स्मारक एवं संरचना)
एक गोल चौकी पर पीठ-से-पीठ जोड़कर खड़े चार सिंह। चौकी पर एक चक्र एवं पशु उत्कीर्ण हैं; उसके नीचे उलटे कमल के आकार का आधार। पत्थर अत्यंत चमकाया हुआ है।यह सारनाथ का अशोक का सिंह-शीर्ष है, वाराणसी के पास, तीसरी शताब्दी सा.सं.पू. में तराशा गया — अशोक के किसी स्तंभ का ऊपरी भाग। यह एक सुसंगठित एवं सशक्त राज्य दर्शाता है जो विशाल पत्थर काट, तराश, चमका और ढो सकता था; चक्र एवं पशु वह संदेश ले जाते हैं जो सम्राट फैलाना चाहता था। भारत ने इसे 26 जनवरी 1950 को राज्य-चिह्न के रूप में अपनाया, और इसका चक्र राष्ट्रीय ध्वज के मध्य का अशोक चक्र है — 2,200 वर्ष पुराना एक स्रोत, जो आज भी प्रतिदिन उपयोग में है।

तीनों वस्तुओं में एक बात समान है, उसे देखिए —

  • तीनों टिकाऊ हैं — स्वर्ण एवं पत्थर। यह एक चेतावनी है: कपड़े, लकड़ी, ताड़पत्र या मिट्टी की वस्तुएँ नष्ट हो जाती हैं, इसलिए जो बचा है वह अतीत का निष्पक्ष नमूना नहीं है।
  • तीनों शासकों या मंदिरों से जुड़ी हैं। आम लोगों के जीवन का पुनर्निर्माण साधारण वस्तुओं से करना पड़ता है — मृदभांड के टुकड़े, औज़ार, अनाज, घरों के फ़र्श।
  • प्रत्येक अलग प्रकार के प्रश्न का उत्तर देती है: सिक्का नाम एवं तिथि देता है, पट्टिका जीवन-शैली, और सिंह-शीर्ष राज्य की शक्ति एवं पहुँच।
अपने बॉक्स कैसे भरें: प्रत्येक चित्र के लिए चार बातें लिखिए — (1) वह किस चीज़ की बनी है, (2) उस पर क्या दिखाया गया है, (3) उसे संभवत: किसने और किसके लिए बनाया, और (4) एक ऐसा प्रश्न जिसका उत्तर वह नहीं देती। अंतिम बिंदु ही सबसे ईमानदार है: सिक्का यह नहीं बताएगा कि किसान क्या खाता था।
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