अन्वेषण अध्याय 4 आइए पता लगाएँ

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
ऊपर दिए गए चित्र में शैलाश्रय में आरंभिक मानव से संबंधित कुछ गतिविधियों को देखिए। आप इनमें से किस-किस गतिविधि को पहचान सकते हैं? प्रत्येक का संक्षिप्त विवरण दीजिए।
उत्तर

पृष्ठ 70 का चित्र एक ऊपर निकली हुई चट्टान के नीचे काम करते पूरे समुदाय को दिखाता है। इसमें ये गतिविधियाँ पहचानी जा सकती हैं —

चित्र में दिख रही गतिविधिविवरण
चट्टान पर चित्रकारीएक व्यक्ति हाथ उठाए शिला-भित्ति पर चित्र बना रहा है। उसके ऊपर दीवार पर पहले से काली आकृतियाँ हैं — पशुओं की एक पंक्ति, एक आखेटक, तथा नाचती-सी मानव आकृतियाँ। ये वही शैल-चित्र हैं जिनका उल्लेख अध्याय में है और जो संपूर्ण विश्व की सैकड़ों गुफाओं में मिलते हैं।
रंग तैयार करनादो लोग एक बड़े पत्थर के पात्र पर झुककर ढेलों को पीस रहे हैं। रंग रंगीन मिट्टी एवं खनिजों को बारीक पीसकर मिलाकर बनाना पड़ता था — अर्थात् दीवार की चित्रकारी इस शांत परिश्रम पर टिकी थी।
आग के चारों ओर बैठनाएक समूह जलती हुई आग के चारों ओर बैठा है, उनमें से एक आग की ओर हाथ बढ़ा रहा है। अग्नि ने ऊष्मा, अँधेरे में प्रकाश, पशुओं से सुरक्षा और पका भोजन दिया — अध्याय स्पष्ट कहता है कि आदिमानव ने अग्नि का उपयोग किया।
पत्थर के उपकरण बनानाकई लोग शैलाश्रय के फ़र्श पर घुटनों के बल बैठकर एक पत्थर से दूसरे पत्थर पर प्रहार कर रहे हैं। यह उपकरण-निर्माण है: पत्थर की उन्नत कुल्हाड़ियाँ एवं ब्लेड्स, नुकीले तीर तथा खुरचनी, जो पत्थर के टुकड़े छीलकर बनाए जाते थे।
उपकरण की धार बनानादाईं ओर खड़ा एक व्यक्ति दोनों हाथों से किसी ब्लेड पर काम कर रहा है — पहले से मोटे रूप में बने औज़ार की धार घिस या छील रहा है।
बच्चों का देखना एवं नकल करनादो बच्चे अलग बैठे छोटे टुकड़े हाथ में लिए वही कर रहे हैं जो बड़े कर रहे हैं। चित्र में कोई पुस्तक से नहीं पढ़ा रहा; कौशल देखकर और नकल करके हस्तांतरित होते थे।
समूह में रहनासबसे महत्वपूर्ण 'गतिविधि': सभी एक ही आश्रय में एक साथ हैं और प्रत्येक अलग काम कर रहा है। अध्याय कहता है कि आदिमानव प्रकृति की चुनौतियों में एक-दूसरे की सहायता के लिए टोलियों अथवा समूहों में रहते थे
शैलाश्रय ही क्यों, घर क्यों नहीं: ये लोग आखेटक एवं खाद्य संग्राहक थे, भोजन की खोज में निरंतर चलते रहते थे। प्राकृतिक रूप से निकली चट्टान वर्षा एवं धूप से मुफ़्त आश्रय देती थी — न निर्माण, न ढोना। घर अध्याय में बाद में आते हैं, तभी जब कृषि लोगों को एक स्थान से बाँध देती है।
क्या आप जानते हैं? ऐसे शैल-चित्रों का विश्व-प्रसिद्ध संग्रह भारत में मध्य प्रदेश के भीमबेटका शैलाश्रयों में है — सैकड़ों आश्रयों में पशुओं, आखेटकों, नर्तकों एवं वादकों के चित्र। यह यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है, और चित्रकार ने ठीक ऐसा ही दृश्य कल्पना में रखा होगा।
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