प्र1.
अगले पृष्ठ पर दिए गए चित्र का अवलोकन कीजिए। यह कुछ सहस्त्राब्दी पूर्व के कृषक समुदाय की गतिविधियों को प्रदर्शित करता है। उन गतिविधियों को सूचीबद्ध कीजिए जिनकी आप पहचान कर सकते हैं।
उत्तर
पृष्ठ 72 का चित्र नदी के किनारे बसा एक स्थायी कृषक गाँव दिखाता है। मुख्य गतिविधियाँ ये हैं —
| गतिविधि | चित्र में क्या दिख रहा है | यह क्या बताती है |
|---|---|---|
| फ़सल काटना | खड़ी ऊँची फ़सल पर झुके लोग हाथ के औज़ारों से कटाई कर रहे हैं | समुदाय अनाज उगाता है — हिम युग के बाद आया वही बड़ा परिवर्तन जिसका अध्याय वर्णन करता है |
| उपज ढोना | दो लोग सिर पर कटी फ़सल के बड़े गट्ठर लिए चल रहे हैं | फ़सल भंडारण के लिए लाई जा रही है — अब लोगों के पास बचाकर रखने योग्य अतिरिक्त अन्न है |
| औज़ार ले जाना | एक व्यक्ति कंधे पर लंबे हत्थे वाला औज़ार और उससे बँधी गठरी लिए गाँव की ओर जा रहा है | कृषि को बने-बनाए औज़ार चाहिए; अध्याय में आगे ये धातु के हो जाते हैं — पहले तांबा, फिर लोहा |
| झोपड़ी बनाना या मरम्मत करना | एक व्यक्ति हाथ ऊपर उठाए फूस की छत वाले मिट्टी के घर की दीवार पर काम कर रहा है | लोग बस चुके हैं; अस्थायी शिविरों एवं शैलाश्रयों की जगह स्थायी घर आ गए |
| भोजन पकाना | खुले चूल्हे पर एक बड़ा गोल पात्र, नीचे आग जल रही है | मृदभांड — अध्याय में गिनाई गई नई तकनीकों में से एक — भोजन पकाने एवं भंडारण के लिए |
| अनाज पीसना एवं भोजन तैयार करना | एक महिला चपटी सिल पर घुटनों के बल पीस रही है; पास में सब्ज़ियों की टोकरी एवं एक कटोरा | खाने से पहले अनाज को संसाधित करना पड़ता है; आरंभिक कृषक स्थलों पर सिलबट्टे सबसे आम प्राप्तियों में से हैं |
| भेड़-बकरी चराना | अग्रभूमि में चरता झुंड; पीछे नदी के पास मवेशी | पशुओं का घरेलूकरण — अध्याय गाय एवं बकरी का नाम लेता है — दूध, मांस, ऊन एवं श्रम के लिए |
| कुत्ता पालना | औज़ार लिए व्यक्ति के साथ एक कुत्ता चल रहा है | कुत्ता मनुष्य के साथ रहने वाला पहला पशु था; यहाँ वह झुंड एवं गाँव की रखवाली करता है |
| बच्चों का खेलना | घरों के पास छोटे बच्चे, खेतों से दूर | बसा हुआ, सुरक्षित गाँव-जीवन — पिछले चित्र की निरंतर चलती टोली से बिल्कुल भिन्न |
| नदी के किनारे बसना | पृष्ठभूमि में नदी, हरे किनारे एवं वृक्ष | अध्याय का अपना कारण: लोग नदियों के पास केवल जल के लिए नहीं बसे, बल्कि इसलिए भी कि वहाँ मृदा अधिक उपजाऊ होती है, जिससे अन्न उगाना सरल हो जाता है |
दोनों चित्रों की तुलना कीजिए। शैलाश्रय के दृश्य (पृष्ठ 70) में सब कुछ अस्थायी है: न दीवारें, न खेत, न संचित भोजन। इस दृश्य में घर हैं, बाड़ें हैं, खेत हैं, बर्तन हैं, पशु-झुंड हैं और खेलते बच्चे हैं। यही एक परिवर्तन — भोजन के पीछे चलने से भोजन उगाने तक — समुदायों को आकार एवं संख्या में बढ़ने, मुखिया, आदान-प्रदान एवं शिल्प विकसित करने और अंतत: पहले नगर बसाने में सक्षम बना गया।