अन्वेषण अध्याय 4 पाठ्य प्रश्न

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
पृष्ठ 62 एवं 63 (चित्र 4.3) में दी गई समय-रेखा में क्या आप आठवीं सहस्त्राब्दी सा.सं.पू. को चिह्नित कर सकते हैं?
उत्तर

हाँ — वह ठीक 8000 सा.सं.पू. के निशान पर पड़ती है, जो समय-रेखा पर पहले से ही अंकित है।

गणना इस प्रकार कीजिए। सा.सं.पू. की सहस्त्राब्दियाँ 1 सा.सं.पू. से आरंभ करके पीछे की ओर, 1,000 वर्ष के खंडों में गिनी जाती हैं —

सहस्त्राब्दी सा.सं.पू.इसमें सम्मिलित वर्ष
पहली सहस्त्राब्दी सा.सं.पू.1000 सा.सं.पू. – 1 सा.सं.पू.
दूसरी सहस्त्राब्दी सा.सं.पू.2000 सा.सं.पू. – 1001 सा.सं.पू.
तीसरी सहस्त्राब्दी सा.सं.पू.3000 सा.सं.पू. – 2001 सा.सं.पू.
आठवीं सहस्त्राब्दी सा.सं.पू.8000 सा.सं.पू. – 7001 सा.सं.पू.
nवीं सहस्त्राब्दी सा.सं.पू. = (n × 1000) सा.सं.पू. से ((n – 1) × 1000 + 1) सा.सं.पू. तक
n = 8 के लिए: 8 × 1000 = 8000 सा.सं.पू. से (7 × 1000 + 1) = 7001 सा.सं.पू. तक
इसका आरंभ — इनमें सबसे पहला वर्ष — है 8000 सा.सं.पू.
10वीं9वीं8वीं7वीं 6ठी5वीं4थी3री 2री1ली1ली2री सहस्त्राब्दियाँ सा.सं.पू. — 1 सा.सं.पू. से पीछे की ओर सहस्त्राब्दियाँ सा.सं. 1 सा.सं.पू. | 1 सा.सं. 8000 सा.सं.पू. — आठवीं सहस्त्राब्दी सा.सं.पू. का आरंभ 8000 सा.सं.पू. → 7001 सा.सं.पू.
सहस्त्राब्दियाँ 1,000-1,000 वर्ष के खंडों के रूप में। नारंगी घेरे वाला खंड आठवीं सहस्त्राब्दी सा.सं.पू. है; उसका आरंभ 8000 सा.सं.पू. की रेखा है, जो चित्र 4.3 पर पहले से अंकित है।

चित्र 4.3 पर पेंसिल कहाँ रखें: पृष्ठ 63 पर पट्टी पर 12,000 सा.सं.पू., 10,000 सा.सं.पू., 8000 सा.सं.पू., 6000 सा.सं.पू., 4000 सा.सं.पू., 2000 सा.सं.पू. एवं 2000 सा.सं. अंकित हैं। 8000 सा.सं.पू. के निशान पर सीधी रेखा खींचकर लिखिए “आठवीं सहस्त्राब्दी सा.सं.पू. का आरंभ”। पुस्तक की समय-रेखा पर यह वहीं के आस-पास है जहाँ भारतीय उपमहाद्वीप में मिट्टी के बर्तन बनाने की तकनीक तथा प्रथम स्थायी निवास व कृषि का आरंभ दर्शाए गए हैं।

ध्यान दें: सा.सं.पू. में 'आरंभ' का अर्थ है बड़ी संख्या वाला वर्ष, क्योंकि सा.सं.पू. वर्ष पीछे की ओर गिने जाते हैं। आठवीं सहस्त्राब्दी सा.सं.पू. 8000 सा.सं.पू. से आरंभ होकर 7001 सा.सं.पू. पर समाप्त होती है — जो पहली बार में उलटा लगता है।
पुस्तक की एक छोटी-सी चूक: पृष्ठ 65 पर सहस्त्राब्दी वाले बिंदु में लिखा है “1 सा.सं. से लेकर प्रत्येक सहस्त्र वर्षों के लिए सहस्त्राब्दी की गणना की जाती है” — अंग्रेज़ी संस्करण में यहाँ भूल से 'शताब्दी' छप गया है। नियम सही है, केवल शब्द की चूक है।
प्र2.
क्या आप जानते हैं कि भारत में पारंपरिक तिथिपत्रों का निर्माण किस प्रकार किया जाता रहा है?
उत्तर

हाँ — अनेक भारतीय तिथिपत्र चांद्र-सौर हैं: वे महीनों एवं दिनों के निर्धारण के लिए सूर्य एवं चंद्रमा दोनों की स्थिति पर निर्भर करते हैं, न कि केवल एक निश्चित दिन-संख्या पर जैसा ग्रेगोरियन तिथिपत्र करता है।

यह सारी जानकारी जिस पुस्तक में रहती है, वह है पंचांग

पंचांग क्या हैइसमें क्या होता हैइसका उपयोग
तालिकाओं की एक पुस्तक जिसमें प्रत्येक माह के दिनों के साथ-साथ संबंधित खगोलीय आँकड़े सूचीबद्ध होते हैंसूर्य एवं चंद्रमा की स्थितियाँ; सूर्यग्रहण एवं चंद्रग्रहण का सटीक आकलन; सूर्योदय एवं सूर्यास्त के समयत्योहारों की तिथियों एवं समय का निर्धारण, मांगलिक मुहूर्त, तथा वर्ष के मौसम पूर्वानुमान
सूर्य और चंद्रमा दोनों क्यों: चंद्रमा एक सुंदर मास देता है (लगभग साढ़े उनतीस दिन), परंतु ऐसे बारह मास सौर वर्ष से लगभग 11 दिन कम पड़ते हैं, जिससे ऋतुएँ खिसक जातीं। भारतीय तिथिपत्र इसका समाधान बीच-बीच में एक अतिरिक्त मास (अधिक मास) जोड़कर करते हैं। इसीलिए दीवाली या होली प्रत्येक वर्ष भिन्न अंग्रेज़ी तारीख़ को पड़ती है, परंतु सदा एक ही ऋतु में।
क्या आप जानते हैं? आज भी भारत-भर में पंचांग छपते और बड़े स्तर पर प्रयोग होते हैं। इनकी सटीकता अनुमान नहीं है — ग्रहण का मिनटों तक पूर्वानुमान वास्तविक खगोलशास्त्र माँगता है, इसीलिए भारत में गणित एवं खगोलशास्त्र (जैसे आर्यभटीय) तिथिपत्र-निर्माण के साथ-साथ विकसित हुए।
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