अन्वेषण अध्याय 7 आइए पता लगाएँ

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
उपरोक्त कृति में बुद्ध को कैसे दर्शाया गया है, इस पर चर्चा कीजिए।
उत्तर

उत्तर देने से पहले पृष्ठ 114 की कृति को ध्यान से देखिए — मूर्तिकार ने कई संकेत जान-बूझकर गढ़े हैं और हर संकेत कुछ कह रहा है।

जो दिखाई देता हैवह क्या कह रहा है
वे बीच में खड़े हैं और सबसे लंबे हैंप्राचीन कला में आकार महत्व का सूचक है। दृष्टि पहले उन्हीं पर जाती है
सिर के पीछे सादा गोल प्रभामंडलयह प्रभावलय ज्ञान-प्राप्त व्यक्ति का प्रचलित चिह्न है। कृति में किसी और के पीछे यह नहीं है
दाहिना हाथ उठा हुआ, हथेली सामनेउपदेश और अभय की मुद्रा। वे आशीर्वाद या आदेश नहीं दे रहे — वे समझा रहे हैं
दोनों कंधों को ढकता, गहरी सिलवटों वाला लंबा चीवरयह भिक्षु का वस्त्र है, राजसी वेश नहीं। राजकुमार होते हुए भी वे उसे त्यागने वाले के रूप में दिखाए गए हैं
न मुकुट, न आभूषण, न कोई शस्त्रतुलना कीजिए — आस-पास खड़े कई श्रोताओं ने भारी पगड़ियाँ और आभूषण पहन रखे हैं। बुद्ध का अधिकार उनके ज्ञान से है, वैभव से नहीं
सिर पर बँधा हुआ जूड़ायह उष्णीष है, जो भारतीय मूर्तिकला में महापुरुष का पारंपरिक चिह्न है
शांत मुख, झुकी हुई दृष्टिवही 'शांत' भाव जिसे देखकर युवा सिद्धार्थ रथ से संन्यासी की ओर आकृष्ट हुए थे
दोनों ओर श्रोताओं की भीड़, हाथ जोड़े या उठाए हुएवे बुद्ध की ओर और एक-दूसरे की ओर मुड़े हैं। बुद्ध किसी सिंहासन पर अकेले नहीं — वे समूह के बीच में हैं
ऊपर वृक्ष, पीछे वेदिका और स्तंभउद्यान या विहार का परिवेश — वही साधारण स्थान जहाँ बुद्ध वास्तव में उपदेश देते थे

कृति स्वयं क्या है। यह लगभग 1800 वर्ष पुरानी पत्थर की कृति है, अर्थात लगभग दूसरी–तीसरी शताब्दी सा.सं. की — बुद्ध के काल के छह-सात शताब्दी बाद की। हरे रंग का पत्थर और वस्त्र की अत्यंत सजीव, गहरी सिलवटें उत्तर-पश्चिम की गांधार शैली की विशेषताएँ मानी जाती हैं।

सबसे रोचक बात यह है कि इसमें क्या नहीं है। बुद्ध ने कहा था कि अविद्या और मोह कष्ट के कारण हैं, और “युद्ध के मैदान में हजारों पर विजय पाने की तुलना में स्वयं पर विजय पाना अधिक बड़ी उपलब्धि है।” मूर्तिकार ने ठीक यही दृश्य बना दिया है: बीच में खड़ा व्यक्ति वही है जिसके पास न मुकुट है, न आभूषण, न शस्त्र — और मुकुट पहने लोग सुनने वाले हैं। रचना स्वयं एक तर्क है।
कक्षा में चर्चा कैसे करें: क्रम से तीन प्रश्न पूछिए। (1) इसमें सबसे महत्वपूर्ण कौन है, और बिना बताए आपको कैसे पता चला? (2) वे अपने हाथ से क्या कर रहे हैं? (3) राजकुमार जो पहनता, उसमें से क्या-क्या यहाँ नहीं है? किसी चित्र में क्या है और क्या जान-बूझकर नहीं है — यह पढ़ना एक कौशल है जो आगे हर अध्याय में काम आएगा।
प्र2.
क्या आप भारत के कुछ राज्यों या कुछ अन्य देशों के नाम बता सकते हैं जहाँ आज भी बौद्ध मत एक प्रमुख मत है। इन स्थानों को विश्व के मानचित्र पर अंकित करने का प्रयास कीजिए।
उत्तर

बौद्ध मत भारत में आरंभ होकर बाहर फैला — “भारत और पूरे एशिया पर उनका गहरा प्रभाव था… यह प्रभाव आज भी अनुभव किया जा सकता है।” कहाँ-कहाँ, यह देखिए।

भारत मेंक्यों
सिक्किमजनसंख्या का बड़ा भाग बौद्ध मत का अनुयायी; रुमटेक और पेमायांग्त्से जैसे विहार
अरुणाचल प्रदेशपश्चिमी जिले; तवांग का विशाल विहार
लद्दाख (केंद्रशासित प्रदेश)हेमिस, ठिकसे, लामायुरु तथा अनेक विहार
हिमाचल प्रदेशलाहौल-स्पीति और किन्नौर; धर्मशाला तिब्बती समुदाय का केंद्र
महाराष्ट्रभारत के किसी भी राज्य से अधिक बौद्ध जनसंख्या, डॉ. भीमराव आंबेडकर के नेतृत्व में 1956 के धर्मांतरण के बाद
पश्चिम बंगाल (दार्जिलिंग, कालिंपोंग), मिजोरम और त्रिपुरा (चकमा समुदाय), कर्नाटक (बायलाकुप्पे की तिब्बती बस्तियाँ)उल्लेखनीय बौद्ध जनसंख्या
क्षेत्रवे देश जहाँ बौद्ध मत प्रमुख है
दक्षिण एशियाश्रीलंका, भूटान, नेपाल
दक्षिण-पूर्व एशियाम्याँमार, थाईलैंड, कंबोडिया, लाओस, वियतनाम, सिंगापुर
पूर्वी और मध्य एशियाचीन, जापान, दक्षिण कोरिया, मंगोलिया, तिब्बत क्षेत्र

मानचित्र पर सही ढंग से कैसे अंकित करें। विश्व के रेखा-मानचित्र पर पहले एक रंग से लुंबिनी (नेपाल) और बोधगया (बिहार) अंकित कीजिए — कथा यहीं से आरंभ होती है। फिर दूसरे रंग से ऊपर दिए देशों को भरिए और अंत में दो तीर बनाइए: एक भारत से दक्षिण-पूर्व की ओर श्रीलंका और दक्षिण-पूर्व एशिया तक, और दूसरा उत्तर की ओर मध्य एशिया होते हुए पूर्व में चीन, कोरिया और जापान तक। नीचे संकेत-सूची अवश्य बनाइए।

स्वयं जाँचिए: दोनों तीर ही इस गतिविधि का मर्म हैं। बौद्ध मत उन्हीं मार्गों से फैला जिनसे व्यापारी और भिक्षु पहले से आ-जा रहे थे — बंगाल की खाड़ी का समुद्री मार्ग और वह स्थल-मार्ग जो आगे चलकर रेशम मार्ग कहलाया। कोई भी विचार उन्हीं रास्तों से यात्रा करता है जिनसे सामान जाता है।
कुछ देश सूची से क्यों छूट जाते हैं: चीन जैसे देशों में बौद्ध मत की उपस्थिति बहुत बड़ी है, किंतु वहाँ यह अनेक विश्वासों में से एक है, इसलिए उसे सदा 'उस देश का मत' नहीं गिना जाता। मानचित्र बनाते समय ऐसे देशों के लिए “बड़ी बौद्ध जनसंख्या” और श्रीलंका, म्याँमार, थाईलैंड, कंबोडिया, लाओस, भूटान तथा मंगोलिया के लिए “बहुसंख्यक बौद्ध” लिखना अधिक सही होगा।
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