प्र1.
एक नाटक का मंचन कीजिए, जिसमें मृत्यु के देवता यम से अनेक बच्चे नचिकेता के रूप में जीवन के बारे में प्रश्न पूछ रहे हैं।
उत्तर
विचार सुंदर है: कठोपनिषद् में एक बालक पूछता है; नाटक में अनेक हैं, जिससे पूरी कक्षा भाग ले सकती है और प्रश्न भी अलग-अलग हो सकते हैं।
तैयारी कैसे करें।
| अंग | सुझाव |
|---|---|
| पात्र | एक यम; पाँच से आठ नचिकेता; एक सूत्रधार; चाहें तो आरंभ के छोटे दृश्य के लिए पिता |
| मंच | एक ओर यम के लिए एक कुर्सी और बीच में खाली स्थान। और कुछ आवश्यक नहीं |
| वेशभूषा | यम के लिए गहरे रंग का उत्तरीय; शेष सबके लिए साधारण वस्त्र। यम को डरावना मत बनाइए — कथा में वे पहले कठोर और फिर प्रसन्न होते हैं |
| अवधि | आठ से दस मिनट। प्रत्येक नचिकेता का एक प्रश्न, प्रत्येक प्रश्न का एक उत्तर |
| नाटक का नियम | यम पहले दो-तीन प्रश्न टाल सकते हैं, ठीक वैसे ही जैसे उपनिषद् में। बच्चों के अड़े रहने पर ही वे उत्तर देना आरंभ करें। यह टालना ही नाटक का प्राण है |
नमूना आरंभ (इसे स्वतंत्रता से बदलिए):
सूत्रधार: एक व्यक्ति अपना सब कुछ दान कर रहा था। उसका पुत्र नचिकेता बार-बार पूछता रहा कि पिता उसे किसे देंगे।
पिता (क्रोध में): मैं तुम्हें यम को देता हूँ!
सूत्रधार: और इस प्रकार बच्चे मृत्यु के देवता के द्वार पर पहुँचे, और तीन दिन प्रतीक्षा की।
यम: तुमने बहुत प्रतीक्षा की और किसी ने तुम्हें जल तक नहीं दिया। जो चाहो, माँग लो।
पहला नचिकेता: तो बताइए — शरीर की मृत्यु के बाद क्या होता है?
यम: कुछ और माँगो। धन माँगो, दीर्घ आयु माँगो, घोड़े और हाथी माँगो।
दूसरा नचिकेता: घोड़े मरते हैं। हाथी मरते हैं। हम अपना प्रश्न नहीं छोड़ेंगे।
तीसरा नचिकेता: शरीर की मृत्यु के बाद क्या होता है?
यम (क्षण भर रुककर, प्रसन्न होकर): तो सुनो। आत्मा सभी जीवों में निहित है। इसका न तो जन्म होता है और न ही मृत्यु; यह अमर है।
चौथा नचिकेता: यदि इसका जन्म ही नहीं होता, तो जिसे हम 'मैं' कहते हैं, वह क्या है?
पाँचवाँ नचिकेता: और जो वर्ष हमें मिले हैं, उनका करें क्या?
यम: बालक, यही प्रश्न पहले प्रश्न का पूरा उत्तर है।
सूत्रधार: एक व्यक्ति अपना सब कुछ दान कर रहा था। उसका पुत्र नचिकेता बार-बार पूछता रहा कि पिता उसे किसे देंगे।
पिता (क्रोध में): मैं तुम्हें यम को देता हूँ!
सूत्रधार: और इस प्रकार बच्चे मृत्यु के देवता के द्वार पर पहुँचे, और तीन दिन प्रतीक्षा की।
यम: तुमने बहुत प्रतीक्षा की और किसी ने तुम्हें जल तक नहीं दिया। जो चाहो, माँग लो।
पहला नचिकेता: तो बताइए — शरीर की मृत्यु के बाद क्या होता है?
यम: कुछ और माँगो। धन माँगो, दीर्घ आयु माँगो, घोड़े और हाथी माँगो।
दूसरा नचिकेता: घोड़े मरते हैं। हाथी मरते हैं। हम अपना प्रश्न नहीं छोड़ेंगे।
तीसरा नचिकेता: शरीर की मृत्यु के बाद क्या होता है?
यम (क्षण भर रुककर, प्रसन्न होकर): तो सुनो। आत्मा सभी जीवों में निहित है। इसका न तो जन्म होता है और न ही मृत्यु; यह अमर है।
चौथा नचिकेता: यदि इसका जन्म ही नहीं होता, तो जिसे हम 'मैं' कहते हैं, वह क्या है?
पाँचवाँ नचिकेता: और जो वर्ष हमें मिले हैं, उनका करें क्या?
यम: बालक, यही प्रश्न पहले प्रश्न का पूरा उत्तर है।
शेष नचिकेताओं के लिए प्रश्न — प्रत्येक अभिनेता को एक दीजिए, और चुनने दीजिए ताकि वह मन से पूछे: क्या हमारे कर्मों में से कुछ हमारे साथ जाता है? लोग आपसे इतना क्यों डरते हैं? आप तक पहुँचकर लोग सबसे अधिक किस बात का पछतावा करते हैं? क्या कभी कोई आपको देखकर प्रसन्न भी हुआ है? किन बातों पर समय नहीं गँवाना चाहिए?
यह नाटक सफल कब होगा: यम को डरावने मुखौटे वाला खलनायक बनाने का लोभ छोड़ दीजिए। उपनिषद् में वे ऐसे गुरु हैं जो पहले परीक्षा लेते हैं और फिर आदर करते हैं। नाटक की सारी ऊर्जा दृढ़ता से आती है — उन बच्चों से जो किसी सरल विषय पर टाले नहीं जा सकते। इसी हठ का अभ्यास कराइए, दर्शक बँधे रहेंगे।
कक्षा के लिए आगे: प्रस्तुति के बाद दर्शकों से कहिए कि नाटक का वह एक प्रश्न लिखें जिसका उत्तर वे सबसे अधिक जानना चाहते हैं। बिना नाम लिए पर्चियाँ इकट्ठी करके पढ़िए। आपने अपना छोटा-सा उपनिषद् रच लिया — बच्चों द्वारा पूछे गए प्रश्नों का संग्रह, जो मूल उपनिषद् भी यही हैं।