गलत।
अध्याय स्पष्ट कहता है: ये ऋचाएँ “लिखित रूप में नहीं थीं, अपितु इनका मौखिक पाठ किया जाता था”। ये “गहन प्रशिक्षण के माध्यम से स्मृतिबद्ध किए गए एवं मौखिक रूप से बिना किसी विशेष परिवर्तन के आगे संप्रेषित किए गए” — 100 से 200 पीढ़ियों तक।
अद्यतन2026-09-05
गलत।
अध्याय स्पष्ट कहता है: ये ऋचाएँ “लिखित रूप में नहीं थीं, अपितु इनका मौखिक पाठ किया जाता था”। ये “गहन प्रशिक्षण के माध्यम से स्मृतिबद्ध किए गए एवं मौखिक रूप से बिना किसी विशेष परिवर्तन के आगे संप्रेषित किए गए” — 100 से 200 पीढ़ियों तक।
सही।
“ये भारत के सबसे प्राचीन ग्रंथ हैं और वस्तुत: विश्व के सबसे प्राचीन ग्रंथों में से एक हैं।” विशेषज्ञों ने चारों में प्राचीनतम ऋग्वेद की रचना पाँचवीं से दूसरी सहस्राब्दी सा.सं.पू. के बीच किए जाने का प्रस्ताव किया है।
सही।
अध्याय इसका अनुवाद यों देता है: “परम सत्य एक ही है, किंतु मनीषी इसे अनेक नाम देते हैं।” यह ऋचा ठीक उस वाक्य के बाद उद्धृत है जो इसे समझाता है: “आद्य ऋषियों और ऋषिकाओं ने देवताओं और देवियों को अलग नहीं, बल्कि एक ही माना।”
गलत। वेद कहीं अधिक प्राचीन हैं।
अध्याय यह संबंध शब्दों में भी स्पष्ट करता है: बौद्ध मत उन दर्शनों में से एक था जिन्होंने “वेदों की प्रभुता को नहीं स्वीकार किया” — अर्थात बौद्ध मत के उदय के समय वेद पहले से थे और प्रामाणिक माने जाते थे।
गलत।
“जैन मत एक अन्य महत्वपूर्ण दर्शन है जो उसी समय काफी लोकप्रिय हुआ, यद्यपि इस मत को अधिक प्राचीन माना जाता है।” दोनों समकालीन हैं, एक दूसरे की शाखा नहीं।
| बौद्ध मत | जैन मत | |
|---|---|---|
| उपदेशक | सिद्धार्थ गौतम, जन्म लुंबिनी में | वर्धमान, जन्म वैशाली के समीप |
| काल | लगभग ढाई सहस्राब्दी पूर्व | छठी शताब्दी सा.सं.पू. का आरंभ |
| प्राप्ति | बोधगया में पीपल के नीचे ज्ञान; बुद्ध कहलाए | 12 वर्ष की तपस्या के बाद 'अनंत' ज्ञान; महावीर कहलाए |
| विशिष्ट उपदेश | अविद्या और मोह कष्ट के स्रोत; संघ | अहिंसा के साथ अनेकांतवाद और अपरिग्रह |
सही।
दोनों अहिंसा पर टिके हैं, और दोनों में यह प्रहार न करने से बहुत आगे जाती है।
| बौद्ध मत | जैन मत |
|---|---|
| बुद्ध के उपदेशों में “अहिंसा का विचार निहित है, जिसका मूल अर्थ है — चोट नहीं पहुँचाना या नुकसान नहीं पहुँचाना” | महावीर: “सभी सांस लेने वाले, उपस्थित, जीवित, संवेदनशील जीवों को मारा न जाए, न ही उनके साथ हिंसा की जाए, न दुर्व्यवहार किया जाए, न ही सताया जाए तथा न ही दूर हटाया जाए” |
| “युद्ध के मैदान में हजारों व्यक्तियों पर हजारों बार विजय पाने की तुलना में स्वयं पर विजय पाना अधिक बड़ी उपलब्धि है” | “सभी जीवों, मानवों से लेकर अदृश्य जीवों तक आपसी संबद्धता और आपसी निर्भरता” पर बल |
और दोनों में, जैसा पृष्ठ 117 का बॉक्स कहता है, अहिंसा का अर्थ “शारीरिक हिंसा न करने से भी कहीं अधिक है। इसमें विचारों की हिंसा से भी संयम रखने के लिए कहा गया है।”
गलत।
“देवताओं में इतनी बहुलता के पश्चात, हिंदू धर्म के समान अनेक जनजातियों में भी उच्चतर देवत्व या परमात्मा की संकल्पना है।” अध्याय उसी पृष्ठ पर तीन उदाहरण देता है।
| परमात्मा | किनके द्वारा पूजित | अध्याय क्या कहता है |
|---|---|---|
| डोनीपोलो | अरुणाचल प्रदेश की अनेक जनजातियाँ | सूर्य और चंद्रमा के मिले-जुले रूप, “इन्हें आगे चलकर परमात्मा माना गया” |
| खंडोबा | मध्य भारत के क्षेत्र | “मध्य भारत के क्षेत्र में खंडोबा भगवान के संबंध में भी ऐसा ही है” |
| सिंगबोंगा | पूर्वी भारत की मुंडा और संथाल जनजातियाँ | “जिन्हें वे परमेश्वर कहते हैं और जिन्होंने यह संपूर्ण विश्व बनाया” |
“ऐसे अनेक उदाहरण हैं,” अध्याय जोड़ता है। जनजातीय विश्वास प्रणालियों में समृद्ध कला, त्योहार, पवित्र भू-दृश्य तथा महाभारत और रामायण के अपने रूप भी सम्मिलित हैं। 'आत्मा और छोटे देवों तक सीमित' कहना ठीक वही 19वीं शताब्दी वाला पक्षपातपूर्ण निर्णय है जिसे अध्याय के अनुसार अधिकांशत: नकार दिया गया है।