पहले कथा याद कीजिए (पृष्ठ 111–112)। यज्ञ में अपनी समस्त संपत्ति दान कर रहे पिता से पुत्र नचिकेता बार-बार पूछता है कि वे उसे किस देवता को अर्पित करेंगे; पिता क्रोध में कह देते हैं, “मैं तुम्हें यम को अर्पित करता हूँ।” बालक इसे सचमुच मान लेता है, यमलोक जाता है, लंबी प्रतीक्षा करता है और मृत्यु के देवता से मिलता है। वह एक ही प्रश्न पूछता है और टलने को तैयार नहीं होता: “शरीर की मृत्यु के बाद क्या होता है?” यम पहले उत्तर टालते हैं; बालक अड़ा रहता है; और अंतत: प्रसन्न होकर यम बताते हैं कि आत्मा सभी जीवों में निहित है — “इसका न तो जन्म होता है और न ही मृत्यु; यह अमर है।”
इस प्रश्न में अच्छा उत्तर क्या है: नचिकेता के प्रश्न केवल जिज्ञासा नहीं, आवश्यकता हैं। वह वही बात पूछता है जो कोई जीवित व्यक्ति नहीं बता सकता, और उसी से पूछता है जो बता सकता है। इसी गंभीरता से लिखिए — और प्रश्न के रूप में लिखिए, भाषण के रूप में नहीं।
| प्रश्न का प्रकार | उदाहरण |
|---|---|
| जो शेष रहता है, उसके विषय में | यदि आत्मा न जन्म लेती है न मरती है, तो मृत्यु में समाप्त क्या होता है? क्या आत्मा को छूटा हुआ जीवन स्मरण रहता है? |
| कर्म और पुनर्जन्म के विषय में | क्या हमारे कर्म हमारे साथ जाते हैं? अगला जन्म कौन तय करता है — आप, या व्यक्ति स्वयं? |
| जीने के ढंग के विषय में | यदि मृत्यु सबको आनी है, तो जीवन किस पर लगाना चाहिए? आप तक पहुँचने पर लोग सबसे अधिक किस बात का पछतावा करते हैं? |
| भय के विषय में | लोग आपसे इतना क्यों डरते हैं? मृत्यु के विषय में लोग कौन-सी बात गलत समझ बैठे हैं? |
| स्वयं यम के विषय में | जिस देव से सब डरते हैं, वह होना कठिन तो नहीं? क्या कभी किसी को न ले जाने का मन हुआ? |
“यदि मैं नचिकेता होता तो मैं थोड़े ही प्रश्न पूछता, पर सीधे पूछता।
पहला — आपने कहा कि आत्मा न जन्म लेती है, न मरती है। तो फिर शरीर के जलने पर समाप्त क्या होता है? जिसे मैं प्रेम करता हूँ, वह कहीं अब भी है या केवल एक तत्व शेष है?
दूसरा — क्या आत्मा जन्म-जन्म की स्मृति साथ ले जाती है? यदि नहीं, तो वह अब भी 'मैं' किस अर्थ में है?
तीसरा — क्या हमारे कर्म सचमुच हमारे साथ जाते हैं, और उनका लेखा कौन रखता है — आप, या व्यक्ति स्वयं?
चौथा — आप सबसे अंत में मिलते हैं; बताइए कि लोग किस बात का पछतावा सबसे अधिक करते हैं। यह मैं बाद में नहीं, अभी जानना चाहूँगा।
और अंत में एक प्रश्न केवल आपके लिए — जिस देव से सब डरते हैं, वह होना भारी नहीं लगता?”