प्र1.
जनजाति क्या है?
उत्तर
कोई एक परिभाषा नहीं है — अध्याय पहली ही पंक्ति में कहता है: “इस सामाजिक इकाई की अनेक परिभाषाएँ दी गई हैं।” इसके बाद वह वह परिभाषा देता है जो आज मानव वैज्ञानिक प्राय: मानते हैं। जनजाति परिवारों या वंशों का ऐसा समूह है जिसमें पाँच बातें एक साथ हों:
| क्र. | लक्षण | अर्थ |
|---|---|---|
| 1 | सामान्य उत्पत्ति | सदस्य स्वयं को एक ही पूर्वजों का वंशज मानते हैं |
| 2 | साझा संस्कृति | अपने त्योहार, वेशभूषा, कला, गीत, रीतियाँ और विश्वास |
| 3 | साझा भाषा | प्राय: ऐसी भाषा जो केवल वही समुदाय बोलता है |
| 4 | मुखिया के अधीन निकट समुदाय | लोग एक-दूसरे को जानते हैं; विवाद किसी दूर की सरकार नहीं, मुखिया सुलझाता है |
| 5 | निजी संपत्ति नहीं | भूमि और साधन व्यक्ति के नहीं, समुदाय के होते हैं |
प्राचीन भारत में इसके लिए कोई शब्द ही नहीं था। बॉक्स का यही वाक्य सबसे रोचक है: “जनजातियाँ केवल अलग-अलग जन थीं जो एक विशेष परिवेश में रहती थीं, जैसे कि वन या पहाड़।” वही 'जन' शब्द जो ऋग्वेद भरतों और कुरुओं के लिए प्रयोग करता है। इनके लिए कोई अलग कोटि नहीं थी, इसलिए 'हम' और 'वे' की कोई रेखा भी नहीं थी। भारत के संविधान में अंग्रेजी में 'ट्राइब' और 'ट्राइबल कम्युनिटी' तथा हिंदी में जनजाति शब्द का उपयोग किया गया है — और जन वही पुराना शब्द है।
आधिकारिक आँकड़े, 2011:
705 जनजातियाँ, भारत के अधिकांश राज्यों में
जनसंख्या लगभग 104 मिलियन
— यह ऑस्ट्रेलिया और यूनाइटेड किंगडम की कुल जनसंख्या से अधिक है
705 जनजातियाँ, भारत के अधिकांश राज्यों में
जनसंख्या लगभग 104 मिलियन
— यह ऑस्ट्रेलिया और यूनाइटेड किंगडम की कुल जनसंख्या से अधिक है
परिभाषा को सावधानी से बरतना क्यों आवश्यक है: पाँचवाँ लक्षण — निजी संपत्ति का न होना — ऐतिहासिक रूप से अनेक समुदायों पर लागू होता है, आज सब पर नहीं; और बॉक्स स्वयं यह मानकर आरंभ होता है कि परिभाषाएँ अनेक हैं। भारत के जनजातीय समुदाय अंडमान के अत्यंत छोटे समूहों से लेकर गोंड, भील और संथाल जैसे करोड़ों की संख्या वाले समुदायों तक फैले हैं। परिभाषा अध्ययन का आरंभ-बिंदु है, कोई ऐसी परीक्षा नहीं जिसे किसी जीवित समुदाय को पास करना हो।
अध्याय जो सुधार कराता है: “19वीं शताब्दी में जनजातियों का अध्ययन करने वाले मानव वैज्ञानिकों ने उन्हें प्राय: सभ्य मानवों की तुलना में 'आदिम' या 'हीन' बताया। जनजातीय समुदायों तथा उनकी समृद्ध एवं जटिल संस्कृतियों के गहन अध्ययन के बाद इस प्रकार के पक्षपातपूर्ण विचारों को अधिकांशत: नकार दिया गया है।” ये दोनों शब्द विवरण नहीं थे — ये निर्णय थे, और गलत थे।