अन्वेषण अध्याय 8 आइए पता लगाएँ

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
कक्षा की एक गतिविधि के रूप में अपने घर में उपयोग की जाने वाली भोजन सामग्रियों (अनाज, मसालों आदि) की सूची बनाइए।
उत्तर

कैसे कीजिए। घर में किसी बड़े की अनुमति लेकर रसोई की अलमारी देखिए और जो मिले उसे वर्गों में बाँटकर लिखिए। सूची कक्षा में लाइए, सबकी सूचियाँ साथ रखिए और उन वस्तुओं पर निशान लगाइए जो लगभग हर सूची में हैं — वही ‘एकता’ है।

नमूना उत्तर — एक घर की सूची, अध्याय के ही क्रम में :

वर्गअलमारी में क्या हैक्या लगभग हर भारतीय घर में?
अनाजचावल, गेहूँ का आटा, सूजी, जौहाँ — अध्याय चावल, जौ और गेहूँ का नाम लेता है
मोटे अनाजबाजरा, ज्वार, रागीहाँ — तीनों अध्याय में नामित हैं
दालेंअरहर/तुअर दाल, मूंग दाल, मसूर दाल, चना दाल, उड़द दाल, राजमा, लोबिया, छोलेहाँ — “विभिन्न प्रकार की दालें”
मसालेहल्दी, जीरा, इलायची, अदरक, धनिया, राई, काली मिर्च, लौंग, दालचीनी, मिर्चपहले चार का नाम अध्याय में है — “पूरे देश में” उपयोग होने वाले
तेलमूँगफली का तेल, सरसों का तेल, नारियल तेल, तिल का तेलरोज का तेल कौन-सा हो, यह क्षेत्र के अनुसार बदलता है — पूर्व और उत्तर में सरसों, केरल में नारियल, पश्चिम में मूँगफली, दक्षिण के कुछ भागों में तिल
रोजमर्रा की सब्जियाँप्याज, आलू, टमाटर, बैंगन, भिंडी, लौकी, पालकलगभग हर जगह मिलती हैं, पर पकाने के ढंग बिल्कुल अलग

तुलना से क्या पता चलता है। अनाज, दाल और मसालों के स्तंभ पूरी कक्षा में लगभग एक जैसे निकलेंगे, चाहे सहपाठी अलग-अलग राज्यों से हों। सबसे अधिक अंतर तेलों में और बने-बनाए मसालों में दिखेगा — बंगाली रसोई में पाँच फोरन, तमिल में सांबार पोडी, पंजाबी में गरम मसाला, असमिया में भूत जोलोकिया। आधार एक, अंतिम स्पर्श अलग — यही अध्याय की बात, एक ही अलमारी में।

क्या आप जानते हैं? बाजरा, ज्वार और रागी बहुत कम पानी में और तेज गर्मी में भी उगते हैं, इसीलिए ये हजारों वर्षों से भारत के शुष्क क्षेत्रों का भोजन रहे हैं। भारत के प्रस्ताव पर 2023 को अंतरराष्ट्रीय मिलेट वर्ष के रूप में मनाया गया।
प्र2.
किसी भी एक हरी सब्जी को लीजिए एवं विचार कीजिए कि उससे आप कितने प्रकार के व्यंजन बना सकते हैं?
उत्तर

आलू लीजिए (बटाटा, उरुलैकिळंगु, आलूगड्डे)। एक ही सब्जी, हर बाजार में उपलब्ध — और आप जिस भी दिशा में चलें, वह दूसरा व्यंजन बन जाती है।

व्यंजनजिस क्षेत्र से सर्वाधिक जाना जाता हैउसी आलू के साथ क्या किया जाता है
आलू पराँठापंजाब, हरियाणाउबालकर, मसालों के साथ मसलकर, गेहूँ की लोई में भरकर सेंका जाता है
दम आलूकश्मीरछोटे साबुत आलू तलकर, ढके बर्तन में धीमी आँच पर पकाए जाते हैं
आलू पोस्तोपश्चिम बंगालटुकड़ों में काटकर खसखस के पिसे लेप के साथ पकाया जाता है
बटाटा भाजीमहाराष्ट्रउबालकर राई, कढ़ी पत्ता और हल्दी में छौंका जाता है
आलू चोखाबिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेशभूनकर या उबालकर, कच्ची सरसों के तेल, प्याज और हरी मिर्च के साथ मसला जाता है
उरुलैकिळंगु रोस्टतमिलनाडुछोटे टुकड़ों में काटकर मिर्च के साथ सूखा भूना जाता है
मसाला दोसा की भरावनकर्नाटकप्याज और हल्दी के साथ मसलकर चावल-दाल के दोसे में भरा जाता है
समोसे की भरावनपूरे भारत मेंमटर और मसालों के साथ मोटा मसलकर, मैदे में बंद करके तला जाता है
आलू-गोभी, आलू-मटर, आलू-बैंगन, आलू-मेथीउत्तर भारतदूसरी सब्जी के साथ जोड़कर, हर बार नया व्यंजन

गणना: यही तालिका बारह व्यंजन दे देती है, और कोई भी भारतीय रसोई इनमें दस और जोड़ सकती है। बैंगन के साथ भी यही कीजिए (बैंगन भरता, भरली वांगी, एण्णै कत्तरिक्काय, बेगुन भाजा, बैंगन का सालन) — परिणाम वही आएगा।

एक सब्जी इतना कैसे कर लेती है: आलू ‘एकता’ है; विधि और मसाला ‘विविधता’ है। तेल बदलिए (सरसों, नारियल, घी), मसाला बदलिए और पकाने का ढंग बदलिए (भूनना, उबालना, तलना, भाप देना, धीमी आँच) — वही आलू कश्मीरी, बंगाली या तमिल व्यंजन बन जाता है। अध्याय यही कहता है — “एक ही प्रकार की सामग्री (एकता) से विभिन्न प्रकार के (विविधता) अनगिनत व्यंजन और पकवान बनाए जा सकते हैं।”
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