अन्वेषण अध्याय 8 आइए पता लगाएँ

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
साड़ी का उदाहरण एकता और विविधता को कैसे प्रतिबिंबित करता है, व्याख्या कीजिए (100–150 शब्दों में)।
उत्तर

लिखने से पहले दोनों पक्ष अलग कर लीजिए — अंक इसी से मिलते हैं।

एकता — एक वस्तुविविधता — उसके अनेक रूप
एक ही बिना सिला लंबा कपड़ाकपास, रेशम अथवा आजकल कृत्रिम (सिंथेटिक) धागे से बना
भारत के अधिकांश भागों में पहनी जाती हैबनारसी, कांजीवरम, पैठनी, पाटन पटोला, मूगा, मैसूर — और सूती प्रकार तो और भी अधिक; “सैकड़ों प्रकार”
नाम एक ही — साड़ीबुनाई और डिजाइन की भिन्न विधियाँ; कुछ डिजाइन कपड़े का ही हिस्सा, कुछ बुनाई के बाद छापे गए; रंगों की अनगिनत विविधता
इतिहास कम से कम वैशाली की उकेरी गई आकृति तक, कुछ शताब्दी सा.सं.पू.पहनने के अनेक तरीके, जो क्षेत्र और समुदाय के अनुसार बदलते हैं — और नए तरीके अब भी खोजे जा रहे हैं

नमूना उत्तर (लगभग 130 शब्द):

साड़ी एक ही लंबा सादा कपड़ा है, जिसे बिना सिले ही पहना जाता है और जो भारत के अधिकांश भागों में पहना जाता है — यही उसकी एकता है। शेष सब कुछ बदलता रहता है। वह कपास की हो सकती है, रेशम की, या आजकल कृत्रिम धागे की। बनारसी, कांजीवरम, पैठनी, पाटन पटोला, मूगा और मैसूर तो रेशमी साड़ियों के कुछ ही प्रसिद्ध प्रकार हैं, सूती प्रकार इनसे भी अधिक हैं; इस तरह यह एक ही परिधान सैकड़ों रूपों में मिलता है। ये रूप बुनाई और डिजाइन की भिन्न विधियों से बनते हैं — कुछ डिजाइन कपड़े में ही बुने जाते हैं, कुछ बाद में छापे जाते हैं, और रंग कई प्रकार के रंजकों से आते हैं। पहनने के तरीके एक क्षेत्र से दूसरे और एक समुदाय से दूसरे में भिन्न हैं, और नए तरीके अब भी बन रहे हैं। फिर भी अंततोगत्वा यह एक ही परिधान है — साड़ी।
यह उदाहरण इतना प्रभावी क्यों है: साड़ी को किसी नियम, कारखाने या सत्ता ने एक-सा नहीं बनाया। वाराणसी और कांचीपुरम के बुनकरों ने कभी आपस में डिजाइन तय नहीं किए, और साड़ी कैसे बाँधी जाए यह भी कोई तय नहीं करता। फिर भी एकता बनी रहती है, क्योंकि वह सबसे सरल विचार में है — एक कपड़ा, जैसा है वैसा ही पहन लिया गया। साझा आधार इतना छोटा है, इसीलिए विविधता को इतनी जगह मिल जाती है।
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