प्र1.
अभ्यासं कुर्मः — रिक्तकोष्ठकानि पूरयन्तु (पृष्ठ 9 के नीचे दिए गए सात-सात खाने)।
उत्तर
ये खाली खाने पृष्ठ 8 की उन्हीं दो पंक्तियों को आगे बढ़ाते हैं — ऊपर की बैंगनी पंक्ति अनुस्वार की है (क् + स्वरः + ं) और नीचे की भूरी पंक्ति विसर्ग की (ख् + स्वरः + ः)। ऊपर जो सात स्वर-स्तम्भ दिए हैं — ऋ ॠ ऌ ए ऐ ओ औ — उन्हीं के अनुसार भरिए।
| पङ्क्तिः | ऋ | ॠ | ऌ | ए | ऐ | ओ | औ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| क् + स्वरः + ं | कृं | कॄं | कॢं | कें | कैं | कों | कौं |
| ख् + स्वरः + ः | खृः | खॄः | खॢः | खेः | खैः | खोः | खौः |
पुस्तक की एक असंगति: पृष्ठ 9 पर ‘ऌ’ वाले स्तम्भ में ॡं और ॡः छपा है, जबकि पृष्ठ 1 का नियम कहता है — “॥ ‘ऌ’-वर्णस्य दीर्घाः न सन्ति ॥”। नियम के अनुसार वहाँ ऌं और ऌः ही होना चाहिए। परीक्षा में अपनी पुस्तक का रूप लिखिए और यह नियम भी साथ लिख दीजिए।
अभ्यास का तरीका: हर खाना भरने के बाद उसे ज़ोर से बोलिए — क् + ऋ + ं = ‘कृं’। संस्कृत में लिखना और बोलना साथ-साथ चलता है; इसीलिए पुस्तक का शीर्षक ही है ‘वदामः लिखामः च’ — हम बोलते भी हैं और लिखते भी हैं।