पाणिनीय-शिक्षा के ये सूत्र संस्कृत उच्चारण की सबसे पुरानी और सबसे संक्षिप्त तालिका हैं। हर सूत्र में पहले वर्ण गिनाए जाते हैं, फिर उनका स्थान बता दिया जाता है।
* पुस्तक की टिप्पणी — ‘उपध्मानीयः’ और ‘यमाः’ विशिष्ट अतिरिक्त अयोगवाह-वर्ण हैं; सामान्य संस्कृत भाषा में इनका प्रयोग प्रायः नहीं दिखता।
सूत्र का ढाँचा कैसे पढ़ें: सूत्र का नाम ही वर्णों की सूची है। जैसे अ-कु-ह-विसर्जनीयाः = ‘अ’ (अ आ) + ‘कु’ (कवर्ग — क ख ग घ ङ) + ‘ह’ + ‘विसर्जनीय’ (विसर्ग) — और अन्त में ‘कण्ठ्याः’ यानी ये सब गले से बोले जाते हैं। इसी तरह इ-चु-य-शाः = इ + चवर्ग + य + श। ‘कु’, ‘चु’, ‘टु’, ‘तु’, ‘पु’ — इन छोटे रूपों से पूरे वर्ग का बोध होता है; यह पाणिनि की संक्षेप-कला है।
करने योग्य परियोजना: एक चार्ट-पेपर पर सिर का चित्र बनाइए, उसमें छह स्थान (कण्ठ, तालु, मूर्धा, दन्त, ओष्ठ, नासिका) दिखाइए और हर स्थान के पास उससे बोले जाने वाले वर्ण तथा उसका पाणिनीय सूत्र लिख दीजिए। कक्षा की दीवार पर लगाने के लिए यह सबसे अच्छा परियोजना-कार्य है।