दीपकम् अध्याय 2 संयुक्त-व्यञ्जनानि के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन 2026-09-05
इस अध्याय के बारे में
पाठ की पहली बात — द्वयोः बहूनां वा व्यञ्जन-वर्णानां मेलनेन संयुक्त-व्यञ्जनानि भवन्ति। जब एक व्यञ्जन अपना स्वर छोड़कर (हलन्त के साथ) दूसरे व्यञ्जन से जुड़ता है, तब संयुक्त-व्यञ्जन बनता है — क् + ष = क्ष , त् + र = त्र , ज् + ञ = ज्ञ , द् + य = द्य । ये नए वर्ण नहीं हैं। पुस्तक की टिप्पणी स्पष्ट कहती है — “एतानि संयुक्त-व्यञ्जनानि नवीनाः वर्णाः न सन्ति, अपितु … विशिष्टा लेखन-शैली एव।” और “एतैः सह आगतः स्वरः संयुक्त-व्यञ्जनेषु अन्तर्भूतः नास्ति।” — यानी ‘क्ष’ में सुनाई देने वाला ‘अ’ जोड़े का हिस्सा नहीं, अलग वर्ण है। वर्ण-वियोगः (पृष्ठ 26–28) — पद को उसके वर्णों में तोड़ना: अजः = अ + ज् + अ + ः। हर व्यञ्जन हलन्त के साथ, हर मात्रा पूरा स्वर बनकर, और अनुस्वार (ं) तथा विसर्ग (ः) अलग वर्ण गिनकर लिखे जाते हैं। छिपे हुए ‘अ’ को गिनना ही इस अभ्यास की असली परीक्षा है। जोड़ दो से पाँच व्यञ्जनों तक होता
अभ्यास
- संयुक्त-व्यञ्जनानि
- वर्ण-वियोगः
- वर्ण-वियोगः
- वर्ण-वियोगः
- वर्ण-संयोगः
- वयं शब्दार्थान् जानीमः
- परियोजनाकार्यम्