कक्षा ६ संस्कृत अध्याय 2 संयुक्त-व्यञ्जनानि के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन 2026-09-19
इस अध्याय के बारे में
पाठ की पहली बात — द्वयोः बहूनां वा व्यञ्जन-वर्णानां मेलनेन संयुक्त-व्यञ्जनानि भवन्ति। जब एक व्यञ्जन अपना स्वर छोड़कर (हलन्त के साथ) दूसरे व्यञ्जन से जुड़ता है, तब संयुक्त-व्यञ्जन बनता है — क् + ष = क्ष , त् + र = त्र , ज् + ञ = ज्ञ , द् + य = द्य । ये नए वर्ण नहीं हैं। पुस्तक की टिप्पणी स्पष्ट कहती है — “एतानि संयुक्त-व्यञ्जनानि नवीनाः वर्णाः न सन्ति, अपितु … विशिष्टा लेखन-शैली एव।” और “एतैः सह आगतः स्वरः संयुक्त-व्यञ्जनेषु अन्तर्भूतः नास्ति।” — यानी ‘क्ष’ में सुनाई देने वाला ‘अ’ जोड़े का हिस्सा नहीं, अलग वर्ण है। वर्ण-वियोगः (पृष्ठ 26–28) — पद को उसके वर्णों में तोड़ना: अजः = अ + ज् + अ + ः। हर व्यञ्जन हलन्त के साथ, हर मात्रा पूरा स्वर बनकर, और अनुस्वार (ं) तथा विसर्ग (ः) अलग वर्ण गिनकर लिखे जाते हैं। छिपे हुए ‘अ’ को गिनना ही इस अभ्यास की असली परीक्षा है। जोड़ दो से पाँच व्यञ्जनों तक होता
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| शब्दः | अर्थः (संस्कृतम्) | हिन्दी अर्थ | संयुक्त-व्यञ्जनम् |
|---|---|---|---|
| अर्णवः | समुद्रः | सागर | र् + ण = र्ण |
| उष्ट्रः | क्रमेलकः | ऊँट | ष् + ट् + र = ष्ट्र |
| वज्रम् | इन्द्रस्य आयुधम् / हीरकम् | इन्द्र का शस्त्र / हीरा | ज् + र = ज्र |
| द्रष्टा | यः पश्यति | देखने वाला | द् + र = द्र |
| जाह्नवी | जह्नोः ऋषेः पुत्री – गङ्गा | जह्नु ऋषि की पुत्री – गङ्गा | ह् + न = ह्न |
| सप्तर्षिः | सप्तानाम् ऋषीणां समूहः | सात महान् ऋषियों का समूह | र् + ष = र्ष |
| सन्धिः | द्वयोः वर्णयोः मेलनम् | दो वर्णों का मेल | न् + ध = न्ध |
| कस्मिँश्चिद् | कुत्रचिद् | कहीं पर / किसी में | स् + म = स्म, श् + च = श्च |
| प्रातःकालः | प्रभात-वेला | सुबह का समय | ः + क = ःक |
| मत्स्यः | मीनः | मछली | त् + स् + य = त्स्य |
| धार्ष्ट्यम् | धृष्टता | ढिठाई | र् + ष् + ट् + य = र्ष्ट्य |
| कार्त्स्न्यम् | सम्पूर्णता | सम्पूर्णता | र् + त् + स् + न् + य = र्त्स्न्य |
| सङ्गणकम् | सङ्गणक-यन्त्रम् | सङ्गणक (Computer) | ङ् + ग = ङ्ग |
अभ्यास
- संयुक्त-व्यञ्जनानि
- वर्ण-वियोगः
- वर्ण-वियोगः
- वर्ण-वियोगः
- वर्ण-संयोगः
- वयं शब्दार्थान् जानीमः
- परियोजनाकार्यम्