प्र1.
प्रथम-पाठद्वयं विहाय अस्मिन् पुस्तके आगतानां दशानां संयुक्त-व्यञ्जन-पदानां संग्रहणं कुर्वन्तु । तेषां वर्ण-वियोगम् अपि कुर्वन्तु । यथा — वृक्षः (तृतीय-पाठे) = व् + ऋ + क् + ष् + अ + ः ; वैद्या (तृतीय-पाठे) = व् + ऐ + द् + य् + आ ।
उत्तर
यह अपनी पुस्तक में खोजकर करने वाला काम है, इसलिए हर विद्यार्थी की सूची थोड़ी अलग होगी। पुस्तक ने दो उदाहरण दे दिए हैं — वृक्षः और वैद्या — आपको ऐसे दस पद और जुटाने हैं, पहले दो पाठों को छोड़कर।
करने का ढंग —
- तीसरे पाठ से आगे के पन्ने पलटिए और जहाँ भी कोई अक्षर दो मंज़िल का दिखे (ऊपर-नीचे या आगे-पीछे जुड़ा हुआ), उस पद पर निशान लगाइए।
- कॉपी में चार खाने बनाइए — पदम् / पाठः / वर्ण-वियोगः / संयुक्त-व्यञ्जनम्।
- वर्ण-वियोग करते समय हर व्यञ्जन हलन्त के साथ और हर मात्रा को पूरा स्वर बनाकर लिखिए।
- अन्त में यह भी लिख दीजिए कि उस पद में कौन-कौन से व्यञ्जन जुड़े — जैसे क् + ष = क्ष।
नमूना उत्तर (अपनी पुस्तक से पाठ-सङ्ख्या स्वयं मिलाइए):
| क्रमः | पदम् | वर्ण-वियोगः | संयुक्त-व्यञ्जनम् | अर्थः |
|---|---|---|---|---|
| — | वृक्षः | व् + ऋ + क् + ष् + अ + ः | क् + ष = क्ष | पेड़ (पुस्तके दत्तम्) |
| — | वैद्या | व् + ऐ + द् + य् + आ | द् + य = द्य | वैद्या (पुस्तके दत्तम्) |
| 1 | पुष्पम् | प् + उ + ष् + प् + अ + म् | ष् + प = ष्प | फूल |
| 2 | मित्रम् | म् + इ + त् + र् + अ + म् | त् + र = त्र | मित्र |
| 3 | विद्यालयः | व् + इ + द् + य् + आ + ल् + अ + य् + अ + ः | द् + य = द्य | विद्यालय |
| 4 | छात्रः | छ् + आ + त् + र् + अ + ः | त् + र = त्र | विद्यार्थी |
| 5 | शिक्षकः | श् + इ + क् + ष् + अ + क् + अ + ः | क् + ष = क्ष | अध्यापक |
| 6 | पुस्तकम् | प् + उ + स् + त् + अ + क् + अ + म् | स् + त = स्त | पुस्तक |
| 7 | सूर्यः | स् + ऊ + र् + य् + अ + ः | र् + य = र्य | सूर्य |
| 8 | चन्द्रः | च् + अ + न् + द् + र् + अ + ः | न् + द् + र = न्द्र | चन्द्रमा |
| 9 | पर्वतः | प् + अ + र् + व् + अ + त् + अ + ः | र् + व = र्व | पहाड़ |
| 10 | गच्छति | ग् + अ + च् + छ् + अ + त् + इ | च् + छ = च्छ | जाता है |
अच्छे उत्तर में यह ज़रूर हो: (1) दसों पद तीसरे पाठ या उसके बाद के हों — पहले दो पाठों के नहीं; (2) हर पद के आगे पाठ-सङ्ख्या लिखी हो, जैसे पुस्तक ने ‘(तृतीय-पाठे)’ लिखा है; (3) कम-से-कम दो पद ऐसे हों जिनमें तीन व्यञ्जन जुड़े हों (जैसे चन्द्रः, राष्ट्रम्); (4) वर्ण-वियोग में हर छिपा हुआ ‘अ’ भी गिना गया हो।
आगे बढ़कर कीजिए: एक चार्ट-पेपर पर बीच में बड़े अक्षरों में क्ष, त्र, ज्ञ, द्य, न्द्र, ष्ट्र लिखिए और हर एक के चारों ओर उससे बने पद तथा उनके चित्र चिपकाइए। यह कक्षा की दीवार के लिए सबसे अच्छा परियोजना-कार्य बनेगा।