दीपकम् अध्याय 1 वयम् अभ्यासं कुर्मः

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
कस्य चित्रम् ? वदन्तु लिखन्तु च — (प्रथमं चित्रम् — गणेशः)
उत्तर

पृष्ठ 11 पर दस चित्र दो स्तम्भों में हैं। पहला उत्तर पुस्तक ने दे दिया है — गणेशः। शेष इस प्रकार हैं —

क्रमःचित्रम्उत्तरम् (संस्कृतम्)हिन्दी
1 (वामे)गणेश जीगणेशःगणेश (दिया हुआ)
2 (दक्षिणे)नाकनासिकानाक (‘घ्राणम्’ भी कह सकते हैं)
3 (वामे)कबूतरकपोतःकबूतर (‘पारावतः’ भी शुद्ध है)
4 (दक्षिणे)भारत का मानचित्रभारतम्भारत (‘भारतस्य मानचित्रम्’)
5 (वामे)धनुष-बाण धारण किए श्रीरामरामःराम (‘श्रीरामः’)
6 (दक्षिणे)डमरूडमरुःडमरू
7 (वामे)हिरनमृगःहिरन (‘हरिणः’ भी शुद्ध है)
8 (दक्षिणे)चम्मचचमसःचम्मच (‘दर्वी’ भी कह सकते हैं)
9 (वामे)अग्नि में आहुति देता हाथहवनम्हवन (‘यज्ञः’ भी शुद्ध है)
10 (दक्षिणे)पैरपादःपैर (‘चरणः’ भी शुद्ध है)

पूरे वाक्य में उत्तर देना हो तो —

इदं गणेशस्य चित्रम्। (यह गणेश जी का चित्र है।)
इदं कपोतस्य चित्रम्। (यह कबूतर का चित्र है।)
इदं मृगस्य चित्रम्। (यह हिरन का चित्र है।)
व्याकरण की बात: प्रश्न है ‘कस्य चित्रम्?’ — ‘कस्य’ षष्ठी विभक्ति, एकवचन, पुंलिङ्ग है (‘किम्’ का रूप), अर्थ — ‘किसका’। इसीलिए उत्तर भी षष्ठी में देना ठीक रहता है — ‘गणेशस्य’, ‘कपोतस्य’। यदि केवल नाम बताना हो तो प्रथमा विभक्ति में ‘गणेशः’, ‘कपोतः’ लिख देना भी पर्याप्त है, और पुस्तक ने वैसा ही किया है।
ध्यान दीजिए: ‘नासिका’ और ‘जिह्वा’ स्त्रीलिङ्ग हैं, ‘भारतम्’ और ‘हवनम्’ नपुंसकलिङ्ग, तथा ‘कपोतः, रामः, डमरुः, मृगः, चमसः, पादः’ पुंलिङ्ग। लिङ्ग याद रखने से आगे विभक्ति के रूप बनाने में आसानी होगी।
प्र2.
चित्रं पश्यन्तु । पट्टिकातः समुचितान् वर्णसमूहान् चित्वा रिक्तस्थानानि पूरयन्तु — पट्टिका : क्का, त्रि, ण्डः, ञ्चुः, क्षः, ङ्क, ङ्खः, न्ताः, न्द्रः, ष्ट (प…जम् = पङ्कजम्)
उत्तर

पट्टिका के दसों वर्णसमूह ठीक दस रिक्त स्थानों में बैठते हैं। पहला उत्तर पुस्तक ने दिया है — प + ङ्क + जम् = पङ्कजम्

चित्रम्रिक्तस्थानम्पट्टिकातः वर्णसमूहःपूर्णं पदम्हिन्दी
कमलप……जम्ङ्कपङ्कजम्कमल (जो कीचड़ से जन्मे)
रात के आकाश में चाँदच………न्द्रःचन्द्रःचन्द्रमा
हाथी की सूँड़शु………ण्डःशुण्डःसूँड़
पेड़वृ………क्षःवृक्षःपेड़
दाँतों वाला मुखद………न्ताःदन्ताःदाँत (बहुवचन)
चिड़िया की चोंचच………ञ्चुःचञ्चुःचोंच
त्रिशूल………शूलम्त्रित्रिशूलम्त्रिशूल
देवनागरी अङ्क ‘८’अ………ष्टअष्टआठ (‘अष्टौ’ भी)
ढोल/डमरूढ………क्काढक्काढोल, एक वाद्य
शङ्खश………ङ्खःशङ्खःशङ्ख
ये सब संयुक्त-व्यञ्जन हैं। जब एक व्यञ्जन बिना स्वर के दूसरे व्यञ्जन से जुड़ता है तो संयुक्ताक्षर बनता है — ङ् + क = ङ्क, न् + द् + र = न्द्र, क् + ष = क्ष, ष् + ट = ष्ट। ध्यान दीजिए कि हर वर्ग का पञ्चम वर्ण (ङ ञ ण न म) अपने ही वर्ग के वर्ण से जुड़ता है — ङ्+क (पङ्कजम्), ञ्+च (चञ्चुः), ण्+ड (शुण्डः), न्+त (दन्ताः)। यही स्पर्श-वर्णों के पाँच वर्गों का व्यावहारिक उपयोग है।
शब्दार्थ: ‘पङ्कजम्’ = पङ्के (कीचड़ में) जायते इति पङ्कजम् — जो कीचड़ में उत्पन्न हो, अर्थात् कमल। ऐसे शब्द को यौगिक शब्द कहते हैं, क्योंकि इसका अर्थ इसके अवयवों से ही निकल आता है।
प्र3.
प्रथम-वर्णेन पदं वदन्तु लिखन्तु च — अ : अग्निः, अस्त्रम् ; न : नदी, नौका ; क, म, च, ह, प, त, र, व, इ, श
उत्तर

हर वर्ण से आरम्भ होने वाले दो-दो शुद्ध संस्कृत पद —

वर्णःप्रथमं पदम्द्वितीयं पदम्हिन्दी अर्थ
अग्निःअस्त्रम्आग / हथियार (दिया हुआ)
कमलम्कपोतःकमल / कबूतर
चन्द्रःचटकःचन्द्रमा / गौरैया
पुस्तकम्पर्वतःपुस्तक / पहाड़
रथःरविःरथ / सूर्य
इन्द्रःइक्षुःइन्द्र / गन्ना
नदीनौकानदी / नाव (दिया हुआ)
मयूरःमित्रम्मोर / मित्र
हस्तःहरिणःहाथ / हिरन
तरुःतडागःपेड़ / तालाब
वृक्षःवानरःपेड़ / बन्दर
शङ्खःशिशुःशङ्ख / बच्चा
और भी विकल्प: क — कुक्कुटः, कन्दुकम्; च — चमसः, चषकः; प — पङ्कजम्, पितामहः; र — रामः, राजा; इ — इदम्, इति; म — मृगः, माता; ह — हवनम्, हिमालयः; त — तिलः, त्रिशूलम्; व — वधूः, वस्त्रम्; श — शुकः, शीतम्।
यह अभ्यास क्यों: इससे दो चीज़ें एक साथ सधती हैं — वर्ण की पहचान और शब्द-भण्डार। पद लिखते समय अन्त का चिह्न भी देखिए — पुंलिङ्ग में प्रायः ‘…ः’ (अग्निः, कपोतः), नपुंसकलिङ्ग में ‘…म्’ (अस्त्रम्, कमलम्) और स्त्रीलिङ्ग में ‘…आ/ई’ (नदी, नौका)।
प्र4.
स्व-परिवारस्य सदस्यानां पूर्ण-नामानि लिखन्तु — (उपाधिः / प्रथम-नाम / मध्य-नाम* / अन्त्य-नाम-कुल-नाम**) । * मध्य-नाम अस्ति चेद् पूर्णं नाम लिखन्तु । नास्ति चेद् रिक्तं त्यजन्तु । ** केवलं प्रथमवर्णं (Initial) न लिखन्तु । पूर्णं नाम लिखन्तु ।
उत्तर

यह अपने घर के बारे में भरने वाली तालिका है, इसलिए इसका उत्तर हर विद्यार्थी का अलग होगा। पुस्तक ने ‘उपाधिः’ का स्तम्भ पहले ही भर दिया है — माता/पितामही/मातामही के लिए श्रीमती, पिता/भ्राता/पितामहः/मातामहः के लिए श्रीमान् और भगिनी के लिए सुश्रीः

भरने का ढंग:

  • नाम देवनागरी लिपि में लिखिए और संस्कृत रूप देने के लिए पुंलिङ्ग नामों के अन्त में प्रायः ‘ः’ लगाइए — जैसे ‘रमेश’ → रमेशः
  • मध्य-नाम हो तभी लिखिए; न हो तो खाना खाली छोड़ दीजिए (पुस्तक की टिप्पणी*)।
  • अन्त्य-नाम केवल पहला अक्षर (Initial) न लिखिए — पूरा लिखिए (टिप्पणी**)।
नमूना उत्तरम् (केवल दिखाने के लिए; अपने घर के असली नाम भरिए):
सम्बन्धःउपाधिःप्रथम-नाममध्य-नामअन्त्य-नाम / कुल-नाम
माताश्रीमतीसुनीताशर्मा
पिताश्रीमान्रमेशःकुमारःशर्मा
भगिनीसुश्रीःअनन्याशर्मा
भ्राताश्रीमान्अनिरुद्धःशर्मा
पितामहीश्रीमतीकमलाशर्मा
पितामहःश्रीमान्हरिशंकरःशर्मा
मातामहीश्रीमतीसरोजामिश्रा
मातामहःश्रीमान्गोविन्दःप्रसादःमिश्रा
शब्दों का अर्थ फिर से: पितामहः = पितुः पिता (दादा), पितामही = पितुः माता (दादी), मातामहः = मातुः पिता (नाना), मातामही = मातुः माता (नानी), भगिनी = स्वसा (बहन), भ्राता = अग्रजः/अनुजः (बड़ा/छोटा भाई)। ‘उपाधिः’ का अर्थ है आदर-सूचक पद — Title।
प्र5.
कक्षायाः शिक्षिकाणां शिक्षकाणां च पूर्ण-नामानि लिखन्तु — (उपाधिः / प्रथम-नाम / मध्यम-नाम / अन्त्य-नाम)
उत्तर

यह भी अपनी कक्षा के अनुसार भरने वाली तालिका है। कक्षा-शिक्षिका से पूछकर या समय-सारणी (Time Table) देखकर हर विषय के शिक्षक-शिक्षिका का पूरा नाम लिखिए।

अच्छे उत्तर में यह ज़रूर हो —

  • शिक्षिका के लिए उपाधि श्रीमती अथवा सुश्रीः, शिक्षक के लिए श्रीमान्; डॉक्टरेट हो तो डॉ. (आचार्यः/आचार्या)।
  • नाम देवनागरी में, और पूरा — केवल Initial नहीं।
  • चाहें तो एक स्तम्भ और जोड़ लीजिए — ‘विषयः’ (संस्कृतम्, गणितम्, विज्ञानम्, आङ्ग्लभाषा, हिन्दी, समाजविज्ञानम्)।
नमूना उत्तरम्:
उपाधिःप्रथम-नाममध्यम-नामअन्त्य-नामविषयः
श्रीमतीमीरादेशपाण्डेसंस्कृतम्
श्रीमान्अजयःकुमारःवर्मागणितम्
सुश्रीःफ़ातिमाख़ानआङ्ग्लभाषा
श्रीमान्वेङ्कटःअय्यरविज्ञानम्
संस्कृत में परिचय देना भी सीखिए: “मम संस्कृत-शिक्षिका श्रीमती मीरा देशपाण्डे अस्ति।” / “मम गणित-शिक्षकः श्रीमान् अजयः वर्मा अस्ति।”
प्र6.
मित्राणां पूर्ण-नामानि लिखन्तु — (प्रथम-नाम / मध्यम-नाम / अन्त्य-नाम)
उत्तर

अपने मित्रों से स्वयं पूछकर तालिका भरिए। ध्यान रहे कि यहाँ ‘उपाधिः’ का स्तम्भ नहीं है — मित्रों के नाम के आगे श्रीमान्/श्रीमती नहीं लगाया जाता।

करने का ढंग: कक्षा में एक-दूसरे से संस्कृत में पूछिए — “भवतः/भवत्याः नाम किम्?” उत्तर मिलेगा — “मम नाम … अस्ति।” फिर वही नाम तीन स्तम्भों में बाँटकर लिखिए।

नमूना उत्तरम्:
प्रथम-नाममध्यम-नामअन्त्य-नाम
रोहितःपाटील
साराबानोअंसारी
तेजस्वीनायर
हरप्रीतःसिंहःबेदी
इशानःबरुआ
प्रश्नों 4, 5, 6 का एक ही उद्देश्य है: जो वर्ण अभी सीखे, उन्हीं से अपने आस-पास के असली नाम देवनागरी में लिखना। नाम लिखते समय ध्यान दीजिए कि किन नामों में संयुक्ताक्षर आते हैं (हरप्रीतः, तेस्वी) और किनमें अनुस्वार या विसर्ग (सिंः, रोहित)।
क्या यह उपयोगी रहा? त्रुटि बताएँ