प्र1.
अत्र स्थूलाक्षरैः लिखितानि पदानि पश्यन्तु । एतानि क्रियापदानि लोट्लकारे आज्ञा / प्रार्थना इति अर्थयोः सन्ति । लोट्लकारः क्रियायाः भावसूचकः (Mood) भवति । — अस्य नियमस्य हिन्दी-अनुवादं व्याख्यां च कुर्वन्तु ।
उत्तर
पुस्तक का यह छोटा-सा पैरा ही पूरे पाठ की व्याकरण-कुंजी है।
| संस्कृतम् | हिन्दी अनुवादः |
|---|---|
| अत्र स्थूलाक्षरैः लिखितानि पदानि पश्यन्तु । | यहाँ मोटे अक्षरों में लिखे हुए पदों को देखिए। |
| एतानि क्रियापदानि लोट्लकारे आज्ञा / प्रार्थना इति अर्थयोः सन्ति । | ये क्रियापद लोट्लकार में हैं और ‘आज्ञा’ तथा ‘प्रार्थना’ — इन दो अर्थों में प्रयुक्त हैं। |
| लोट्लकारः क्रियायाः भावसूचकः (Mood) भवति । | लोट्लकार क्रिया के ‘भाव’ (Mood) का सूचक होता है। |
| तस्य रूपाणि पश्यन्तु — | उसके (लोट्लकार के) रूप देखिए — |
‘लकार’ और ‘भाव’ का अन्तर: लट्, लृट्, लङ् आदि लकार काल बताते हैं (वर्तमान, भविष्य, भूत)। पर लोट्लकार काल नहीं, भाव बताता है — बोलने वाला क्या चाहता है। इसीलिए अंग्रेज़ी में इसे Mood कहा गया है, Tense नहीं। एक ही रूप ‘गच्छतु’ का अर्थ स्थिति के अनुसार बदल जाता है —
• आज्ञा : ‘बालक ! गृहं गच्छ ।’ (जाओ!)
• प्रार्थना : ‘हे ईश ! सुखं देहि ।’ (दीजिए)
• अनुमति : ‘भवान् उपविशतु ।’ (बैठिए)
• संकल्प/प्रश्न : ‘अहं पठानि ?’ (मैं पढ़ूँ?)
• आज्ञा : ‘बालक ! गृहं गच्छ ।’ (जाओ!)
• प्रार्थना : ‘हे ईश ! सुखं देहि ।’ (दीजिए)
• अनुमति : ‘भवान् उपविशतु ।’ (बैठिए)
• संकल्प/प्रश्न : ‘अहं पठानि ?’ (मैं पढ़ूँ?)
Tip: लोट्लकार में ‘मा’ लगाकर निषेध बनता है — ‘मा कुरु’ (मत करो), ‘मा वद’ (मत बोलो), ‘यानं मा स्थापय’ (गाड़ी मत खड़ी करो)। संस्कृत में निषेध के लिए ‘न’ नहीं, प्रायः मा आता है।