दीपकम् अध्याय 12 अवधेयांशः

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
अत्र स्थूलाक्षरैः लिखितानि पदानि पश्यन्तु । एतानि क्रियापदानि लोट्लकारे आज्ञा / प्रार्थना इति अर्थयोः सन्ति । लोट्लकारः क्रियायाः भावसूचकः (Mood) भवति । — अस्य नियमस्य हिन्दी-अनुवादं व्याख्यां च कुर्वन्तु ।
उत्तर

पुस्तक का यह छोटा-सा पैरा ही पूरे पाठ की व्याकरण-कुंजी है।

संस्कृतम्हिन्दी अनुवादः
अत्र स्थूलाक्षरैः लिखितानि पदानि पश्यन्तु ।यहाँ मोटे अक्षरों में लिखे हुए पदों को देखिए।
एतानि क्रियापदानि लोट्लकारे आज्ञा / प्रार्थना इति अर्थयोः सन्ति ।ये क्रियापद लोट्लकार में हैं और ‘आज्ञा’ तथा ‘प्रार्थना’ — इन दो अर्थों में प्रयुक्त हैं।
लोट्लकारः क्रियायाः भावसूचकः (Mood) भवति ।लोट्लकार क्रिया के ‘भाव’ (Mood) का सूचक होता है।
तस्य रूपाणि पश्यन्तु —उसके (लोट्लकार के) रूप देखिए —
‘लकार’ और ‘भाव’ का अन्तर: लट्, लृट्, लङ् आदि लकार काल बताते हैं (वर्तमान, भविष्य, भूत)। पर लोट्लकार काल नहीं, भाव बताता है — बोलने वाला क्या चाहता है। इसीलिए अंग्रेज़ी में इसे Mood कहा गया है, Tense नहीं। एक ही रूप ‘गच्छतु’ का अर्थ स्थिति के अनुसार बदल जाता है —
• आज्ञा : ‘बालक ! गृहं गच्छ ।’ (जाओ!)
• प्रार्थना : ‘हे ईश ! सुखं देहि ।’ (दीजिए)
• अनुमति : ‘भवान् उपविशतु ।’ (बैठिए)
• संकल्प/प्रश्न : ‘अहं पठानि ?’ (मैं पढ़ूँ?)
Tip: लोट्लकार में ‘मा’ लगाकर निषेध बनता है — ‘मा कुरु’ (मत करो), ‘मा वद’ (मत बोलो), ‘यानं मा स्थापय’ (गाड़ी मत खड़ी करो)। संस्कृत में निषेध के लिए ‘न’ नहीं, प्रायः मा आता है।
प्र2.
तस्य रूपाणि पश्यन्तु — पठ् - धातुः (लोट्लकारः) : प्रथमपुरुषः — पठतु, पठताम्, पठन्तु; मध्यमपुरुषः — पठ, पठतम्, पठत; उत्तमपुरुषः — पठानि, पठाव, पठाम । एतां तालिकां स्मरन्तु, अन्येषां धातूनाम् अपि रूपाणि रचयन्तु ।
उत्तर

यह नौ खानों की तालिका पूरे पाठ की रीढ़ है — इसे कण्ठस्थ कर लीजिए।

पठ् - धातुः (लोट्लकारः)एकवचनम्द्विवचनम्बहुवचनम्
प्रथमपुरुषः (सः / तौ / ते)पठतुपठताम्पठन्तु
मध्यमपुरुषः (त्वम् / युवाम् / यूयम्)पठपठतम्पठत
उत्तमपुरुषः (अहम् / आवाम् / वयम्)पठानिपठावपठाम

अब वही साँचा तीन और धातुओं पर —

धातुःप्रथमपुरुषः (ए./द्वि./बहु.)मध्यमपुरुषः (ए./द्वि./बहु.)उत्तमपुरुषः (ए./द्वि./बहु.)
लिख्लिखतु, लिखताम्, लिखन्तुलिख, लिखतम्, लिखतलिखानि, लिखाव, लिखाम
क्रीड्क्रीडतु, क्रीडताम्, क्रीडन्तुक्रीड, क्रीडतम्, क्रीडतक्रीडानि, क्रीडाव, क्रीडाम
गम् (गच्छ्)गच्छतु, गच्छताम्, गच्छन्तुगच्छ, गच्छतम्, गच्छतगच्छानि, गच्छाव, गच्छाम
बनाने की विधि (पृष्ठ 129 की चिह्न-तालिका से): लट्लकार का जो अङ्ग है (पठ्, लिख्, क्रीड्, गच्छ्), उसी में ये प्रत्यय जोड़ दीजिए —
प्रथमपुरुषः : अतु, अताम्, अन्तु
मध्यमपुरुषः : अ, अतम्, अत
उत्तमपुरुषः : आनि, आव, आम
ध्यान दीजिए — मध्यमपुरुष एकवचन में कोई प्रत्यय जुड़ता ही नहीं, धातु का अङ्ग जैसा है वैसा ही रह जाता है (पठ, लिख, गच्छ)।
Check it yourself: लट् और लोट् की तुलना कीजिए — पठति → पठतु, पठतः → पठताम्, पठन्ति → पठन्तु; पठसि → पठ, पठथः → पठतम्, पठथ → पठत; पठामि → पठानि, पठावः → पठाव, पठामः → पठाम। हर खाना ठीक अपने सामने वाले खाने से बना है।
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