दीपकम् अध्याय 12 द्वादशः पाठः

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
राकेशः — महोदय ! कृपया एतां नामावलीं पश्यतु, वस्तूनि च ददातु । आपणिकः — पश्यामि । … आपणिकः — पुनरपि आगच्छतु । — अस्य संवादस्य हिन्दी-अनुवादं कुर्वन्तु ।
उत्तर

दूसरा दृश्य दुकान का है। राकेश सूची देता है, दुकानदार सामान तौलकर थैले में रखता है, और हिसाब होता है।

संस्कृतम् (मूल संवादः)हिन्दी अनुवादः
राकेशः — महोदय ! कृपया एतां नामावलीं पश्यतु, वस्तूनि च ददातुराकेश — महोदय! कृपया यह सूची देखिए और सामान दीजिए।
आपणिकः — पश्यामि ।दुकानदार — देखता हूँ।
मुद्गः — अर्धकिलोमितः । शर्करा — एककिलोमिता । गुडः — एककिलोमितः । द्विदलम् — एककिलोमितम् । सर्षपः — पादकिलोमितः ।मूँग — आधा किलो। चीनी — एक किलो। गुड़ — एक किलो। दाल — एक किलो। सरसों — पाव (चौथाई) किलो।
सर्वं सिद्धम् अस्ति । स्यूतं ददातु, तत्र स्थापयामि ।सब तैयार है। थैला दीजिए, उसमें रख देता हूँ।
राकेशः — अस्तु, कति रूप्यकाणि यच्छानि ?राकेश — ठीक है, कितने रुपये दूँ?
आपणिकः — चत्वारि शतानि षष्टिं (४६०) च रूप्यकाणि ददातु ।दुकानदार — चार सौ साठ (४६०) रुपये दीजिए।
राकेशः — महोदय ! नीलवर्णा लेखनी अस्ति किम् ?राकेश — महोदय! नीले रंग की कलम है क्या?
आपणिकः — आम्, अस्ति ।दुकानदार — हाँ, है।
राकेशः — एकं चाकलेहम् एकां लेखनीं च ददातु । तस्य मूल्यम् अपि योजयतुराकेश — एक चॉकलेट और एक कलम दीजिए। उसका मूल्य भी (हिसाब में) जोड़ दीजिए।
आपणिकः — अस्तु । लेखन्याः विंशतिं रूप्यकाणि चाकलेहस्य दश रूप्यकाणि च योजयामि । आहत्य नवत्यधिकानि चत्वारि शतानि (४९०) रूप्यकाणि ददातु ।दुकानदार — ठीक है। कलम के बीस रुपये और चॉकलेट के दस रुपये जोड़ता हूँ। कुल मिलाकर चार सौ नब्बे (४९०) रुपये दीजिए।
राकेशः — आम् , पञ्च शतानि (५००) रुप्यकाणि सन्ति । स्वीकरोतु, अवशिष्टं च ददातु ।राकेश — हाँ, (मेरे पास) पाँच सौ (५००) रुपये हैं। लीजिए, और बाकी (पैसे) दे दीजिए।
आपणिकः — सर्वं स्यूते स्थापितम् अस्ति । दश (१०) रुप्यकाणि अवशिष्टानि, स्वीकरोतु ।दुकानदार — सब कुछ थैले में रख दिया गया है। दस (१०) रुपये बाकी हैं, ले लीजिए।
राकेशः — अस्तु । धन्यवादः ।राकेश — ठीक है। धन्यवाद।
आपणिकः — पुनरपि आगच्छतुदुकानदार — फिर आइएगा।
‘किलोमित’ शब्द लिङ्ग बदलता है: ‘किलोमित’ विशेषण है, इसलिए वह अपने विशेष्य के लिङ्ग के अनुसार रूप बदलता है — मुद्गः (पुंलिङ्ग) → अर्धकिलोमित, शर्करा (स्त्रीलिङ्ग) → एककिलोमित, द्विदलम् (नपुंसकलिङ्ग) → एककिलोमितम्। यही संस्कृत का नियम है — विशेषणं विशेष्यानुसारि
Tip — तौल के तीन शब्द: अर्धकिलोमितः = आधा किलो, पादकिलोमितः = पाव (चौथाई) किलो, एककिलोमितः = एक किलो। ‘पाद’ का अर्थ यहाँ ‘चौथाई’ है — जैसे ‘पादोन’ = पौन।
प्र2.
संवादस्य आधारेण गणयन्तु — राकेशः किं किं क्रीतवान् ? तस्य कुल-मूल्यं कियत् ? कियत् धनम् अवशिष्टम् ?
उत्तर

पूरा हिसाब पाठ में ही है — बस उसे जोड़-घटाकर देख लीजिए।

वस्तुपरिमाणम्हिन्दी
मुद्गःअर्धकिलोमितःमूँग — ½ किलो
शर्कराएककिलोमिताचीनी — 1 किलो
गुडःएककिलोमितःगुड़ — 1 किलो
द्विदलम्एककिलोमितम्दाल — 1 किलो
सर्षपःपादकिलोमितःसरसों — ¼ किलो
लेखनी (नीलवर्णा)एकानीली कलम — 1
चाकलेहःएकःचॉकलेट — 1
नामावल्याः वस्तूनां मूल्यम् = ४६० रूप्यकाणि
लेखन्याः मूल्यम् = २० रूप्यकाणि
चाकलेहस्य मूल्यम् = १० रूप्यकाणि
आहत्य (कुल मूल्य) = ४६० + २० + १० = ४९० रूप्यकाणि
राकेशेन दत्तं धनम् = ५०० रूप्यकाणि
अवशिष्टम् = ५०० − ४९० = १० रूप्यकाणि
पाठ से मिलान कर लीजिए: दुकानदार स्वयं कहता है — ‘आहत्य नवत्यधिकानि चत्वारि शतानि (४९०) रूप्यकाणि ददातु’ और फिर ‘दश (१०) रूप्यकाणि अवशिष्टानि’। हमारी गणना ठीक वही उत्तर देती है। आहत्य = कुल मिलाकर, अवशिष्टम् = शेष/बाकी।
Try This: कुल तौल भी जोड़ लीजिए — ½ + 1 + 1 + 1 + ¼ = 3¾ किलो (पौने चार किलो) सामान। और ध्यान दीजिए, राकेश कपड़े का थैला (स्यूतम्) ले जाता है, प्लास्टिक की थैली नहीं — पाठ का यह छोटा-सा संकेत बहुत बड़ी सीख है।
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