प्र1.
चित्राणि दृष्ट्वा वाक्यानि पठन्तु अवगच्छन्तु च — भवान् पिबतु । यूयम् उत्तिष्ठत । भवन्तः खादन्तु । अहं संशयं पृच्छानि । त्वं पठ । वयं गच्छाम ।
उत्तर
छहों वाक्य लोट्लकार के हैं। हर वाक्य का कर्ता (भवान्, यूयम्, अहम्…) ही बता देता है कि क्रिया किस पुरुष और वचन में है।
| वाक्यम् | क्रियापदम् | पुरुषः / वचनम् | हिन्दी अर्थः |
|---|---|---|---|
| भवान् पिबतु । | पिबतु (पा) | प्रथमपुरुषः, एकवचनम् | आप पीजिए। |
| यूयम् उत्तिष्ठत । | उत्तिष्ठत (उत् + स्था) | मध्यमपुरुषः, बहुवचनम् | तुम सब खड़े हो जाओ। |
| भवन्तः खादन्तु । | खादन्तु (खाद्) | प्रथमपुरुषः, बहुवचनम् | आप सब खाइए। |
| अहं संशयं पृच्छानि । | पृच्छानि (प्रच्छ्) | उत्तमपुरुषः, एकवचनम् | मैं (अपनी) शंका पूछूँ? |
| त्वं पठ । | पठ (पठ्) | मध्यमपुरुषः, एकवचनम् | तुम पढ़ो। |
| वयं गच्छाम । | गच्छाम (गम्) | उत्तमपुरुषः, बहुवचनम् | हम चलें। |
‘भवान्’ का चक्कर याद रखिए: हिन्दी में ‘आप’ मध्यमपुरुष (दूसरा पुरुष) है, पर संस्कृत में भवान् / भवती / भवन्तः हमेशा प्रथमपुरुष लेते हैं। इसीलिए ‘भवान् पिबतु’ (‘भवान् पिब’ नहीं) और ‘भवन्तः खादन्तु’ (‘भवन्तः खादत’ नहीं)।
Check it yourself: इन छह वाक्यों में लोट्लकार के नौ में से छह खाने भर जाते हैं। शेष तीन — द्विवचन के रूप (पठताम्, पठतम्, पठाव) — पृष्ठ 124 की तालिका में देखिए।