प्र1.
उदाहरणानुगुणं लोट्लकारस्य रूपाणि लिखन्तु — पठति – पठतु ; क्रीडामि – ……… ; हसति – ……… ; नृत्यति – ……… ; खादति – ……… ; पश्यसि – ……… ; नयसि – ……… ; गच्छामि – ……… ।
उत्तर
नियम एक ही है — पुरुष और वचन बदलने नहीं हैं, केवल लकार बदलना है। जो लट् में जिस खाने का है, लोट् में भी उसी खाने का रहेगा।
| लट्लकारः | पुरुषः / वचनम् | लोट्लकारः | हिन्दी |
|---|---|---|---|
| पठति | प्रथमपुरुषः, एकवचनम् | पठतु (उदाहरणम्) | वह पढ़े |
| क्रीडामि | उत्तमपुरुषः, एकवचनम् | क्रीडानि | मैं खेलूँ |
| हसति | प्रथमपुरुषः, एकवचनम् | हसतु | वह हँसे |
| नृत्यति | प्रथमपुरुषः, एकवचनम् | नृत्यतु | वह नाचे |
| खादति | प्रथमपुरुषः, एकवचनम् | खादतु | वह खाए |
| पश्यसि | मध्यमपुरुषः, एकवचनम् | पश्य | तुम देखो |
| नयसि | मध्यमपुरुषः, एकवचनम् | नय | तुम ले जाओ |
| गच्छामि | उत्तमपुरुषः, एकवचनम् | गच्छानि | मैं जाऊँ |
तीन साधारण अदला-बदली याद रखिए (एकवचन में):
• -ति → -तु (पठति → पठतु, हसति → हसतु)
• -सि → कुछ नहीं (पश्यसि → पश्य, नयसि → नय)
• -मि → -आनि (क्रीडामि → क्रीडानि, गच्छामि → गच्छानि)
यही तीन नियम इस प्रश्न के आठों उत्तर दे देते हैं।
• -ति → -तु (पठति → पठतु, हसति → हसतु)
• -सि → कुछ नहीं (पश्यसि → पश्य, नयसि → नय)
• -मि → -आनि (क्रीडामि → क्रीडानि, गच्छामि → गच्छानि)
यही तीन नियम इस प्रश्न के आठों उत्तर दे देते हैं।
Tip: ‘पश्य’ और ‘नय’ देखकर घबराइए मत कि क्रिया अधूरी लग रही है — मध्यमपुरुष एकवचन का लोट्-रूप ऐसा ही होता है। पाठ में भी माँ ने यही रूप बोले हैं — ‘आनय’, ‘नय’, ‘गच्छ’, ‘स्वीकुरु’।