प्र1.
उदाहरणानुसारं क्रियापदस्य लोट्-लकाररूपैः वाक्यानि पूरयन्तु — यथा : छात्राः प्रातः शीघ्रम् उत्तिष्ठन्तु । (उत् + तिष्ठ्) (क) अम्ब ! अहं क्रीडार्थं ……… (गच्छ्) (ख) आगच्छन्तु, वयं प्रार्थनागीतं ……… (गाय्) (ग) ज्वरः अस्ति । पुत्र ! वृष्टौ न ……… (क्रीड्) (घ) लते ! भवती मम उपनेत्रम् ……… (आ + नय्) (ङ) आर्ये ! अहम् अन्तः ……… (प्रविश्) (च) अहं पृच्छामि त्वम् उत्तरं ……… (वद्) (छ) यूयं शीघ्रं नगरम् ……… (आ + गच्छ्) (ज) तात ! वयं कदा चलचित्रं ……… (पश्य्)
उत्तर
हर वाक्य में कर्ता पहले ढूँढ़िए — वही बता देगा कि क्रिया किस पुरुष और वचन में लगेगी।
| वाक्यम् | कर्ता | उत्तरम् | पुरुषः / वचनम् | हिन्दी |
|---|---|---|---|---|
| (क) अम्ब ! अहं क्रीडार्थं ……… (गच्छ्) | अहम् | गच्छानि | उत्तमपुरुषः, एकवचनम् | माँ! मैं खेलने जाऊँ? |
| (ख) आगच्छन्तु, वयं प्रार्थनागीतं ……… (गाय्) | वयम् | गायाम | उत्तमपुरुषः, बहुवचनम् | आइए, हम प्रार्थना-गीत गाएँ। |
| (ग) ज्वरः अस्ति । पुत्र ! वृष्टौ न ……… (क्रीड्) | त्वम् (‘पुत्र!’ इति सम्बोधनम्) | क्रीड | मध्यमपुरुषः, एकवचनम् | बुखार है। बेटा! वर्षा में मत खेलो। |
| (घ) लते ! भवती मम उपनेत्रम् ……… (आ + नय्) | भवती | आनयतु | प्रथमपुरुषः, एकवचनम् | लता! आप मेरा चश्मा ले आइए। |
| (ङ) आर्ये ! अहम् अन्तः ……… (प्रविश्) | अहम् | प्रविशानि | उत्तमपुरुषः, एकवचनम् | आर्ये! मैं भीतर आ जाऊँ? |
| (च) अहं पृच्छामि त्वम् उत्तरं ……… (वद्) | त्वम् | वद | मध्यमपुरुषः, एकवचनम् | मैं पूछता हूँ, तुम उत्तर बोलो। |
| (छ) यूयं शीघ्रं नगरम् ……… (आ + गच्छ्) | यूयम् | आगच्छत | मध्यमपुरुषः, बहुवचनम् | तुम सब शीघ्र नगर आ जाओ। |
| (ज) तात ! वयं कदा चलचित्रं ……… (पश्य्) | वयम् | पश्याम | उत्तमपुरुषः, बहुवचनम् | पिताजी! हम चलचित्र कब देखें? |
(घ) में सबसे अधिक भूल होती है: ‘भवती’ का अर्थ ‘आप’ है, पर संस्कृत में भवान्/भवती सदा प्रथमपुरुष लेते हैं। इसलिए उत्तर ‘आनय’ (मध्यमपुरुष) नहीं, बल्कि ‘आनयतु’ होगा। इसी प्रकार (ग) में सम्बोधन ‘पुत्र!’ है — कर्ता ‘त्वम्’ छिपा है, इसलिए मध्यमपुरुष एकवचन ‘क्रीड’।
Tip: (क), (ङ), (ज) के अन्त में प्रश्नवाचक भाव है — ‘जाऊँ?’, ‘आ जाऊँ?’, ‘कब देखें?’। लोट्लकार का उत्तमपुरुष ठीक यही काम करता है: अनुमति माँगना या संकल्प करना। उपसर्ग मत भूलिए — ‘आ + नय्’ = आनयतु, ‘आ + गच्छ्’ = आगच्छत।