दीपकम् अध्याय 13 परियोजनाकार्यम्

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
पाठस्य सर्वाणि सुभाषितानि बृहत्-स्फोरकपत्रे सचित्रं लिखित्वा कक्षायाः भित्तौ स्थापयन्तु ।
उत्तर

यह करने का काम है — ठीक वैसा ही जैसा पाठ के पहले पृष्ठ पर शिक्षक ने कक्षा में किया था।

अच्छे पोस्टर में क्या-क्या हो: (1) श्लोक बड़े और साफ़ अक्षरों में, दो पंक्तियों में, बीच में दण्ड ( । ) और अन्त में द्विदण्ड ( ।। ) सहित; (2) नीचे छोटे अक्षरों में हिन्दी अर्थ; (3) श्लोक के भाव से मेल खाता एक चित्र; (4) कोने में ग्रन्थ का नाम; (5) आठों श्लोकों के लिए आठ अलग पोस्टर, ताकि पूरी दीवार पर एक शृंखला बन जाए।
सुभाषितम्चित्रस्य सुझावः
पृथिव्यां त्रीणि रत्नानि…जल का घड़ा, भोजन की थाली और खुली पुस्तक
अयं निजः परो वेति…पृथ्वी का गोला जिसके चारों ओर विभिन्न देशों के बच्चे हाथ पकड़े हुए
उद्यमेन हि सिद्ध्यन्ति…खेत जोतता किसान, और पास में सोया हुआ सिंह
अभिवादनशीलस्य…बालक गुरु/दादा-दादी के चरण छूता हुआ
उद्यमः साहसं धैर्यम्…पर्वत पर चढ़ते हुए पर्वतारोही
विद्या ददाति विनयम्…सीढ़ी — विद्या → विनय → पात्रता → धन → धर्म → सुख
अपि स्वर्णमयी लङ्का…भारत का मानचित्र और तिरंगा
पुस्तकस्था तु या विद्या…अलमारी में बन्द पुस्तकें, और सामने पढ़ता हुआ विद्यार्थी
Tip: पोस्टर बनाते समय श्लोक पहले पेंसिल से लिखिए, मात्राएँ और विसर्ग जाँचिए, तब स्केच-पेन से गहरा कीजिए। संस्कृत में एक विसर्ग या अनुस्वार छूट जाने से अर्थ बदल जाता है।
प्र2.
सुभाषितेषु प्रयुक्तानां क्रियापदानां सूचीं कुर्वन्तु । तेषाम् आधारेण वाक्यरचनां कुर्वन्तु ।
उत्तर

पहले सूची, फिर उन्हीं क्रियापदों से अपने नए वाक्य। आठों सुभाषितों की सारी क्रियाएँ यहाँ एक जगह हैं।

क्रियापदम्धातुःपुरुषः / वचनम्नूतनं वाक्यम्
विधीयतेवि + धा (कर्मवाच्ये)प्रथमपुरुषः, एकवचनम्विद्यालये नियमः विधीयते ।
सिद्ध्यन्तिसिध्प्रथमपुरुषः, बहुवचनम्परिश्रमेण सर्वाणि कार्याणि सिद्ध्यन्ति ।
प्रविशन्तिप्र + विश्प्रथमपुरुषः, बहुवचनम्छात्राः कक्षां प्रविशन्ति ।
वर्धन्तेवृध्प्रथमपुरुषः, बहुवचनम्उद्याने वृक्षाः वर्धन्ते ।
वर्तन्तेवृत्प्रथमपुरुषः, बहुवचनम्ग्रामे बहवः जनाः वर्तन्ते ।
ददातिदाप्रथमपुरुषः, एकवचनम्माता पुत्राय दुग्धं ददाति ।
यातियाप्रथमपुरुषः, एकवचनम्सः प्रतिदिनं विद्यालयं याति ।
आप्नोतिआप्प्रथमपुरुषः, एकवचनम्परिश्रमी छात्रः यशम् आप्नोति ।
रोचतेरुच्प्रथमपुरुषः, एकवचनम्मह्यं संस्कृतभाषा रोचते ।
भवति / सन्तिभू / अस्एकवचनम् / बहुवचनम्सत्यम् एव श्रेष्ठं भवति । ग्रन्थे बहूनि सुभाषितानि सन्ति ।
वाक्य बनाते समय दो बातें जाँचिए: (1) कर्ता और क्रिया का वचन एक हो — ‘वृक्षाः वर्धन्ते’ (बहुवचन), ‘वृक्षः वर्धते’ (एकवचन); (2) कर्म द्वितीया विभक्ति में हो — ‘दुग्धं ददाति’, ‘विद्यालयं याति’। ‘रोचते’ के साथ विशेष नियम है — जिसे अच्छा लगता है वह चतुर्थी विभक्ति में आता है: ‘मह्यं संस्कृतं रोचते’, ‘बालकाय क्रीडा रोचते’।
Check it yourself: सूची में सबसे कठिन पद विधीयते है — यह कर्मवाच्य (passive) का रूप है, इसीलिए श्लोक में कर्ता ‘मूढैः’ तृतीया विभक्ति में आया। कर्तृवाच्य में यही वाक्य होता — ‘मूढाः पाषाणखण्डेषु रत्नसंज्ञां विदधति।’
प्र3.
विद्या, उद्यमः, अभिवादनशीलः इत्यादिगुणाः येषु सन्ति तादृशानां पञ्चानां महापुरुषाणां जीवनपरिचयं पठन्तु लिखन्तु च ।
उत्तर

यह पढ़कर लिखने का काम है। हर महापुरुष के लिए चार बातें लिखिए — जन्म-स्थान और काल, मुख्य कार्य, कौन-सा गुण दिखा, और एक ऐसी घटना जो उस गुण को सिद्ध करती हो। तभी यह ‘जीवनपरिचय’ बनेगा, केवल नाम की सूची नहीं।

नमूना उत्तर (पञ्च महापुरुषाः) —

महापुरुषःकः गुणःजीवनपरिचयः (संक्षेपेण)
डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलामउद्यमः, विद्यारामेश्वरम् के एक साधारण परिवार में जन्म। समाचार-पत्र बाँटकर पढ़ाई की, आगे चलकर वैज्ञानिक और भारत के राष्ट्रपति बने। ‘सपने वे नहीं जो नींद में आएँ, सपने वे हैं जो सोने न दें’ — यह उन्हीं का वाक्य है।
महर्षि वाल्मीकिविद्या, तपःरामायण के रचयिता, ‘आदिकवि’ कहलाते हैं। तपस्या और अध्ययन से उन्होंने अपना जीवन पूरी तरह बदल लिया — यही उनके चरित्र की सबसे बड़ी सीख है।
स्वामी विवेकानन्दःधैर्यम्, साहसम्अपार स्मरणशक्ति और अध्ययन के धनी। शिकागो की धर्मसभा (1893) में ‘भाइयो और बहनो’ कहकर भारत की संस्कृति पूरे संसार के सामने रखी।
श्री रामकृष्णः / सन्त कबीरःविनयः, उदारता‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ को जीवन में उतारने वाले सन्त — जिन्होंने जाति और मत के भेद मिटाकर सबको एक बताया।
श्रीमती सावित्रीबाई फुलेउद्यमः, विद्याभारत की पहली महिला शिक्षिकाओं में से एक। विरोध सहकर भी बालिकाओं के लिए विद्यालय खोले — ‘विद्या ददाति विनयम्’ का जीवित उदाहरण।
Tip: पाँचों में से कम-से-कम दो नाम अपने राज्य या नगर के चुनिए — कोई शिक्षक, वैज्ञानिक, स्वतन्त्रता-सेनानी या समाजसेवी। परियोजना तब अधिक अच्छी बनती है जब उसमें अपने आस-पास का कोई व्यक्ति भी हो। चाहें तो दो-दो पंक्तियाँ संस्कृत में भी लिखिए — ‘कलाम-महोदयः महान् वैज्ञानिकः आसीत्। सः अतीव परिश्रमी आसीत्।’
प्र4.
‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ इति विषये एकां भाषणप्रतियोगिताम् आयोजयन्तु ।
उत्तर

यह कक्षा में मिलकर करने का काम है। पहले आयोजन का ढाँचा, फिर एक नमूना भाषण।

आयोजन कैसे करें: (1) कक्षा को समूहों में बाँटिए, हर समूह से एक वक्ता; (2) समय — प्रत्येक को तीन मिनट; (3) भाषा — संस्कृत अथवा हिन्दी, पर आरम्भ और अन्त संस्कृत में; (4) निर्णय के आधार — विषयवस्तु, उच्चारण, आत्मविश्वास और समय-पालन; (5) निर्णायक — दो विद्यार्थी और एक शिक्षक।

नमूना भाषण (संस्कृतम्) —

सम्माननीयाः गुरुजनाः, प्रियाः सुहृदः च !
अद्य अहं ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ इति विषये किञ्चित् वदामि ।
‘अयं निजः परो वेति गणना लघुचेतसाम् । उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम् ॥’
अस्य अर्थः — यः जनः ‘एषः मम, एषः अन्यस्य’ इति चिन्तयति, तस्य हृदयं लघु भवति ।
यस्य हृदयम् उदारं भवति, तस्य कृते सम्पूर्णा वसुधा एव कुटुम्बकम् ।
अस्माकं भारतदेशः सदा एतम् एव सन्देशं ददाति ।
अतः वयं सर्वे मिलित्वा वदामः — सर्वे भवन्तु सुखिनः
धन्यवादः ।
भाषण में क्या-क्या रखें (हिन्दी में बोलें तब भी): (1) आरम्भ में श्लोक; (2) उसका सरल अर्थ; (3) एक उदाहरण — जैसे कोविड-काल में भारत ने अनेक देशों को औषधि भेजी, अथवा किसी आपदा में दूर-दूर से आई सहायता; (4) एक प्रश्न श्रोताओं से — ‘क्या पड़ोसी का दुःख हमारा नहीं?’; (5) अन्त में सन्देश — ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’। तीन मिनट के भाषण के लिए लगभग 250–300 शब्द पर्याप्त हैं।
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