प्र1.
पाठस्य सर्वाणि सुभाषितानि बृहत्-स्फोरकपत्रे सचित्रं लिखित्वा कक्षायाः भित्तौ स्थापयन्तु ।
उत्तर
यह करने का काम है — ठीक वैसा ही जैसा पाठ के पहले पृष्ठ पर शिक्षक ने कक्षा में किया था।
अच्छे पोस्टर में क्या-क्या हो: (1) श्लोक बड़े और साफ़ अक्षरों में, दो पंक्तियों में, बीच में दण्ड ( । ) और अन्त में द्विदण्ड ( ।। ) सहित; (2) नीचे छोटे अक्षरों में हिन्दी अर्थ; (3) श्लोक के भाव से मेल खाता एक चित्र; (4) कोने में ग्रन्थ का नाम; (5) आठों श्लोकों के लिए आठ अलग पोस्टर, ताकि पूरी दीवार पर एक शृंखला बन जाए।
| सुभाषितम् | चित्रस्य सुझावः |
|---|---|
| पृथिव्यां त्रीणि रत्नानि… | जल का घड़ा, भोजन की थाली और खुली पुस्तक |
| अयं निजः परो वेति… | पृथ्वी का गोला जिसके चारों ओर विभिन्न देशों के बच्चे हाथ पकड़े हुए |
| उद्यमेन हि सिद्ध्यन्ति… | खेत जोतता किसान, और पास में सोया हुआ सिंह |
| अभिवादनशीलस्य… | बालक गुरु/दादा-दादी के चरण छूता हुआ |
| उद्यमः साहसं धैर्यम्… | पर्वत पर चढ़ते हुए पर्वतारोही |
| विद्या ददाति विनयम्… | सीढ़ी — विद्या → विनय → पात्रता → धन → धर्म → सुख |
| अपि स्वर्णमयी लङ्का… | भारत का मानचित्र और तिरंगा |
| पुस्तकस्था तु या विद्या… | अलमारी में बन्द पुस्तकें, और सामने पढ़ता हुआ विद्यार्थी |
Tip: पोस्टर बनाते समय श्लोक पहले पेंसिल से लिखिए, मात्राएँ और विसर्ग जाँचिए, तब स्केच-पेन से गहरा कीजिए। संस्कृत में एक विसर्ग या अनुस्वार छूट जाने से अर्थ बदल जाता है।