दीपकम् अध्याय 13 योग्यताविस्तरः

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
एतानि सुभाषितानि विविधग्रन्थेभ्यः स्वीकृतानि सन्ति । तेषां ग्रन्थानां परिचयः अत्र वर्णितः अस्ति, यथा — (क) चाणक्यनीतिः (ख) मनुस्मृतिः (ग) पञ्चतन्त्रम् (घ) हितोपदेशः (ङ) रामायणम् (च) सुभाषितरत्नभाण्डागारः । — एषां ग्रन्थानां परिचयस्य हिन्दी-अनुवादं कुर्वन्तु ।
उत्तर

पुस्तक कहती है — ये सुभाषित अलग-अलग ग्रन्थों से लिए गए हैं। छहों ग्रन्थों का परिचय यहाँ संस्कृत और हिन्दी दोनों में है।

ग्रन्थःरचनाकारःपरिचयः (हिन्दी)
(क) चाणक्यनीतिःचाणक्यःयह एक नीतिग्रन्थ है। इस ग्रन्थ में सूत्ररूप में धर्म, संस्कृति, न्यायव्यवस्था, शान्ति, सुशिक्षा आदि विषयों का सुन्दर विवरण है।
(ख) मनुस्मृतिःमहर्षिः मनुःमनुस्मृति एक प्रसिद्ध नीतिग्रन्थ और धर्मग्रन्थ है। इसमें बारह अध्याय हैं। इस ग्रन्थ में संसार की उत्पत्ति, धर्म, संस्कृति तथा मनुष्य के कर्तव्यों आदि का वर्णन है।
(ग) पञ्चतन्त्रम्पण्डितः विष्णुशर्मापञ्चतन्त्र एक कथाग्रन्थ है। इसमें पाँच तन्त्र हैं — मित्रभेदः, मित्रलाभः, काकोलूकीयम्, लब्धप्रणाशः और अपरीक्षितकारकम्।
(घ) हितोपदेशःनारायणपण्डितःहितोपदेश के रचनाकार नारायण पण्डित हैं। इसमें पशु-पक्षियों की कहानियों के द्वारा बच्चों के लिए नीति की शिक्षा प्रस्तुत की गई है।
(ङ) रामायणम्महर्षिः वाल्मीकिःयह ग्रन्थ भारतीय संस्कृति का आदर्श स्वरूप दिखाता है। इसमें भगवान् श्रीराम का चरित वर्णित है। यह ग्रन्थ ‘आदिकाव्य’ नाम से प्रसिद्ध है।
(च) सुभाषितरत्नभाण्डागारःसङ्कलनग्रन्थःइस ग्रन्थ में सुभाषितों का संग्रह है। विविध संस्कृत-ग्रन्थों से सुभाषित चुनकर इस ग्रन्थ में उनका सङ्कलन किया गया है।
ग्रन्थों के तीन प्रकार समझ लीजिए: नीतिग्रन्थ सीधे उपदेश देता है (चाणक्यनीति, मनुस्मृति); कथाग्रन्थ कहानी के बहाने सीख देता है (पञ्चतन्त्र, हितोपदेश); और सङ्कलनग्रन्थ दूसरों के अच्छे वचन एक जगह इकट्ठे कर देता है (सुभाषितरत्नभाण्डागार)। रामायण महाकाव्य है — इसे ‘आदिकाव्य’ इसलिए कहते हैं कि यह संस्कृत का सबसे पहला काव्य माना जाता है, और वाल्मीकि ‘आदिकवि’।
Did you know? ‘भाण्डागार’ का अर्थ है भण्डार / खज़ाना। तो ‘सुभाषितरत्नभाण्डागारः’ का अर्थ हुआ — ‘सुभाषितरूपी रत्नों का खज़ाना’। पाठ के पहले श्लोक से जोड़कर देखिए — जब सुभाषित ही रत्न है, तो सुभाषितों का संग्रह सचमुच रत्नों का भण्डार ही हुआ!
प्र2.
पाठगतानि अष्ट सुभाषितानि कस्मात् कस्मात् ग्रन्थात् गृहीतानि इति परम्परया प्रसिद्धम् — तत् लिखन्तु ।
उत्तर

पुस्तक ने ग्रन्थों की सूची तो दी है, पर यह नहीं लिखा कि कौन-सा श्लोक किस ग्रन्थ का है। नीचे परम्परा से प्रसिद्ध स्रोत दिए हैं — इन्हें ‘सामान्यतया माना जाता है’ इसी भाव से पढ़िए, क्योंकि सुभाषित एक ग्रन्थ से दूसरे में जाते रहते हैं और अनेक श्लोक कई संग्रहों में मिलते हैं।

क्र.सुभाषितम्प्रायः यस्मात् ग्रन्थात्
पृथिव्यां त्रीणि रत्नानि…चाणक्यनीतिः
अयं निजः परो वेति…हितोपदेशः / महोपनिषद्
उद्यमेन हि सिद्ध्यन्ति…हितोपदेशः (मित्रलाभः)
अभिवादनशीलस्य…मनुस्मृतिः
उद्यमः साहसं धैर्यम्…हितोपदेशः / सुभाषितसंग्रहाः
विद्या ददाति विनयम्…हितोपदेशः
अपि स्वर्णमयी लङ्का…रामायणम् (श्रीरामस्य वचनम्)
पुस्तकस्था तु या विद्या…चाणक्यनीतिः / सुभाषितरत्नभाण्डागारः
ध्यान रखिए: पुस्तक के पृष्ठ 130 पर बने स्फोरकपत्रों (पोस्टरों) पर श्लोक के नीचे छोटे अक्षरों में ग्रन्थ का नाम छपा है, पर वह चित्र में इतना छोटा है कि पढ़ा नहीं जाता। इसलिए परीक्षा में यदि स्रोत पूछा जाए तो वही लिखिए जो आपकी पुस्तक के पोस्टर पर दिख रहा हो; ऊपर की तालिका केवल सामान्य जानकारी के लिए है।
Try This: पुस्तकालय से हितोपदेश या पञ्चतन्त्र लेकर उसमें से पाँच नए सुभाषित चुनिए और उनका अर्थ लिखिए। यही परियोजनाकार्य के प्रश्न १ में भी काम आएगा।
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