कक्षा ६ संस्कृत अध्याय 13 पृथिव्यां त्रीणि रत्नानि के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन 2026-09-19

इस अध्याय के बारे में

पाठ का आरम्भ एक चित्रकथा से होता है (पृष्ठ 130)। शिक्षक कहते हैं — ‘छात्राः ! पश्यन्तु, अद्य मम हस्ते स्फोरकपत्राणि सन्ति।’ छात्र पूछते हैं कि पोस्टर पर क्या है, और शिक्षक बताते हैं — ‘ सुन्दरवचनानि एव सुभाषितानि भवन्ति। एतानि अस्माकं कृते उत्तमकार्यार्थं प्रेरणां यच्छन्ति।’ इसी से पाठ का विषय खुलता है। पाठ में आठ सुभाषित हैं। (१) पृथिव्यां त्रीणि रत्नानि, (२) अयं निजः परो वेति, (३) उद्यमेन हि सिद्ध्यन्ति, (४) अभिवादनशीलस्य, (५) उद्यमः साहसं धैर्यम्, (६) विद्या ददाति विनयम्, (७) अपि स्वर्णमयी लङ्का, (८) पुस्तकस्था तु या विद्या। हर श्लोक के नीचे पुस्तक ने पदच्छेदः, अन्वयः और भावार्थः — तीनों छापे हैं, इसलिए अर्थ समझना सरल है। पाठ का मूल भाव — परिश्रम, उदारता और विद्या। केवल इच्छा से काम नहीं बनते (‘न हि सुप्तस्य सिंहस्य प्रविशन्ति मुखे मृगाः’); जिसका हृदय बड़ा है उसके लिए सारी पृथ्वी ही परि

त्वरित पुनरावृत्ति
शब्दःअर्थः (संस्कृतम्)हिन्दीEnglish
मूढैःमूर्खजनैःमूर्खों के द्वाराBy fools
निजःस्वकीयःअपनाOwn
परःअन्यः जनःअन्यOther
लघुचेतसाम्संकुचितहृदयानाम्क्षुद्र हृदय वालों काOf narrow-minded
वसुधाधरित्रीपृथ्वीEarth
उद्यमेनपरिश्रमेणपरिश्रम सेEffort
वृद्धोपसेविनःवृद्धानां सेवकस्यबुजुर्गों की सेवा करने वाले काOf the person who serves elders
सहायकृत्सहायकःसहायता करने वालाOne who helps
पात्रताम्योग्यताम्योग्यता कोAbility
आप्नोतिप्राप्तं करोतिप्राप्त करता हैReceives
गरीयसीश्रेष्ठामहानGreat
परहस्तेषुअन्येषां हस्तेषुअन्यों के हाथ मेंIn others hand
  1. त्रयोदशः पाठः
  2. सुभाषितानि (१ – २)
  3. सुभाषितानि (३ – ४)
  4. सुभाषितानि (५ – ६)
  5. सुभाषितानि (७ – ८)
  6. वयं शब्दार्थान् जानीमः
  7. वयम् अभ्यासं कुर्मः
  8. वयम् अभ्यासं कुर्मः
  9. वयम् अभ्यासं कुर्मः
  10. वयम् अभ्यासं कुर्मः
  11. वयम् अभ्यासं कुर्मः
  12. योग्यताविस्तरः
  13. परियोजनाकार्यम्
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