प्र1.
उद्यमः साहसं धैर्यं बुद्धिः शक्तिः पराक्रमः । षडेते यत्र वर्तन्ते तत्र देवः सहायकृत् ।। — अस्य सुभाषितस्य अन्वयं हिन्दी-अर्थं भावं च लिखन्तु ।
उत्तर
यह श्लोक सफलता के छह औज़ार गिनाता है — और बताता है कि भगवान भी वहीं मदद करते हैं जहाँ ये छह हों।
पदच्छेदः — उद्यमः । साहसम् । धैर्यम् । बुद्धिः । शक्तिः । पराक्रमः । षड् । एते । यत्र । वर्तन्ते । तत्र । देवः । सहायकृत् ।
अन्वयः — यत्र उद्यमः साहसं धैर्यं बुद्धिः शक्तिः पराक्रमः च एते षड् वर्तन्ते, तत्र देवः सहायकृत् (भवति) ।
अन्वयः — यत्र उद्यमः साहसं धैर्यं बुद्धिः शक्तिः पराक्रमः च एते षड् वर्तन्ते, तत्र देवः सहायकृत् (भवति) ।
हिन्दी अर्थ: परिश्रम, साहस, धैर्य, बुद्धि, शक्ति और पराक्रम — जहाँ ये छहों होते हैं, वहाँ ईश्वर भी सहायता करने वाले होते हैं।
भाव: ईश्वर बिना कुछ किए बैठे हुए को नहीं उठाते; वे उस हाथ को थामते हैं जो पहले से चल रहा है। छहों गुण एक साथ चाहिए — उद्यम काम शुरू कराता है, साहस डर हटाता है, धैर्य बीच में रुकने नहीं देता, बुद्धि सही रास्ता दिखाती है, शक्ति और पराक्रम काम पूरा कराते हैं। पृष्ठ 133 का चित्र इसी का है — तीन पर्वतारोही रस्सी बाँधकर चढ़ाई कर रहे हैं।
Tip: षडेते = षड् + एते (सन्धि)। ‘षष्’ (छह) का प्रथमा-रूप ‘षट्’ होता है, पर स्वर से पहले आने पर वह षड् बन जाता है। ‘सहायकृत्’ = सहायं करोति इति = सहायता करने वाला।