दीपकम् अध्याय 13 वयम् अभ्यासं कुर्मः

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
एतानि सर्वाणि सुभाषितानि उच्चैः पठन्तु स्मरन्तु लिखन्तु च ।
उत्तर

यह करने का काम है, लिखने का नहीं — पर करने का तरीका ठीक होना चाहिए। तीन चरण हैं: उच्चैः पठनम् (ऊँचे स्वर में पढ़ना), स्मरणम् (कण्ठस्थ करना) और लेखनम् (लिखकर देखना)।

क्र.सुभाषितम् (प्रथमः चरणः)एकपदे भावः
पृथिव्यां त्रीणि रत्नानि जलमन्नं सुभाषितम्सच्चे रत्न
अयं निजः परो वेति गणना लघुचेतसाम्वसुधैव कुटुम्बकम्
उद्यमेन हि सिद्ध्यन्ति कार्याणि न मनोरथैःपरिश्रम
अभिवादनशीलस्य नित्यं वृद्धोपसेविनःबड़ों का आदर
उद्यमः साहसं धैर्यं बुद्धिः शक्तिः पराक्रमःसफलता के छह गुण
विद्या ददाति विनयं विनयाद्याति पात्रताम्विद्या की सीढ़ी
अपि स्वर्णमयी लङ्का न मे लक्ष्मण रोचतेजन्मभूमि
पुस्तकस्था तु या विद्या परहस्तगतं धनम्पढ़ी हुई विद्या ही काम की
श्लोक कण्ठस्थ करने का सरल क्रम: (1) पहले पूरा श्लोक एक बार धीरे पढ़िए; (2) फिर पदच्छेद देखकर हर शब्द अलग-अलग बोलिए; (3) अन्वय पढ़कर अर्थ मन में बैठाइए; (4) अब बिना देखे तीन बार ऊँचे स्वर में बोलिए; (5) अन्त में बिना देखे लिखकर मिलान कीजिए — यहीं मात्राओं और विसर्गों की भूलें पकड़ में आती हैं।
Tip: श्लोक बोलते समय यति (ठहराव) का ध्यान रखिए। अनुष्टुप् छन्द में हर चरण आठ अक्षरों का होता है — ‘पृथिव्यां त्रीणि रत्नानि’ (८) / ‘जलमन्नं सुभाषितम्’ (८)। इसी लय से बोलेंगे तो श्लोक अपने-आप याद हो जाएगा।
प्र2.
अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि एकपदेन लिखन्तु — (क) पृथिव्यां कति रत्नानि सन्ति ? (ख) अयं निजः परो वा इति गणना केषां भवति ? (ग) कार्याणि केन सिद्ध्यन्ति ? (घ) विद्या किं ददाति ? (ङ) जननी जन्मभूमिश्च कस्मात् गरीयसी ? (च) लङ्का कीदृशी आसीत् ?
उत्तर

‘एकपदेन’ का अर्थ है — केवल एक पद, पूरा वाक्य नहीं। और वह पद उसी विभक्ति में होना चाहिए जिस विभक्ति का प्रश्न है।

क्र.प्रश्नःउत्तरम् (एकपदेन)हिन्दीविभक्तिः
(क)पृथिव्यां कति रत्नानि सन्ति ?त्रीणितीनप्रथमा, बहुवचनम् (नपुं.)
(ख)अयं निजः परो वा इति गणना केषां भवति ?लघुचेतसाम्छोटे मन वालों कीषष्ठी, बहुवचनम्
(ग)कार्याणि केन सिद्ध्यन्ति ?उद्यमेनपरिश्रम सेतृतीया, एकवचनम्
(घ)विद्या किं ददाति ?विनयम्विनयद्वितीया, एकवचनम्
(ङ)जननी जन्मभूमिश्च कस्मात् गरीयसी ?स्वर्गात्स्वर्ग सेपञ्चमी, एकवचनम्
(च)लङ्का कीदृशी आसीत् ?स्वर्णमयीसोने की बनी हुईप्रथमा, एकवचनम् (स्त्री.)
प्रश्नवाचक शब्द ही उत्तर की विभक्ति बता देता है:केन’ (तृतीया) पूछा है तो उत्तर ‘उद्यमेन’ ही होगा, ‘उद्यमः’ नहीं। ‘केषाम्’ (षष्ठी) पूछा है तो ‘लघुचेतसाम्’, ‘लघुचेतसः’ नहीं। ‘कस्मात्’ (पञ्चमी) पूछा है तो ‘स्वर्गात्’। यह नियम याद रहे तो एकपदेन उत्तर में कभी भूल नहीं होगी।
Tip: ‘कीदृशी’ का अर्थ है ‘कैसी’ — इसका उत्तर सदा विशेषण होता है, संज्ञा नहीं। इसलिए (च) का उत्तर ‘लङ्का’ नहीं, स्वर्णमयी है। इसी तरह ‘कति’ का उत्तर सदा संख्या होती है — त्रीणि
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