प्र1.
अधोलिखितानि वाक्यानि पठित्वा ‘आम्’ अथवा ‘न’ इति लिखन्तु — यथा – किं पृथिव्यां त्रीणि रत्नानि सन्ति ? – आम् । (क) त्रीणि रत्नानि जलम् अन्नं पाषाणः च सन्ति ? (ख) किं धर्मेण सुखं प्राप्यते ? (ग) किं विद्या विनयं ददाति ? (घ) किम् अभिवादनशीलस्य विद्या वर्धते ? (ङ) किम् उद्यमेन कार्याणि नश्यन्ति ? (च) किं जन्मभूमिः स्वर्गात् गरीयसी भवति ?
उत्तर
इस प्रश्न में दो वाक्य जान-बूझकर गलत रखे गए हैं — उन्हीं में ‘न’ आएगा। हर उत्तर के साथ यहाँ कारण भी दिया है।
| क्र. | वाक्यम् | उत्तरम् | कारणम् |
|---|---|---|---|
| यथा | किं पृथिव्यां त्रीणि रत्नानि सन्ति ? | आम् | ‘पृथिव्यां त्रीणि रत्नानि…’ — श्लोक स्वयं कहता है। |
| (क) | त्रीणि रत्नानि जलम् अन्नं पाषाणः च सन्ति ? | न | तीसरा रत्न पाषाण नहीं, सुभाषितम् है। पाषाणखण्ड तो मूर्ख लोग रत्न कहते हैं। |
| (ख) | किं धर्मेण सुखं प्राप्यते ? | आम् | ‘धनाद्धर्मं ततः सुखम्’ — धर्म से सुख मिलता है। |
| (ग) | किं विद्या विनयं ददाति ? | आम् | ‘विद्या ददाति विनयम्’ — श्लोक का पहला ही चरण। |
| (घ) | किम् अभिवादनशीलस्य विद्या वर्धते ? | आम् | चार वस्तुएँ बढ़ती हैं — आयुः, विद्या, यशः, बलम्। |
| (ङ) | किम् उद्यमेन कार्याणि नश्यन्ति ? | न | उद्यम से काम नष्ट नहीं, सिद्ध होते हैं — ‘उद्यमेन हि सिद्ध्यन्ति कार्याणि’। |
| (च) | किं जन्मभूमिः स्वर्गात् गरीयसी भवति ? | आम् | ‘जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी’। |
‘किम्’ यहाँ प्रश्नवाचक चिह्न भर है: वाक्य के आरम्भ में आया ‘किम् / किं’ किसी वस्तु का नाम नहीं पूछ रहा — वह पूरे वाक्य को हाँ-ना वाला प्रश्न बना रहा है, जैसे अंग्रेज़ी में ‘Is it that…?’। इसीलिए उत्तर में ‘आम्’ (हाँ) या ‘न’ (नहीं) ही लिखना है।
Check it yourself: जिन दो वाक्यों में ‘न’ आया, उन्हें सही करके लिखिए — (क) ‘त्रीणि रत्नानि जलम् अन्नं सुभाषितं च सन्ति।’ (ङ) ‘उद्यमेन कार्याणि सिद्ध्यन्ति।’ गलत वाक्य को सही करके लिखना ही सबसे अच्छा अभ्यास है।