दीपकम् अध्याय 13 वयम् अभ्यासं कुर्मः

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
वलये पदानि विलिख्य सुभाषितं पूरयन्तु — विद्या – ददाति – ……… – विनयात् – ……… ↓ पात्रताम् – ……… – धनम् – ……… – धनात् ↓ ……… – ततः – ……… ।
उत्तर

वलय (गोलों की शृंखला) साँप-सीढ़ी की तरह चलता है — पहली पंक्ति बाएँ से दाएँ, दूसरी पंक्ति दाएँ से बाएँ, तीसरी फिर बाएँ से दाएँ। जो श्लोक भरना है वह पृष्ठ 133 वाला है — ‘विद्या ददाति विनयं विनयाद्याति पात्रताम्। पात्रत्वाद्धनमाप्नोति धनाद्धर्मं ततः सुखम्॥

पंक्तिःवलयेषु पदानि (क्रमेण)
प्रथमा (वाम् → दक्षिणम्)विद्या → ददाति → विनयम् → विनयात् → याति
द्वितीया (दक्षिणम् → वाम्)पात्रताम् → पात्रत्वात् → धनम् → आप्नोति → धनात्
तृतीया (वाम् → दक्षिणम्)धर्मम् → ततः → सुखम्
अतः रिक्तवलयेषु लेखनीयानि षट् पदानि —
पंक्ति १ का तीसरा वलय = विनयम्
पंक्ति १ का पाँचवाँ वलय = याति
पंक्ति २ का चौथा वलय (पात्रताम् के बाईं ओर) = पात्रत्वात्
पंक्ति २ का दूसरा वलय (धनात् के दाईं ओर) = आप्नोति
पंक्ति ३ का पहला वलय = धर्मम्
पंक्ति ३ का तीसरा वलय = सुखम्
क्रम कैसे पकड़ें: हर वलय के किनारे एक काला बिन्दु है — वही अगले वलय की ओर इशारा करता है। दूसरी पंक्ति के अन्तिम वलय ‘पात्रताम्’ के ऊपर बिन्दु है, यानी वह पहली पंक्ति से जुड़ा है; और ‘धनात्’ के नीचे बिन्दु है, यानी वहाँ से तीसरी पंक्ति शुरू होती है। इसी से पता चलता है कि दूसरी पंक्ति दाएँ से बाएँ पढ़ी जाएगी।
Tip: वलय में पद सन्धि खोलकर लिखे गए हैं — श्लोक में ‘विनयाद्याति’ है, पर वलय में ‘विनयात्’ और ‘याति’ अलग-अलग हैं। इसी तरह ‘पात्रत्वाद्धनमाप्नोति’ = पात्रत्वात् + धनम् + आप्नोति, और ‘धनाद्धर्मं’ = धनात् + धर्मम्।
प्र2.
पट्टिकातः पदानि चित्वा निर्देशानुसारं पदानि लिखन्तु — (पट्टिका : जननी, धैर्यम्, विद्या, विनयः, निजः, पत्रम्, बुद्धिः, मूलम्, पराक्रमः, शक्तिः, धनम्, उद्यमः) (क) प्रथमान्त-पुंलिङ्गपदानि सन्ति – १. उद्यमः २. … ३. … ४. … (ख) प्रथमान्त-स्त्रीलिङ्गपदानि सन्ति – १. वसुधा २. … ३. … ४. … (ग) प्रथमान्त-नपुंसकलिङ्गपदानि सन्ति – १. साहसम् २. … ३. … ४. …
उत्तर

पट्टिका में बारह पद हैं और वे ठीक चार-चार के तीन वर्गों में बँट जाते हैं। सबसे पहले पूरा वर्गीकरण देख लीजिए।

वर्गःपट्टिकातः पदानि (चत्वारि)हिन्दी अर्थ
(क) प्रथमान्त-पुंलिङ्गपदानिउद्यमः, विनयः, निजः, पराक्रमःपरिश्रम, विनय, अपना, पराक्रम
(ख) प्रथमान्त-स्त्रीलिङ्गपदानिजननी, विद्या, बुद्धिः, शक्तिःमाता, विद्या, बुद्धि, शक्ति
(ग) प्रथमान्त-नपुंसकलिङ्गपदानिधैर्यम्, पत्रम्, मूलम्, धनम्धैर्य, पत्ता/पत्र, जड़, धन

पुस्तक ने हर वर्ग का पहला खाना नमूने के रूप में भर दिया है — उद्यमः, वसुधा, साहसम्। उसी क्रम को मानकर उत्तर इस प्रकार बनेगा —

(क) १. उद्यमः (दत्तम्) २. विनयः ३. निजः ४. पराक्रमः
(ख) १. वसुधा (दत्तम्) २. जननी ३. विद्या ४. बुद्धिः / शक्तिः
(ग) १. साहसम् (दत्तम्) २. धैर्यम् ३. पत्रम् ४. मूलम् / धनम्
ध्यान दीजिए — एक छोटी-सी पुस्तक-सम्बन्धी बात: नमूने में दिए गए ‘वसुधा’ और ‘साहसम्’ पट्टिका के भीतर नहीं हैं; वे पाठ के सुभाषितों से लिए गए हैं (‘वसुधैव कुटुम्बकम्’, ‘उद्यमः साहसं धैर्यम्’)। इसलिए यदि आप केवल पट्टिका के पद लिखें तो हर वर्ग में ठीक चार पद आते हैं — 4 + 4 + 4 = 12। दोनों ही उत्तर स्वीकार्य हैं; ऊपर दोनों रास्ते दिखा दिए गए हैं।
Tip — ‘प्रथमान्त’ का अर्थ: ‘प्रथमा विभक्ति में समाप्त होने वाला’ पद। पट्टिका के सभी पद प्रथमा एकवचन में ही हैं, इसीलिए उनका लिङ्ग अन्त्य अक्षर से पहचाना जा सकता है — विसर्गान्त प्रायः पुंल्लिङ्ग (उद्यमः, विनयः), ‘म्’-अन्त नपुंसकलिङ्ग (धैर्यम्, पत्रम्), और ‘आ/ई’-अन्त स्त्रीलिङ्ग (जननी, विद्या)। पर बुद्धिः तथा शक्तिः विसर्गान्त होकर भी स्त्रीलिङ्ग हैं — इन्हें अलग से याद रखना पड़ेगा।
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