प्र1.
वलये पदानि विलिख्य सुभाषितं पूरयन्तु — विद्या – ददाति – ……… – विनयात् – ……… ↓ पात्रताम् – ……… – धनम् – ……… – धनात् ↓ ……… – ततः – ……… ।
उत्तर
वलय (गोलों की शृंखला) साँप-सीढ़ी की तरह चलता है — पहली पंक्ति बाएँ से दाएँ, दूसरी पंक्ति दाएँ से बाएँ, तीसरी फिर बाएँ से दाएँ। जो श्लोक भरना है वह पृष्ठ 133 वाला है — ‘विद्या ददाति विनयं विनयाद्याति पात्रताम्। पात्रत्वाद्धनमाप्नोति धनाद्धर्मं ततः सुखम्॥’
| पंक्तिः | वलयेषु पदानि (क्रमेण) |
|---|---|
| प्रथमा (वाम् → दक्षिणम्) | विद्या → ददाति → विनयम् → विनयात् → याति |
| द्वितीया (दक्षिणम् → वाम्) | पात्रताम् → पात्रत्वात् → धनम् → आप्नोति → धनात् |
| तृतीया (वाम् → दक्षिणम्) | धर्मम् → ततः → सुखम् |
अतः रिक्तवलयेषु लेखनीयानि षट् पदानि —
पंक्ति १ का तीसरा वलय = विनयम्
पंक्ति १ का पाँचवाँ वलय = याति
पंक्ति २ का चौथा वलय (पात्रताम् के बाईं ओर) = पात्रत्वात्
पंक्ति २ का दूसरा वलय (धनात् के दाईं ओर) = आप्नोति
पंक्ति ३ का पहला वलय = धर्मम्
पंक्ति ३ का तीसरा वलय = सुखम्
पंक्ति १ का तीसरा वलय = विनयम्
पंक्ति १ का पाँचवाँ वलय = याति
पंक्ति २ का चौथा वलय (पात्रताम् के बाईं ओर) = पात्रत्वात्
पंक्ति २ का दूसरा वलय (धनात् के दाईं ओर) = आप्नोति
पंक्ति ३ का पहला वलय = धर्मम्
पंक्ति ३ का तीसरा वलय = सुखम्
क्रम कैसे पकड़ें: हर वलय के किनारे एक काला बिन्दु है — वही अगले वलय की ओर इशारा करता है। दूसरी पंक्ति के अन्तिम वलय ‘पात्रताम्’ के ऊपर बिन्दु है, यानी वह पहली पंक्ति से जुड़ा है; और ‘धनात्’ के नीचे बिन्दु है, यानी वहाँ से तीसरी पंक्ति शुरू होती है। इसी से पता चलता है कि दूसरी पंक्ति दाएँ से बाएँ पढ़ी जाएगी।
Tip: वलय में पद सन्धि खोलकर लिखे गए हैं — श्लोक में ‘विनयाद्याति’ है, पर वलय में ‘विनयात्’ और ‘याति’ अलग-अलग हैं। इसी तरह ‘पात्रत्वाद्धनमाप्नोति’ = पात्रत्वात् + धनम् + आप्नोति, और ‘धनाद्धर्मं’ = धनात् + धर्मम्।