प्र1.
छात्राः ! पश्यन्तु, अद्य मम हस्ते स्फोरकपत्राणि सन्ति । श्रीमन् ! स्फोरकपत्रे किम् अस्ति ? … श्रीमन् ! तर्हि वयं सुभाषितानि पठामः । — अस्य सम्पूर्णस्य चित्रसंवादस्य हिन्दी-अनुवादं कुर्वन्तु ।
उत्तर
पाठ का पहला पृष्ठ तीन चित्रों की एक छोटी-सी कथा है। शिक्षक कक्षा में स्फोरकपत्र (poster) लाते हैं, छात्र उन्हें दीवार पर लगाते हैं, और उन पर लिखे श्लोक पढ़कर पूछते हैं कि ये क्या हैं। यहीं से पूरा पाठ आरम्भ होता है।
| संस्कृतम् (मूलः संवादः) | हिन्दी अनुवादः |
|---|---|
| अध्यापकः — छात्राः ! पश्यन्तु, अद्य मम हस्ते स्फोरकपत्राणि सन्ति । | अध्यापक — छात्रो! देखिए, आज मेरे हाथ में पोस्टर (भित्ति-पत्र) हैं। |
| छात्रः — श्रीमन् ! स्फोरकपत्रे किम् अस्ति ? | छात्र — श्रीमान्! पोस्टर पर क्या है? |
| अध्यापकः — छात्राः ! एतानि स्फोरकपत्राणि भित्तौ स्थापयन्तु । तदनन्तरं स्वयम् एव पश्यन्तु । | अध्यापक — छात्रो! इन पोस्टरों को दीवार पर लगा दीजिए। उसके बाद स्वयं ही देख लीजिए। |
| छात्रा — श्रीमन् ! स्फोरकपत्रे तु सुन्दरं चित्रम् अस्ति । श्लोकाः अपि सन्ति । | छात्रा — श्रीमान्! पोस्टर पर तो सुन्दर चित्र है। श्लोक भी हैं। |
| अध्यापकः — सत्यम् ! एतानि सुभाषितानि सन्ति । सुन्दरवचनानि एव सुभाषितानि भवन्ति । एतानि अस्माकं कृते उत्तमकार्यार्थं प्रेरणां यच्छन्ति । | अध्यापक — ठीक है! ये सुभाषित हैं। सुन्दर वचन ही सुभाषित कहलाते हैं। ये हमें अच्छा काम करने के लिए प्रेरणा देते हैं। |
| छात्रः — श्रीमन् ! तर्हि वयं सुभाषितानि पठामः । | छात्र — श्रीमान्! तो फिर हम सुभाषित पढ़ते हैं। |
‘सुभाषित’ शब्द ही अपना अर्थ बता देता है: सु (अच्छा) + भाषित (कहा हुआ) = अच्छी तरह कहा गया वचन। पुस्तक की अपनी परिभाषा भी यही है — ‘सुन्दरवचनानि एव सुभाषितानि भवन्ति।’ सुभाषित प्रायः दो पंक्तियों (एक श्लोक) में एक बड़ी सीख भर देता है, इसीलिए वह याद रह जाता है।
Tip — तीन शब्द ध्यान से देखिए:
• स्फोरकपत्रम् = पोस्टर, भित्ति-पत्र (‘स्फोरक’ = चमकाने/उभारने वाला)।
• भित्तौ = दीवार पर — यह सप्तमी विभक्ति, एकवचन है (भित्तिः → भित्तौ)।
• यच्छन्ति = देते हैं — यह ‘दा’ धातु का ही रूप है (दा → यच्छ्), लट्लकार, प्रथमपुरुष, बहुवचन।
• स्फोरकपत्रम् = पोस्टर, भित्ति-पत्र (‘स्फोरक’ = चमकाने/उभारने वाला)।
• भित्तौ = दीवार पर — यह सप्तमी विभक्ति, एकवचन है (भित्तिः → भित्तौ)।
• यच्छन्ति = देते हैं — यह ‘दा’ धातु का ही रूप है (दा → यच्छ्), लट्लकार, प्रथमपुरुष, बहुवचन।