दीपकम् अध्याय 14 कार्यकलापः तथा परियोजनाकार्यम्

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
भाषाक्रीडा — बालकाः गणद्वये विभजनीयाः । शिक्षकः प्रथमाविभक्त्यन्तं कमपि शब्दं वदति । प्रथमगणस्य कश्चन छात्रः तस्य एव शब्दस्य द्वितीयाविभक्तेः एकवचनरूपं वदेत् । ततश्च द्वितीयगणस्य कश्चन छात्रः तस्यैव पदस्य बहुवचनरूपं वदेत् । यस्य गणस्य छात्राः शुद्धं पदं वदन्ति तस्मै गणाय शिक्षकः अङ्कान् यच्छेत् । एवमेव द्वितीयाविभक्तेः वाक्यनिर्माणस्य क्रीडा अपि भवितुम् अर्हति ।
उत्तर

यह कक्षा में खेलने का खेल है। नियम पुस्तक ने ही दे दिए हैं — कक्षा दो दलों में बँटे; शिक्षक कोई शब्द प्रथमा विभक्ति में बोलें; पहला दल उसका द्वितीया एकवचन बताए; दूसरा दल उसी शब्द का द्वितीया बहुवचन; शुद्ध उत्तर पर उस दल को अंक मिलें।

खेल का नमूना (एक चक्र) —

शिक्षकः वदति (प्रथमा)प्रथमगणः (द्वितीया एकवचनम्)द्वितीयगणः (द्वितीया बहुवचनम्)
बालकःबालकम्बालकान्
भिक्षाभिक्षाम्भिक्षाः
नदीनदीम्नदीः
गृहम्गृहम्गृहाणि
सःतम्तान्
भगिनीभगिनीम्भगिनीः
दूसरा चरण — वाक्य-क्रीडा: पुस्तक कहती है कि इसी प्रकार वाक्य बनाने का खेल भी हो सकता है। तब शिक्षक एक शब्द बोलें (जैसे ‘फलम्’) और दल उससे द्वितीया वाला पूरा वाक्य बनाए — ‘बालकः फलं खादति।’ दूसरा दल उसी को बहुवचन में — ‘बालकाः फलानि खादन्ति।’ इससे रूप और वाक्य — दोनों का अभ्यास एक साथ हो जाता है।
Tip — अंक देने का सरल तरीका: शुद्ध रूप पर 2 अंक, बिना सहायता के तुरन्त उत्तर देने पर 1 अतिरिक्त अंक, और गलत उत्तर पर दूसरे दल को सुधारने का अवसर देकर 1 अंक। दस चक्र में खेल पूरा कर लीजिए — कक्षा को द्वितीया विभक्ति के चारों साँचे अपने-आप याद हो जाएँगे।
प्र2.
परियोजनाकार्यम् १ — पाठे दर्शितानां चित्राणाम् अनुसारं द्वितीयाविभक्तेः प्रयोगं कृत्वा दश वाक्यानि रचयन्तु ।
उत्तर

यह पाठ के अपने चित्रों पर आधारित है — पृष्ठ 141 का माता-पुत्र संवाद, पृष्ठ 142–143 के भिक्षुक और धनिक के चित्र, तथा पृष्ठ 146 व 148 के अभ्यास-चित्र। हर वाक्य में एक कर्म-पद द्वितीया विभक्ति में होना चाहिए।

नमूना उत्तर (दश वाक्यानि) —

क्रमःवाक्यम्हिन्दी
बालकः शय्यायां विश्रामं करोति ।बालक बिस्तर पर आराम कर रहा है।
माता पुत्रं बोधयति ।माँ पुत्र को समझाती है।
बालकः परिश्रमं न करोति ।बालक परिश्रम नहीं करता।
भिक्षुकः मार्गे भिक्षां याचते ।भिखारी रास्ते में भीख माँगता है।
जनाः भिक्षुकाय धनं यच्छन्ति ।लोग भिखारी को पैसे देते हैं।
धनिकः भिक्षुकं पश्यति ।धनी व्यक्ति भिखारी को देखता है।
धनिकः पादौ हस्तौ च याचते ।धनी दोनों पैर और दोनों हाथ माँगता है।
भिक्षुकः शरीराङ्गानि न यच्छति ।भिखारी अपने अङ्ग नहीं देता।
श्रमिकः शिरसि इष्टिकाः वहति ।मज़दूर सिर पर ईंटें ढोता है।
१०कृषकः क्षेत्रे कार्यं करोति ।किसान खेत में काम करता है।
Tip: वाक्य बनाते समय हर बार यह जाँच लीजिए — कर्ता का वचन और क्रिया का वचन एक हो (‘जनाः यच्छन्ति’, ‘धनिकः पश्यति’), और कर्म द्वितीया विभक्ति में हो। पाठ के अपने शब्दों (भिक्षा, धन, पाद, हस्त, शरीराङ्ग, परिश्रम) का प्रयोग कीजिए — इससे परियोजना पाठ से जुड़ी दिखेगी।
प्र3.
परियोजनाकार्यम् २ — द्वितीयाविभक्तेः आधारेण स्वदिनचर्यायाः विषये दश वाक्यानि लिखन्तु ।
उत्तर

यह अपने बारे में लिखने का काम है, इसलिए नीचे दिया उत्तर एक नमूना है — इसे अपनी दिनचर्या के अनुसार बदलिए। ढाँचा एक ही रखिए: कर्ता + कर्म (द्वितीया) + क्रिया, और सारे वाक्य ‘अहम्’ से आरम्भ कीजिए।

नमूना उत्तर (मम दिनचर्या) —

क्रमःसंस्कृतम्हिन्दी
अहं प्रातःकाले शय्यां त्यजामि ।मैं सुबह बिस्तर छोड़ता हूँ।
अहं दन्तान् धावयामि ।मैं दाँत साफ़ करता हूँ।
अहं व्यायामं करोमि ।मैं व्यायाम करता हूँ।
अहं जलं पिबामि ।मैं पानी पीता हूँ।
अहं मातरं पितरं च नमामि ।मैं माता-पिता को प्रणाम करता हूँ।
अहं विद्यालयं गच्छामि ।मैं विद्यालय जाता हूँ।
अहं कक्षायां पाठान् पठामि ।मैं कक्षा में पाठ पढ़ता हूँ।
अहं सायं कन्दुकं क्रीडामि ।मैं शाम को गेंद खेलता हूँ।
अहं रात्रौ गृहकार्यं करोमि ।मैं रात में गृहकार्य करता हूँ।
१०अहं शयनात् पूर्वं श्लोकं स्मरामि ।मैं सोने से पहले श्लोक याद करता हूँ।
अच्छे उत्तर में क्या-क्या होना चाहिए: (1) दसों वाक्य समय के क्रम में हों — प्रातः से रात्रि तक; (2) हर वाक्य में एक स्पष्ट द्वितीया-पद हो; (3) कम-से-कम तीन अलग-अलग वर्ग के शब्द आएँ — पुंलिङ्ग (कन्दुकम्, पाठान्), स्त्रीलिङ्ग (शय्याम्, मातरम्) और नपुंसकलिङ्ग (जलम्, गृहकार्यम्); (4) क्रिया सदा उत्तमपुरुष एकवचन में रहे — पठामि, गच्छामि, करोमि।
Check it yourself: यदि छात्रा लिख रही हो तो कर्ता ‘अहम्’ ही रहेगा (यह सर्वनाम लिङ्ग-निरपेक्ष है) — केवल विशेषण बदलेगा, जैसे ‘अहं छात्रा अस्मि’। ध्यान रखिए कि ‘क्रीड्’ धातु आत्मनेपदी भी है, इसलिए ‘कन्दुकेन क्रीडामि’ (तृतीया) भी शुद्ध है; पर इस परियोजना में द्वितीया चाहिए, इसलिए ‘कन्दुकं क्रीडामि’ लिखिए।
प्र4.
परियोजनाकार्यम् ३ — किं भवन्तः एवरेस्ट-पर्वतारोहिणीम् अरुणिमा-सिन्हां जानन्ति ? तस्याः विषये अन्वेषणं कृत्वा स्वभाषया दशवाक्यैः निबन्धं लिखन्तु ।
उत्तर

यह खोजकर लिखने का काम है। अरुणिमा सिन्हा का जीवन इसी पाठ का जीवित उदाहरण है — जिन्होंने एक पैर खोकर भी स्वयं को ‘दुर्बल’ नहीं माना, ठीक वैसे ही जैसे धनिक ने भिक्षुक से कहा था — ‘किमर्थं त्वम् आत्मानं दुर्बलं मन्यसे?’

निबन्ध में ये दस बातें आनी चाहिए: (1) जन्म और स्थान, (2) खेल-जीवन, (3) 2011 की दुर्घटना, (4) पैर का जाना, (5) अस्पताल में लिया गया संकल्प, (6) बछेन्द्री पाल से प्रशिक्षण, (7) एवरेस्ट-आरोहण की तिथि, (8) अन्य शिखर, (9) सम्मान, (10) उनसे मिलने वाली सीख। दस वाक्य इन्हीं दस बिन्दुओं पर बनाइए।

नमूना उत्तर (हिन्दी में) —

क्रमःवाक्यम्
अरुणिमा सिन्हा का जन्म उत्तर प्रदेश के अम्बेडकर नगर में हुआ था।
वे राष्ट्रीय स्तर की वॉलीबॉल तथा फुटबॉल खिलाड़ी रह चुकी हैं।
सन् 2011 में एक रेलयात्रा के दौरान लुटेरों ने उन्हें चलती गाड़ी से नीचे फेंक दिया।
इस दुर्घटना में उन्हें अपना एक पैर गँवाना पड़ा और उसकी जगह कृत्रिम पैर लगा।
अस्पताल में ही उन्होंने ठान लिया कि वे संसार की सबसे ऊँची चोटी पर चढ़ेंगी।
उन्होंने प्रसिद्ध पर्वतारोही बछेन्द्री पाल से प्रशिक्षण लिया।
21 मई 2013 को उन्होंने एवरेस्ट पर तिरंगा फहराया और ऐसा करने वाली विश्व की पहली दिव्याङ्ग महिला बनीं।
इसके बाद उन्होंने किलिमंजारो, एल्ब्रुस, कोसिअस्को, अकोंकागुआ तथा विन्सन जैसी चोटियाँ भी जीतीं।
भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री तथा तेनजिंग नोर्गे राष्ट्रीय साहसिक पुरस्कार से सम्मानित किया।
१०उनका जीवन सिखाता है कि शरीर की कमी नहीं, आलस्य और हार मान लेना ही असली दुर्बलता है।
Tip — यदि संस्कृत में लिखना चाहें: प्रश्न में ‘स्वभाषया’ कहा गया है, अर्थात् अपनी भाषा में लिखना पर्याप्त है। फिर भी दो-तीन वाक्य संस्कृत में जोड़ देने से परियोजना और अच्छी लगेगी —
अरुणिमा-सिन्हा एका साहसिका महिला अस्ति। सा एकेन कृत्रिमेण पादेन एवरेस्ट-शिखरम् आरूढवती। सा अस्माकं प्रेरणा अस्ति।
ध्यान दीजिए — ‘शिखरम् आरूढवती’ में द्वितीया विभक्ति है, अर्थात् यह परियोजना भी पाठ के व्याकरण से जुड़ी हुई है।
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