यह खोजकर लिखने का काम है। अरुणिमा सिन्हा का जीवन इसी पाठ का जीवित उदाहरण है — जिन्होंने एक पैर खोकर भी स्वयं को ‘दुर्बल’ नहीं माना, ठीक वैसे ही जैसे धनिक ने भिक्षुक से कहा था — ‘किमर्थं त्वम् आत्मानं दुर्बलं मन्यसे?’
निबन्ध में ये दस बातें आनी चाहिए: (1) जन्म और स्थान, (2) खेल-जीवन, (3) 2011 की दुर्घटना, (4) पैर का जाना, (5) अस्पताल में लिया गया संकल्प, (6) बछेन्द्री पाल से प्रशिक्षण, (7) एवरेस्ट-आरोहण की तिथि, (8) अन्य शिखर, (9) सम्मान, (10) उनसे मिलने वाली सीख। दस वाक्य इन्हीं दस बिन्दुओं पर बनाइए।
नमूना उत्तर (हिन्दी में) —
Tip — यदि संस्कृत में लिखना चाहें: प्रश्न में ‘स्वभाषया’ कहा गया है, अर्थात् अपनी भाषा में लिखना पर्याप्त है। फिर भी दो-तीन वाक्य संस्कृत में जोड़ देने से परियोजना और अच्छी लगेगी —
‘अरुणिमा-सिन्हा एका साहसिका महिला अस्ति। सा एकेन कृत्रिमेण पादेन एवरेस्ट-शिखरम् आरूढवती। सा अस्माकं प्रेरणा अस्ति।’
ध्यान दीजिए — ‘शिखरम् आरूढवती’ में द्वितीया विभक्ति है, अर्थात् यह परियोजना भी पाठ के व्याकरण से जुड़ी हुई है।