कक्षा ६ संस्कृत अध्याय 15 माधवस्य प्रियम् अङ्गम् के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन 2026-09-19
इस अध्याय के बारे में
कथा का आरम्भ (पृष्ठ 152)। ‘माधवनामकः एकः बालकः आसीत्। सः स्वप्ने स्वशरीरस्य अङ्गानि दृष्टवान्। तानि परस्परं चर्चां कुर्वन्ति स्म। ’ — सपने में माधव के शरीर के अङ्ग बोलने लगते हैं और हर एक कहता है ‘ अहम् एव श्रेष्ठः ’। हर अङ्ग अपना काम गिनाता है। पादः — ‘मम कारणेन माधवः चलति।’ हस्तः — ‘मम कारणेन माधवः लिखति, गृहकार्यं करोति।’ नयनम् — ‘मां विना माधवः किमपि द्रष्टुं शक्नोति किम्?’ कर्णः — ‘वाहनों की ध्वनि न सुने तो दुर्घटना हो जाए।’ मुखम् — ‘मेरे कारण भोजन, भाषण, उत्तर।’ इसी में पाठ का सारा क्रिया-शब्दभण्डार आ जाता है। निर्णय (पृष्ठ 153)। उदरम् झगड़ा रोकता है — ‘कोलाहलं न कुर्वन्तु। वयं सर्वे माधवम् एव पृच्छाम, कः श्रेष्ठः।’ और माधव उत्तर देता है — ‘ मम शरीरस्य सर्वाणि अङ्गानि मम कृते उपकारकाणि सन्ति … भवन्तः सर्वेऽपि श्रेष्ठाः। भवन्तः सर्वेऽपि मम प्रियाः। ’ यही पाठ का शीर्षक और यही उसका सन्द
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| शब्दः | अर्थः (संस्कृतम्) | हिन्दी | English |
|---|---|---|---|
| स्वप्ने | स्वप्नसमये | स्वप्न में | In dream |
| अङ्गानि | अवयवाः | अङ्ग | Body parts |
| दृष्टवान् | अपश्यत् | देखा | Saw |
| चर्चाम् | आलापम् | चर्चा को | Discussion |
| श्रेष्ठः | उत्तमः | श्रेष्ठ | Great |
| अनुक्षणम् | सत्वरम् | उसी समय | Instantly |
| मां विना | मां विहाय | मेरे बिना | Without me |
| स्मितम् | मन्दहासः | थोड़ा हँस के | Smile |
| शक्नोति | समर्थः भवति | समर्थ होता है | Able to |
| सबलाः | बलवन्तः | बलवान् | Strong |
| कोलाहलम् | आरवः | शोर | Quarrel / noise |
| उपकारकाणि | सहायकानि | सहायता करने वाले | Helpful |
अभ्यास
- पञ्चदशः पाठः
- पञ्चदशः पाठः
- पाठ्य-प्रश्नाः (पाठे विद्यमानाः प्रश्नाः)
- वयं शब्दार्थान् जानीमः
- वयम् अभ्यासं कुर्मः
- वयम् अभ्यासं कुर्मः
- वयम् अभ्यासं कुर्मः
- योग्यताविस्तरः
- मधुराष्टकं पठन्तु स्मरन्तु च
- गतिविधि-कार्यम् तथा परियोजनाकार्यम्