कक्षा ६ संस्कृत अध्याय 16 वृक्षाः सत्पुरुषाः इव के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन 2026-09-19

इस अध्याय के बारे में

पाठ का आरम्भ (पृष्ठ 160)। ‘ पर्यावरणसंरक्षणस्य विषये एका प्रदर्शनी विद्यालये आयोजिता अस्ति। ’ — छात्र प्रदर्शनी देखते हैं और शिक्षक से संलाप करते हैं। एक छात्रा कहती है कि जीवविज्ञान की पुस्तक में पढ़ा है ‘वृक्षाः शुद्धं वायुं यच्छन्ति’, दूसरी कहती है ‘मम माता अपि वदति यत् वृक्षाः पूज्याः भवन्ति’। मुदिता एक सुभाषित सुनाती है और वहीं से पाठ के छह सुभाषित आरम्भ होते हैं। छह सुभाषित, एक ही सन्देश — परोपकारः। (१) छायामन्यस्य कुर्वन्ति… (२) दशकूपसमा वापी… (३) अहो एषां वरं जन्म… (४) परोपकाराय फलन्ति वृक्षाः… (५) पुष्प-पत्र-फलच्छाया-मूल-वल्कल-दारुभिः… (६) पिबन्ति नद्यः स्वयमेव नाम्भः… — हर श्लोक के साथ पुस्तक पदच्छेदः , अन्वयः और भावार्थः देती है। पाठ का मुख्य वाक्य। ‘ फलान्यपि परार्थाय वृक्षाः सत्पुरुषा इव ’ — वृक्ष स्वयं धूप में खड़े रहते हैं पर दूसरों को छाया देते हैं, फल स्वयं नहीं खाते पर दू

त्वरित पुनरावृत्ति
शब्दःअर्थः (संस्कृतम्)हिन्दीEnglish
आतपेसूर्यतापेधूप मेंIn the sunlight
परार्थायअन्येषाम् उपकारायदूसरों के उपकार के लिएFor the sake of others
सत्पुरुषाःसज्जनाःसज्जन लोगNoble men
वापीदीर्घिकाबावड़ीStepwell
ह्रदःसरोवरःतालाब / झीलPond / Lake
द्रुमःवृक्षःपेड़Tree
वरम्श्रेष्ठम्श्रेष्ठBest
अर्थिनःप्राप्तुम् इच्छुकाःप्राप्त करने के इच्छुकWishing to receive
वहन्तिप्रवहन्तिबहती हैंFlows
वल्कलम्वृक्षस्य त्वक्पेड़ की छालBark of tree
दारुभिःकाष्ठैःलकड़ियों सेBy wood
महीरुहाःवृक्षाःपेड़Trees
अम्भःजलम्पानीWater
वारिवाहाःमेघाःबादलClouds
विभूतयःसमृद्धयःसमृद्धियाँProsperity
  1. षोडशः पाठः
  2. सुभाषितानि
  3. सुभाषितानि
  4. सुभाषितानि
  5. वयं शब्दार्थान् जानीमः
  6. वयम् अभ्यासं कुर्मः
  7. वयम् अभ्यासं कुर्मः
  8. वयम् अभ्यासं कुर्मः
  9. वयम् अभ्यासं कुर्मः
  10. योग्यताविस्तरः
  11. परियोजनाकार्यम्
  12. परिशिष्टम्
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