दीपकम् अध्याय 16 परियोजनाकार्यम्

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
विद्यालयं गृहं वा परितः विद्यमानानां पञ्च-पादपानां (वृक्षाणां) संरक्षणं कुर्वन्तु ।
उत्तर

यह करके दिखाने वाला कार्य है — इसका उत्तर कॉपी में नहीं, वृक्षों की देखभाल में लिखा जाता है। नीचे विधि और एक भरा हुआ नमूना-अभिलेख दिया है, जिसे आप अपने वृक्षों के नाम डालकर बना सकते हैं।

विधिः (कैसे करें):

  1. विद्यालय या घर के आसपास पाँच पेड़ चुनिए और हर एक को एक नाम-पट्टिका दीजिए (संस्कृत नाम सहित)।
  2. प्रत्येक पेड़ की थाला (आलवाल) बनाकर सप्ताह में दो बार जल दीजिए।
  3. सूखे पत्ते जड़ के पास ही इकट्ठे कीजिए — वही खाद बन जाएगी।
  4. छोटे पौधों के चारों ओर बाड़ लगाइए ताकि पशु न चरें।
  5. एक वृक्ष-अभिलेख (रजिस्टर) बनाइए और हर सप्ताह की स्थिति लिखिए।

नमूना उत्तर — वृक्ष-अभिलेखः:

क्रमाङ्कःवृक्षस्य नाम (संस्कृतम्)हिन्दीउपकारःमम कार्यम्
न्यग्रोधःबरगदविशाला छाया, शुद्धः वायुःप्रतिसप्ताहं जलसेचनम्
अश्वत्थःपीपलअधिकतमं प्राणवायुं यच्छतिमूलसमीपे स्वच्छता
निम्बःनीमऔषधीयानि पत्राणिपर्णानां संरक्षणम्
आम्रःआमफलानि, छायावेष्टनस्य निर्माणम्
तुलसीतुलसीऔषधिः, सुगन्धःप्रतिदिनं जलदानम्
एक वाक्य में प्रतिज्ञा (कक्षा में बोलिए):अहं पञ्च वृक्षाणां संरक्षणं करिष्यामि, यतः दशपुत्रसमः द्रुमः भवति ।’ — यही पाठ के दूसरे सुभाषित का सन्देश है।
प्र2.
अन्तर्जालस्य साहाय्येन परोपकारविषये दश-सुभाषितानां संग्रहणं कुर्वन्तु ।
उत्तर

विधिः — अन्तर्जाल (इंटरनेट) पर ‘परोपकार सुभाषित’, ‘परोपकाराय सुभाषितानि’ जैसे शब्द खोजिए; विश्वसनीय स्रोत (NCERT, संस्कृत भारती, विकिस्रोत) से लीजिए; हर सुभाषित के साथ अर्थ और स्रोत अवश्य लिखिए। बड़ों की सहायता लेकर ही खोज कीजिए।

नमूना संग्रहः — परोपकारविषयकानि दश सुभाषितानि:

क्रमःसुभाषितम्हिन्दी अर्थः
परोपकाराय फलन्ति वृक्षाः परोपकाराय वहन्ति नद्यः ।पेड़ और नदियाँ दूसरों के उपकार के लिए ही फलते और बहते हैं।
पिबन्ति नद्यः स्वयमेव नाम्भः स्वयं न खादन्ति फलानि वृक्षाः ।नदियाँ अपना जल और पेड़ अपने फल स्वयं नहीं भोगते।
परोपकाराय सतां विभूतयः ।सज्जनों की सम्पत्तियाँ परोपकार के लिए होती हैं।
अष्टादशपुराणेषु व्यासस्य वचनद्वयम् । परोपकारः पुण्याय पापाय परपीडनम् ॥अठारह पुराणों में व्यास की दो ही बातें हैं — परोपकार पुण्य है, दूसरे को पीड़ा देना पाप।
पत्रं नैव यदा करीरविटपे दोषो वसन्तस्य किम् ।करील की डाल पर पत्ता न आए तो इसमें वसन्त का क्या दोष — देने वाला सदा देता ही है।
परोपकारशून्यस्य धिक् मनुष्यस्य जीवितम् ।जिस मनुष्य के जीवन में परोपकार नहीं, उसके जीवन को धिक्कार है।
वृक्षाग्रवासी न च पक्षिराजः … (प्रहेलिका)पाठ की ही प्रहेलिका — नारियल भी सब कुछ दूसरों को देता है।
गुणा गुणज्ञेषु गुणा भवन्ति ।गुण उन्हीं के पास गुण बनते हैं जो गुण को पहचानते हैं।
विद्या ददाति विनयं विनयाद् याति पात्रताम् ।विद्या विनय देती है, विनय से योग्यता आती है — विद्या भी देने का ही काम करती है।
१०सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः ।सब सुखी हों, सब निरोग हों — यही परोपकार की सबसे बड़ी प्रार्थना है।
प्रस्तुति का सुझाव: दसों सुभाषित एक चार्ट पर सुन्दर अक्षरों में लिखिए, बीच में एक वृक्ष का चित्र बनाइए और हर शाखा पर एक सुभाषित लिखिए — यह ‘सुभाषित-वृक्षः’ कक्षा की दीवार के लिए अच्छी प्रस्तुति बनेगी।
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