प्र1.
विद्यालयं गृहं वा परितः विद्यमानानां पञ्च-पादपानां (वृक्षाणां) संरक्षणं कुर्वन्तु ।
उत्तर
यह करके दिखाने वाला कार्य है — इसका उत्तर कॉपी में नहीं, वृक्षों की देखभाल में लिखा जाता है। नीचे विधि और एक भरा हुआ नमूना-अभिलेख दिया है, जिसे आप अपने वृक्षों के नाम डालकर बना सकते हैं।
विधिः (कैसे करें):
- विद्यालय या घर के आसपास पाँच पेड़ चुनिए और हर एक को एक नाम-पट्टिका दीजिए (संस्कृत नाम सहित)।
- प्रत्येक पेड़ की थाला (आलवाल) बनाकर सप्ताह में दो बार जल दीजिए।
- सूखे पत्ते जड़ के पास ही इकट्ठे कीजिए — वही खाद बन जाएगी।
- छोटे पौधों के चारों ओर बाड़ लगाइए ताकि पशु न चरें।
- एक वृक्ष-अभिलेख (रजिस्टर) बनाइए और हर सप्ताह की स्थिति लिखिए।
नमूना उत्तर — वृक्ष-अभिलेखः:
| क्रमाङ्कः | वृक्षस्य नाम (संस्कृतम्) | हिन्दी | उपकारः | मम कार्यम् |
|---|---|---|---|---|
| १ | न्यग्रोधः | बरगद | विशाला छाया, शुद्धः वायुः | प्रतिसप्ताहं जलसेचनम् |
| २ | अश्वत्थः | पीपल | अधिकतमं प्राणवायुं यच्छति | मूलसमीपे स्वच्छता |
| ३ | निम्बः | नीम | औषधीयानि पत्राणि | पर्णानां संरक्षणम् |
| ४ | आम्रः | आम | फलानि, छाया | वेष्टनस्य निर्माणम् |
| ५ | तुलसी | तुलसी | औषधिः, सुगन्धः | प्रतिदिनं जलदानम् |
एक वाक्य में प्रतिज्ञा (कक्षा में बोलिए): ‘अहं पञ्च वृक्षाणां संरक्षणं करिष्यामि, यतः दशपुत्रसमः द्रुमः भवति ।’ — यही पाठ के दूसरे सुभाषित का सन्देश है।