दीपकम् अध्याय 16 वयम् अभ्यासं कुर्मः

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
उदाहरणानुसारम् अधोलिखितेषु वाक्येषु स्थूलाक्षरपदानां विभक्तिं निर्दिशन्तु — (क) वृक्षाः अन्यस्य कृते ‘छायां’ कुर्वन्ति । — द्वितीया विभक्तिः (ख) वृक्षाः परार्थाय ‘फलानि’ यच्छन्ति । (ग) वृक्षाः ‘सत्पुरुषाः’ इव सन्ति । (घ) ‘द्रुमः’ दशसन्तानसमः भवति । (ङ) वृक्षः ‘प्राणिभ्यः’ काष्ठानि यच्छति । (च) ‘नद्यः’ जलं स्वयमेव न पिबन्ति । (छ) सज्जनानां ‘सङ्गतिं’ करोतु । (स्थूलाक्षरपदानि एकोद्धरणचिह्नेन दर्शितानि)
उत्तर

उदाहरण (क) पुस्तक ने स्वयं हल किया है — ‘छायां’ कर्म है, इसलिए द्वितीया विभक्तिः। शेष सब पर वही तरीका लगाइए: पहले पूछिए कि वाक्य में उस पद की भूमिका क्या है — कर्ता, कर्म, या सम्प्रदान।

वाक्यम्स्थूलपदम्विभक्तिःवचनम् / कारणम्
(क) वृक्षाः अन्यस्य कृते छायां कुर्वन्ति ।छायाम्द्वितीया विभक्तिःएकवचन — ‘कुर्वन्ति’ का कर्म (कर्मणि द्वितीया)
(ख) वृक्षाः परार्थाय फलानि यच्छन्ति ।फलानिद्वितीया विभक्तिःबहुवचन (नपुं.) — ‘यच्छन्ति’ का कर्म
(ग) वृक्षाः सत्पुरुषाः इव सन्ति ।सत्पुरुषाःप्रथमा विभक्तिःबहुवचन — ‘इव’ के साथ उपमान भी कर्ता के समान प्रथमा में रहता है
(घ) द्रुमः दशसन्तानसमः भवति ।द्रुमःप्रथमा विभक्तिःएकवचन — वाक्य का कर्ता
(ङ) वृक्षः प्राणिभ्यः काष्ठानि यच्छति ।प्राणिभ्यःचतुर्थी विभक्तिःबहुवचन — जिसे दिया जाए वह सम्प्रदान (सम्प्रदाने चतुर्थी)
(च) नद्यः जलं स्वयमेव न पिबन्ति ।नद्यःप्रथमा विभक्तिःबहुवचन (स्त्री.) — वाक्य की कर्ता
(छ) सज्जनानां सङ्गतिं करोतु ।सङ्गतिम्द्वितीया विभक्तिःएकवचन (स्त्री.) — ‘करोतु’ का कर्म
तीन नियम, जिनसे सातों उत्तर निकल आते हैं:
कर्तरि प्रथमा — जो काम करे (द्रुमः, नद्यः)। ‘इव’ से जुड़ा उपमान भी प्रथमा में ही (सत्पुरुषाः)।
कर्मणि द्वितीया — जिस पर काम पड़े (छायाम्, फलानि, सङ्गतिम्)। पहचान: क्रिया से ‘किसको / क्या’ पूछिए।
सम्प्रदाने चतुर्थी — जिसे दिया जाए (प्राणिभ्यः)। पहचान: ‘किसके लिए / किसको दिया’ — दा, यम्, यच्छ् जैसी ‘देने’ वाली धातुओं के साथ यही आती है
सावधानी — (ङ) में भ्रम मत खाइए: ‘प्राणिभ्यः’ का रूप देखकर पञ्चमी बहुवचन लग सकता है, क्योंकि चतुर्थी और पञ्चमी का बहुवचन रूप एक जैसा (-भ्यः) होता है। यहाँ क्रिया यच्छति (देता है) है, इसलिए अर्थ ‘प्राणियों को देता है’ बनता है — अतः चतुर्थी। यदि क्रिया ‘आगच्छति’ होती तो पञ्चमी होती।
प्र2.
अधोलिखितानां पदानां द्विवचने बहुवचने च रूपाणि लिखन्तु — (क) वृक्षः — वृक्षौ, वृक्षाः (ख) मेघः (ग) ह्रदः (घ) सत्पुरुषः (ङ) छाया (च) वापी (छ) नदी (ज) शरीरम् (झ) पुष्पम् ।
उत्तर

सभी पद प्रथमा विभक्ति, एकवचन में दिए हैं; इनके द्विवचन और बहुवचन रूप लिखने हैं। उत्तर लिङ्ग और अन्त्य-स्वर देखकर तय होते हैं।

पदम् (एकवचनम्)द्विवचनम्बहुवचनम्शब्दः / लिङ्गम्
(क) वृक्षःवृक्षौवृक्षाःअकारान्त पुँल्लिङ्ग (राम-शब्दवत्)
(ख) मेघःमेघौमेघाःअकारान्त पुँल्लिङ्ग
(ग) ह्रदःह्रदौह्रदाःअकारान्त पुँल्लिङ्ग
(घ) सत्पुरुषःसत्पुरुषौसत्पुरुषाःअकारान्त पुँल्लिङ्ग
(ङ) छायाछायेछायाःआकारान्त स्त्रीलिङ्ग (रमा-शब्दवत्)
(च) वापीवाप्यौवाप्यःईकारान्त स्त्रीलिङ्ग (नदी-शब्दवत्)
(छ) नदीनद्यौनद्यःईकारान्त स्त्रीलिङ्ग
(ज) शरीरम्शरीरेशरीराणिअकारान्त नपुंसकलिङ्ग (फल-शब्दवत्)
(झ) पुष्पम्पुष्पेपुष्पाणिअकारान्त नपुंसकलिङ्ग
चार साँचे याद कर लीजिए, नौ के नौ उत्तर बन जाएँगे:
• अकारान्त पुँल्लिङ्ग (राम) — ः / / आः → वृक्षः, वृक्षौ, वृक्षाः
• आकारान्त स्त्रीलिङ्ग (रमा) — आ / / आः → छाया, छाये, छायाः
• ईकारान्त स्त्रीलिङ्ग (नदी) — ई / यौ / यः → नदी, नद्यौ, नद्यः
• अकारान्त नपुंसकलिङ्ग (फल) — म् / / आनि → पुष्पम्, पुष्पे, पुष्पाणि
Tip — ‘वाप्यः’ और ‘नद्यः’ में इ-कार क्यों नहीं दिखता? ईकारान्त स्त्रीलिङ्ग में स्वर के आगे स्वर आने पर ई → य् हो जाता है (यण्-सन्धि): वापी + अः = वाप्यः, नदी + औ = नद्यौ। पाठ में भी यही रूप छपा है — ‘परोपकाराय वहन्ति नद्यः’। ध्यान रखिए, ‘शरीराणि’ और ‘पुष्पाणि’ में होता है (णत्व-विधि), ‘न’ नहीं।
प्र3.
अधोलिखितानां पदानां परस्परं समुचितं मेलनं कृत्वा ‘कः किं ददाति’ इति लिखन्तु — (क) वृक्षः — दुग्धं (ख) गौः — प्रकाशं (ग) सूर्यः — विद्यां (घ) नदी — शुद्धं वायुं (ङ) अग्निः — जलम् (च) शिक्षकः — तापं । यथा — वृक्षः शुद्धं वायुं ददाति ।
उत्तर

बाएँ स्तम्भ में देने वाला है और दाएँ स्तम्भ में दी जाने वाली वस्तु — पर जोड़े जान-बूझकर उलट-पुलट छपे हैं। पुस्तक ने पहला मेल जोड़कर दिखा दिया है (वृक्षः → शुद्धं वायुं)। शेष अर्थ के आधार पर जोड़िए।

कः (कर्ता)किम् (कर्म)पूर्णं वाक्यम्हिन्दी
(क) वृक्षःशुद्धं वायुंवृक्षः शुद्धं वायुं ददाति ।पेड़ शुद्ध वायु देता है।
(ख) गौःदुग्धंगौः दुग्धं ददाति ।गाय दूध देती है।
(ग) सूर्यःप्रकाशंसूर्यः प्रकाशं ददाति ।सूर्य प्रकाश देता है।
(घ) नदीजलम्नदी जलं ददाति ।नदी जल देती है।
(ङ) अग्निःतापंअग्निः तापं ददाति ।आग ताप (गर्मी) देती है।
(च) शिक्षकःविद्यांशिक्षकः विद्यां ददाति ।शिक्षक विद्या देते हैं।
वाक्य बनाते समय दो बातें देखिए:
कर्ता प्रथमा में रहेगा — वृक्षः, गौः, सूर्यः, नदी, अग्निः, शिक्षकः (सब प्रथमा एकवचन)।
कर्म द्वितीया में — वायुम् → ‘वायुं’, दुग्धम् → ‘दुग्धं’, प्रकाशम् → ‘प्रकाशं’, जलम्, तापम् → ‘तापं’, विद्याम् → ‘विद्यां’। ध्यान दीजिए, पुस्तक की पट्टिका में ये पद पहले से द्वितीया विभक्ति में छपे हैं — इसलिए उन्हें ज्यों का त्यों उठाकर रख दीजिए।
Try this: इसी साँचे पर अपने पाँच वाक्य बनाइए — माता स्नेहं ददाति । मेघः वृष्टिं ददाति । पुस्तकं ज्ञानं ददाति । कृषकः अन्नं ददाति । मित्रं साहाय्यं ददाति । ‘ददाति’ के स्थान पर पाठ का शब्द यच्छति भी लगाया जा सकता है — दोनों का अर्थ ‘देता है’ ही है।
क्या यह उपयोगी रहा? त्रुटि बताएँ